Recent Post
 

Essay On Swami Vivekananda In Hindi – स्वामी विवेकानंद पर निबंध

Essay On Swami Vivekanand In Hindi - स्वामी विवेकानंद पर निबंध

Essay On Swami Vivekananda In Hindi. प्रिय छात्रों, आज के इस निबंध में हम पड़ेगे Essay On Swami Vivekananda In Hindi के बारे में. यानी की स्वामी विवेकानंद पर निबंध, स्वामी विवेकानंद कोन थे और इनके कुछ शब्दों का भारत पे कैसा असर हुआ था.

इन्होने अपने देश के लिए क्या क्या काम किए है. और उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देश को शुधारने में लगा दिया था. Essay On Swami Vivekananda In Hindi के इस निबन्ध में हम स्वामी विवेकानंद के बारे चर्चा करेंगे.

Essay On Swami Vivekananda In Hindi- स्वामी विवेकानंद पर निबंध.

  • Introduction Essay On Swami Vivekananda – स्वामी विवेकानंद पर निबंध की प्रस्तावना
  • Who Was Swami Vivekananda – स्वामी विवेकानंद कोन थे
  • Swami Vivekananda Childhood And Education – स्वामी विवेकानंद का बचपन और शिक्षा
  • Essay On Swami Vivekananda Conclusion In Hindi – स्वामी विवेकानंद के निबंध पर निर्ष्कर्ष
  • Essay On Swami Vivekananda In Hindi 100 Word – स्वामी विवेकानंद पर हिंदी में 100 शब्दों का निबंध
  • Precious Thoughts Of Swami Vivekananda – स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार
  • Essay On Swami Vivekananda In Hindi (300 Word) – स्वामी विवेकानंद पर निबंध हिंदी में (300 शब्द)
  • Essay On Swami Vivekananda In Hindi (500 Word) – स्वामी विवेकानंद पर 500 शब्दों का निबंध हिंदी में

दोस्तों, स्वामी विवेकानंद की गिनती हमारे भारत के महापुरुषो में की जाती है. उस समय भारत जब अंग्रेजी दासता में अपने को दीन-हीन पा रहा था. भारत माता ने एक ऐसे महा पुरष को जन्म दिया जिसने पुरे भारत के लोगो को ही नही बल्कि पूरी मानवता का गोरव बढ़ाया. उन्होंने विश्व के लोगो को भारत के अध्यात्म का रसास्वादन कराया. इस महापुरुष पर पुरे भारत को गर्व है.

स्वामी विवेकानंद पर निबंध प्रस्तावना – Introduction Essay On Swami Vivekananda In Hindi

विवेकानंद को पुरे देश में स्वामी विवेकानंद के नाम से जाना जाता है. वह भारत के एक प्रसिद्ध कर्न्तिकारी व्यक्ति थे जिन्हें भारत में ही नही वल्कि पुरे विश्व में स्वामी विवेकानंद का नाम से जाना जाता है. और स्वामी विवेकानंद ने कुछ ऐसे दो शब्द बोले थे जिससे की पूरा अमेरिका उनके साइड हो गया था.

स्वामी विवेकानंद भारत के अध्यात्मिक उथान मतलब Spiritual Enlightenment के लिए बहुत कार्य किया 19 वीं सदी में भारतीय विध्वान राम कृषण परम हंस के सिष्य और भारतीय संस्कृति एवं सह्त्ये को विदेशो तक फ़ैलाने वाले महा पुरष स्वामी विवेकानंद सम्पूर्ण विश्व में हिन्दू धर्म के महत्व को वताया और उन्होंने गरीबो की सेवा के लिए राम कृषण मिशन की स्थापना की और देश के युवाओ में प्रगति करने के लिए नया जोस और उत्साह्ब भर दिया.

नरेन्द्र का जीवन ब्रिटिश राज में कलकत्ता सेहर में 12 जनवरी 1863 को मकर संक्रांति के दिन हुआ था. जन्म के समय इनका नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था प्यार से लोग इन्हें नरेन्द्र बुलाया करते थे वह एक पारम्परिक बंगाल के परिवार से थे और कुल 9 भाई बेहेन थे.

उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता उच्नालय यानी की हाई कोर्ट में अभिबकता यानी अटोर्नी थे. और माता भुब्नेश्वरी देवी एक धार्मिक घरेलु महिला थी. उनके दादा जी संस्कृत और फारसी के विद्वान थे घर में ही इस प्रकार के धार्मिक और शिक्षक माहोल में नरेन्द्र का इतना उच्च व्यक्तित्व बनाया.

सन 1884 में उनके पिता विश्वनाथ दत्त की म्रत्यु हो गयी और घर का सारा भार नरेन्द्र पर आ पड़ा था. घर की दशा बहुत ख़राब हो गयी थी. कुशल यही थी की नरेन्द्र का विवाह नही हुआ था. अत्यंत गरीबी में भी नरेन्द्र बड़े अतिथि सेवी थे.नरेन्द्र खुद भूके रहकर अतिथि को खाना खिलते थे. और खुद बहार बारिश में रातभर भीगते-ठिठुरते रहते थे और अतिथि को अपने विस्तर पर सुला देते थे.

नरेन्द्र के गुरु श्री रामकृष्ण जी की मर्त्यु के बाद नरेन्द्र ने बड़े बड़े पेमानो पर भारतीय उप्माहदीप्का दौरा किया और ब्रिटिश भारतीय स्थितियों को जाना और उनके बाद धर्म संसद 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए अमेरिका की और चल पड़े थे.

नरेन्द्र ने अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिन्दू दर्शन के सिधान्तो का प्रसार किया और उन्होंने हजारो सार्वजानिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया.

भारत में आज भी उनके द्वारा किए गए कार्यो का ऋणी है. हमारे देश में आज भी उनका नाम बड़े आदर सम्मान के साथ लिया जाता है. और उनको याद करने के लिए हम आज भी गाने पर उनके विचारो को दोहराते है जैसे :-

हे शिव्शाम्बू हे त्रिपुरारी

माया अपरम्पार तुम्हारी

हे शिव्शाम्बू हे त्रिपुरारी

माया अपरम्पार तुम्हारी

अमर धाम कई लाख निवासी

विश्वनाथ कासी आदिवासी

सोमनाथ रामेश्वर वासी

सकल तीर्थ की महिमा बारी

हे शिव्शाम्बू हे त्रिपुरारी

माया अपरम्पार तुम्हारी

स्वामी विवेकानंद कोन थे – Who Was Swami Vivekananda

विवेकानंद जी का जन्म दिनांक 12 जनवरी 1863 को ब्रिटिश राज कोलकता में हुआ था. उनके पिता जी का नाम श्री विश्वनाथ दत्त था और उनकी माता का नाम श्रीमती भुवनेश्वरी देवी था. उनके बचपन का नाम नरेन्द्र दत्त था और उन्हें लोग प्यार से नरेन के नाम से भी बुलाते थे. स्वामी विवेकानंद जी की माँ ने उनका नाम वीरेश्वर रखा था.

स्वामी विवेकानंद ने एक धनी और विद्वान परिवार में जन्म लिया था. विवेकानंद के पिता श्री विश्वनाथ दत्त कोलकत्ता (कोलकाता) एक उच्च न्यायालय में एक अच्छे बकील थे और वकालत करते थे.और अपने लाडले पुत्र को भी अंग्रेजी पड़ाकर एक अच्छा व्यक्ति बनाना चाहते थे.

उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक और बीसवीं के पहले दशक के दौरान भारत और अमेरिका दोनों में प्रसिद्ध था. 1893 में शिकागो ए आयोजित धर्म संसद में भारत के अज्ञात भिशु ने अचानक ख्याति प्राप्त कर ली. जिसमे उन्होंने हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व किया.

पूर्वी और पश्चिमी संस्कृति के अपने विशाल ज्ञान के साथ-साथ उनकी गहरी आध्यात्मिक अंतर्द्रष्टि व्यापक वाक्पटुता शानदार बातचीत व्यापक मानवीय सहानुभूति रंगीन व्यक्तित्व और सुंदर आकृति ने कई प्रकार के अमेरिकायो के लिए एक अनूठा अपील की, जो उनके सम्पर्क में आय. जिन लोगो ने विवेकानंद को देखा या सुना था, वे अभी भी एक बार आधी सदी से अधिक समय के बाद भी उनकी याद को संजोय हुए है.

अमेरिका में विवेकानंद के मिशन में भारत की आध्यात्मिक संस्कृति की व्याख्या थी. विशेष रूप से इसकी वेदेटिक सेटिंग में उन्होंने वेदांत दर्शन की तकर्संगत और मानवतावादी शिक्षाओ के माध्यम से अमेरिकियों की धार्मिक चेतना को समर्ध करने का भी प्रयास किया.

अमेरिका में वे भारत के आध्यात्मिक राजदूत बने और धर्म और विज्ञानं के छेत्र में पूर्व और पश्चिम का एक स्वस्थ संस्लेषद बनाने के लिए भारत और नई दुनिया के बीच बेहतर समझ की वकालत की.

स्वामी विवेकानंद का बचपन और शिक्षा – Swami Vivekananda Childhood And Education

विवेकानंद का जन्म कलकत्ता में 12 जनवरी 1863 को एक अमीर, सम्मानित और प्रसिद्ध परिवार में हुआ था। अपने पूर्व-मठवासी दिनों में उन्हें नरेन कहा जाता था। उनके पिता विश्वनाथ दत्ता कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील थे और उनकी माँ भुवनेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं। ऐसा कहा जाता है कि उसने भगवान शिव का सपना देखा था जिसने अपने बेटे के रूप में जन्म लेने का वादा किया था। तदनुसार। नरेन या नरेंद्रनाथ का जन्म उनके साथ हुआ था।

बचपन से ही नरेंद्रनाथ एक प्यारा किरदार था, जो मस्ती और दिलकश प्यार करता था। लेकिन साथ ही वह दूसरों से थोड़ा अलग था। कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद, उन्होंने आध्यात्मिक मामलों में बहुत रुचि विकसित की।

1881 में, वे रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आए, जो कलकत्ता के ठीक बाहर, दिनेश्वरन में रहते थे. इन दोनों महान आत्माओं की ऐतिहासिक मुलाकात का बड़ा महत्व था। गुरु रामकृष्ण के लिए, उन्हें अपनी आध्यात्मिक इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपनी पसंद का शिष्य मिल गया।

वार्ड नरेंद्रनाथ के लिए, बैठक ने उनके जीवन के पाठ्यक्रम को पूरी तरह से बदल दिया। नरेंद्रनाथ ने अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शन और समर्थन के साथ खुद को गुरु और गुरु के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उनके भीतर सार्वभौमिकता और कैथोलिकता का संदेश निहित किया।

यह 1888 में था, मास्टर की मृत्यु के दो साल बाद, युवा स्वामी ने his जागृत भारत ’या प्रबुद्ध भारत के अपने संदेश के साथ देश भर में भटकने का जीवन शुरू किया। उन्होंने 11 सितंबर को शिकागो में विश्व धर्म संसद में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया।

उनके छोटे लेकिन जोरदार भाषण ने धर्म संसद के मुख्य वक्ता को मारा, अर्थात् हिंदू मान्यता पर आधारित सार्वभौमिक सहिष्णुता का नोट है कि सभी धर्म एक ही ईश्वर के लिए मार्ग हैं। उनके उपदेश ने पश्चिमी लोगों को आकर्षित किया।

कई उनके शिष्य बन गए। भारत लौटने पर उन्होंने 1 मई, 1897 को रामकृष्ण मिशन खोला। शेष जीवन उन्होंने भारत और विदेशों में वेदों के संदेशों के प्रचार में बिताया। उन्होंने 1902 में अड़तीस साल की उम्र में अंतिम सांस ली।

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार – Precious Thoughts Of Swami Vivekananda

आप सभी को बता दे की स्वामी विवेकानंद जी को भारत की प्ररणा माना जाता है और वही बाते जो स्वामी विवेकानंद कहते है. मन को उर्जा से भर देते है. उसी समय हम सभी जानते है कि वह अब इस दुनिया में नही है. लेकिन लोगो को उसके शब्दों को याद करके आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।

इसी समय, स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में उनका भाषण आज भी पूरी दुनिया में लोक प्रिय माना जाता है और स्वामी विवेकानंद के समय को सबसे कीमती माना जाता है। इसलिए वह सेवा करने के लिए अपना एक मिनट लेता था। अब आज हम आपको स्वामी विवेकानंद के कुछ अनमोल विचार बताने जा रहे हैं।

  • दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो.
  • क समय में एक ही काम करे. ऐसा करते समय अपना पुरास ध्यान लगा दे और वाकी सब कुछ भूल जायं.
  • जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिए नही तो लोगो का विश्राम उठ जाता है.
  • उठो और जागो और तब तक रुको नही जब तक की तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नही कर लेते.
  • शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दे और बाकि के सभी विचारो को एक तरफ रख दे. यही सफल होना है.
  • खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है. सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना. अपने आप पर विश्वास करो.
  • आग जो हमे गर्मी देती है. हमे भी नष्ट कर सकती है. यह अग्नि का दोष नही है.
  • मस्तिष्क की शक्तियां सूर्य की किरणों के समान होती है. जब वे केन्द्रित होती है. तो चमक उठती है.
  • जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी.
  • एक रास्ता खोज उस पर विचार करो उस विचार को अपना जीवन बना लो अपने बारे में सोचो उसका सपना देखो उस विचार पर जियो. मस्तिष्क मांसपेसियो नशो को आपके शरीर के प्रय्तेक भाग को उस विचार से भर दो. और किसी अन्य विचार को जगह मत दो सफलता का यही रास्ता है.

स्वामी विवेकानंद के निबंध पर निर्ष्कर्ष – Essay On Swami Vivekananda Conclusion In Hindi

दोस्तों स्वामी विवेकानंद गे के भारत में जन्म लेने से भारत भूमि धन्य हो गयी. स्वामी जी जैसे महापुरष साड़ियों में जन्म लेते है. जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से हमारे देश का नाम पूरी दुनिया में विख्यात किया और माँ भारती का सर गर्व से ऊँचा किया.

विवेकानंद जी के भाषण में एक अलग सा उत्साह होता था जिसे युवा आज भी सुनते है और सुनकर देश के प्रति करए की भावना की ऊर्जा ग्रहण करते है. स्वामी विवेकानंद जी सदैव सत्य के मार्ग पर चले और लोगो को सत्य के मार्ग पर चलने का ज्ञान दिया. उन्होंने रामकृष्ण मिशन, रामकृष्ण मठ की भी स्थापना की और विभिन्न प्रेरणादायक पुस्तकें भी लिखीं.

Essay On Swami Vivekananda In Hindi 100 Word – स्वामी विवेकानंद पर हिंदी में 100 शब्दों का निबंध

स्वामी विवेकानंद का जन्म 18 जनवरी 1863 को कोलकाता में विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के रूप में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था.वह आध्यात्मिक विचारों वाला एक असाधारण लड़का था. उनकी शिक्षा अनियमित थी, लेकिन उन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज, कोलकाता से अपनी कला स्नातक की डिग्री पूरी की.

उनका धार्मिक और भिक्षु जीवन तब शुरू हुआ जब वे श्री रामकृष्ण से मिले और उन्हें अपना गुरु स्वीकार किया। उन्होंने बाद में वेदांत आंदोलन का नेतृत्व किया और पश्चिमी देशों में हिंदू धर्म के भारतीय दर्शन को पेश किया. 11 सितंबर 1893 को विश्व धर्म संसद में उनका शिकागो भाषण, जहां उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
हिंदू धर्म को एक महत्वपूर्ण विश्व धर्म के रूप में स्थापित करने में मदद की वह हिंदू शास्त्रों (वेदों, उपनिषदों, पुराणों, भगवद गीता, आदि) के गहन ज्ञान के साथ एक शानदार व्यक्ति थे. कर्म योग, भक्ति योग, राज योग और ज्ञान योग उनके कुछ महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध कार्य हैं.

Essay On Swami Vivekananda In Hindi 200 Word – स्वामी विवेकानंद पर हिंदी में 200 शब्दों का निबंध

स्वामी विवेकानंद का जन्म 18 जनवरी 1863 को कलकत्ता में नरेंद्र नाथ दत्त के रूप में हुआ था.उनके माता-पिता विश्वनाथ दत्ता (कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील) और भुवनेश्वरी देवी (एक धार्मिक गृहिणी) थे.वह सबसे लोकप्रिय हिंदू भिक्षुओं में से एक थे, जो भारत के एक देशभक्त संत और रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे.

स्वामी विवेकानंद का कार्य:-

उनकी शिक्षाएं और मूल्यवान विचार भारत की सबसे बड़ी दार्शनिक संपत्ति हैं, आधुनिक वेदांत और राज योग के उनके दर्शन युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं.उन्होंने बेलूर मठ, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो विवेकानंद की धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षाओं का प्रसार करता है और शैक्षिक और सामाजिक कार्यों में भी संलग्न है.

स्वामी विवेकानंद की जयंती 1985 के बाद से हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है.यह त्यौहार युवा पीढ़ियों को प्रेरित करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों में विवेकानंद के धार्मिक आदर्शों को सिखाने में मदद करता है.

Conclusion (निर्ष्कर्ष) :-

स्वामी विवेकानंद एक महान नेता और दार्शनिक थे जिन्होंने एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और वैश्विक दर्शकों का दिल जीताउनकी शिक्षाएं और दर्शन भारत के युवाओं के लिए मार्गदर्शक प्रकाश हैं, और उनके विचारों ने हमेशा लोगों को प्रेरित किया है और अभी भी भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम करेंगे.

स्वामी विवेकानंद पर निबंध हिंदी में (300 शब्द) – Essay On Swami Vivekananda In Hindi (300 Word)

Essay on Swami Vivekananda In Hindi का यह निबंध खास तोर पर छात्र के लिए लिखा गया है जो पांचवी कक्षा से लेकर बाहरवीं कक्षा तक के छात्र लिख सकते है. स्वामी विवेकानंद की गिनती भारत के महापुरुषों में होती है. इस महापुरुष पर पुरे भारत को गर्व है.

इस महापुरुष का जन्म 12 जनवरी, 1863 ई में कोलकाता में एक छत्रिय परिवार में विश्वनाथ दत्त के यहाँ हुआ था. विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाई कोर्ट के नमी बकील थे. माता पिता ने बालक का नाम नरेन्द्र रखा नरेन्द्र बचपन से ही मेधावी थे. उन्होंने 1889 में मैट्रिक की परीक्षा उत्त्रीद्र्ण कर कोलकाता के जनरल अस्सेम्बली नामंक कॉलेज में प्रवेश लिया.

उन्होंने इस्तिहस दर्शन साहित्य आदि विषयों का अध्ययन किया. नरेन्द्र ने B.A की परीक्षा प्रथम शीर्ण में उत्तीर्ण की. नरेन्द्र इश्रिय सत्ता और धर्म को शंका की द्रष्टि से देखते थे. लेकिन वे जिज्ञासु प्रवृति के थे. वे अपनी जियासा शान्त करने के लिएब्रह्मसमाज में गए.

यहाँ उनके मन को शंतुष्टि नही मिली फिर नरेन्द्र सत्रह वर्ष की आयु में दक्षिणश्वर के संत रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में अये परमहंस ही का नरेन्द्र पर गहरा प्रभाव पड़ा नरेद्र ने उन्हें अपना गुरु बना लिया. इन्ही दिनों नरेद्र के पिता का देहांत हो गया. नरेन्द्र पर परिवार की जिम्मेदारी अ गयी. परन्तु अच्छी नौकरी ने मिलने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनायियो का सामना करना पड़ा.

नरेन्द्र गुरु रामकृष्ण की शरण में गए. गुरु ने उन्हें माँ काली से आर्थिक संकट दूर करने का वरदान मांगने को कहा नरेन्द्र माँ काली के पास गए परन्तु धन की बात भूलकर वुधि और भक्ति का याचना की एक दिन गुरु ने उन्हें अपनी साधना का तेज देखकर नरेन्द्र से विवेकानंद बना दिया.

रामकृष्ण परमहंस की म्रत्यु के बाद विवेकानंद कोलकाता छोड़ कर वरादनगर के आश्रम में रहेने लगे. यहाँ उन्होंने शास्त्रों और धर्मग्रथो का अध्ययन किया. इसके बाद वे भारत की यात्रा पर निकल पड़े वे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जुनागड़, सोमनाथ, पोरबंदर, बड़ोदा, पूना, मौसुर होते हुए दक्षिण भारत पहुचे. वहाँ से वे पांडिचेरी और मद्रास पहुचे.

Essay On Swami Vivekananda In Hindi 400 Word – स्वामी विवेकानंद पर हिंदी में 400 शब्दों का निबंध

स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता में 12 जनवरी को 1863 में मकर संक्रांति पर्व के दौरान एक पारंपरिक बंगाली कायस्थ परिवार में हुआ था. स्वामी विवेकानंद का जन्म नाम नरेंद्रनाथ दत्ता (जिन्हें नरेंद्र या नरेन भी कहा जाता था) था। वह अपने माता-पिता (पिता विश्वनाथ दत्ता, कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील और माँ भुवनेश्वरी देवी) के नौ भाई-बहनों में से एक थे.

उन्हें अपने पिता के तर्कसंगत रवैये और अपनी माँ के धार्मिक स्वभाव के माहौल के तहत सबसे प्रभावी व्यक्तित्व के रूप में विकसित किया गया था. वह कम उम्र से ही आध्यात्मिक व्यक्ति थे और हिंदू भगवान (भगवान शिव, हनुमान, आदि) की प्रतिमाओं के समक्ष ध्यान लगाते थे. वह अपने समय के भटकते तपस्वियों और भिक्षुओं से प्रेरित था. वह बचपन से ही बहुत शरारती था और अपने माता-पिता के नियंत्रण से बाहर था.

उन्होंने अपनी मां के बयान के अनुसार, “मैंने शिव से एक पुत्र के लिए प्रार्थना की और उन्होंने मुझे अपना एक भूत भेजा है” उन्होंने 1879 में 1879 में प्रेसीडेंसी कॉलेज में अध्ययन के लिए चंद्र विद्यासागर मेट्रोपॉलिटन इंस्टीट्यूशन में दाखिला लिया. वह सामाजिक विज्ञान, दर्शन, इतिहास, धर्म, कला और साहित्य जैसे विषयों में बहुत उज्ज्वल छात्र थे. उन्होंने पश्चिमी तर्क, यूरोपीय इतिहास, पश्चिमी दर्शन, संस्कृत शास्त्र और बंगाली साहित्य का अध्ययन किया.

वह हिंदू धर्मग्रंथों (वेद, रामायण, भगवद गीता, महाभारत, उपनिषद, पुराण, आदि) में रुचि रखने वाले बहुत धार्मिक व्यक्ति थे. वह भारतीय शास्त्रीय संगीत, खेल, शारीरिक व्यायाम और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय थे. विलियम हस्ती (जनरल असेंबलीज़ इंस्टीट्यूशन के प्रमुख) द्वारा उन्हें “नरेंद्र वास्तव में एक प्रतिभाशाली व्यक्ति” कहा गया था.

वह हिंदू धर्म के प्रति बहुत उत्साही थे और देश के भीतर और बाहर हिंदू धर्म के बारे में लोगों के बीच नई समझ बनाने में बहुत सफल रहे वे पश्चिम में ध्यान, योग और आत्म सुधार के अन्य भारतीय आध्यात्मिक तरीके को बढ़ावा देने में सफल हुए वह भारत के लोगों के लिए राष्ट्रवादी आदर्श थे.

उन्होंने अपने राष्ट्रवादी विचारों के माध्यम से कई भारतीय नेताओं का ध्यान आकर्षित किया भारत को आध्यात्मिक रूप से जगाने के लिए उन्हें श्री अरबिंदो द्वारा प्रशंसा मिली उन्हें महात्मा गांधी द्वारा हिंदू धर्म को बढ़ावा देने वाले महान हिंदू सुधारकों में से एक के रूप में भी प्रशंसा मिली
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल) ने कहा कि स्वामी विवेकानंद वह व्यक्ति थे जिन्होंने हिंदू और भारत को बचाया था.

उन्हें सुभाष चंद्र बोस ने “आधुनिक भारत का निर्माता” कहा था. उनके प्रभावी लेखन ने कई भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ताओं जैसे कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, अरबिंदो घोष, बाघा जतिन आदिको प्रेरित किया था. 1902 में 4 जुलाई को मृत्यु से पहले, उन्होंने बेलूर मठ में तीन घंटे ध्यान किया.

Conclusion (निर्ष्कर्ष):-

स्वामी विवेकानंद भारत के एक महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने हमारे राष्ट्र को दुनिया को दिखाया और वैश्विक दर्शकों का ध्यान आकर्षित कियाउनका शिक्षण और दर्शन आज भी प्रासंगिक है और आधुनिक युग के युवाओं का मार्गदर्शन करता हैउन्होंने रामकृष्ण मिशन, रामकृष्ण मठ की स्थापना की, और विभिन्न प्रेरणादायक पुस्तकें लिखीं और एक महान संत, दार्शनिक और भारत के अग्रणी नेता थे.

स्वामी विवेकानंद पर 500 शब्दों का निबंध हिंदी में – Essay On Swami Vivekananda In Hindi

Essay on Swami Vivekananda In Hindi मैं उनका यह निबंध 500 शब्दों में लिखा गया है जिसे आप अपने परीक्षा और प्रतियोगिता में भी सम्लित कर सकते है. स्वामी विवेकानंद भारत के एक महापुरुष व्यक्ति थे.

उनका जन्म 1863 में 12 जनवरी को कोलकाता में हुआ था. वह एक महान भारतीय संत पवित्र लीला, अदितीय दाशर्निक और एक महान व्यक्ति थे जो महान सिदंतो पर विश्वास करते थे. वह उच्च विचार और सरल जीवन जीने का एक आदर्श उदहारण था.

स्वामी विवेकानंद के बचपन के दिन

विवेकानंद जी के पिता श्री विश्वनाथ थे. और भुवनेश्वरी देवी, स्वामी विवेकानंद की माँ थी. नरेद्रनाथ दत्त बचपन के शुरूआती दिनों में उनका नाम था. वह बोधिक कोसल का एक बच्चा था.क्योकि वह अपने स्कूल की सभी सिक्षाओ को बहुत जल्द समझ लेता था.

अपने उच्च बोधिक कोसल के कारण उन्होंने गुरु का नाम श्रुतिधर रखा. इसके अलावा उनके पास कुस्ती और तैराकी सहित कई प्रतिभाय और क्षमताएँ थी महाभारत और रामायण के शिक्षण ने उन्हें गहरा प्रभावित किया इसके अलावा उनके जीवन के एक आदर्श के रूप में पयान पुत्रा हनुमान को माना जाता है.

एक आध्यात्मिक परिवार में परवरिश के बावजूद उनके पास एक तर्कशील व्यक्तित्व था. उनके सभी विश्वसो को त्वरित निर्णय और उनके पीछे की सोच से सुविधा मिली इस प्रकृति के अनुसार उन्होंने इश्वर के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा कर दिया था अपने संदेह को दूर करने के लिए उन्होंने विभ्भिन संतो से भी मुलाकात की और एक ही सवाल पूछा क्या आप भगवान को देखते है. रामकृष्ण परमहंस से मिलने तक उन्होंने सवाल को अनुतरित रखा गया था.

विवेकानंद जी की आलोकित शक्ति के प्रति सचेत होने के कारण वे दक्षिणेश्वर के लिए जाने जाते थे. गुरु जी की गहरी भावना थी की स्वामी जी का जन्म ब्राह्मण के उर्थान के लिए मानवता के लिए एक वरदान था.

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा

स्वामी विवेकानंद एक शिक्षित व्यक्ति थे. जो फारसी और अंग्रेजी भाषा के बारे में अच्छी तरह से जानते थे. उन्होंने कोलकाता के उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में काम किया करते थे उनकी माँ एक धर्मपरायण महिला थी वह बचपन से ही नरेन से बहुत प्रभावित थी उसने पहली बार स्वामी जी को अंग्रेजी पाठ पढ़ाया उसके बाद उन्हें बंगाली बर्णमाला के बारे में शिखा.

विवेकानंद ने कोलकाता भारत में महानगरीय संसथान में अध्ययन किया जब उन्होंने एक प्रवेश परीक्षा पास की तक वे कोलकाता में सामान्य विधानसभा संस्थान (स्काटिश जरनल मिशनरी बोर्ड की स्थापना की) में शामिल हो गए उन्होंने B.A उस संस्था में फिर कानून की डीग्री हासिल करने के लिए चले गए. तथ्य यह है की जब उनके पिता की म्रत्यु हुई तो उनके परिवार की विर्तीय परिस्थितियों ने उन्हें अपना अध्ययन पूरा करने में असमर्थ बना दिया.

स्वामी जी एक अच्छे गायक भी थे. जब रामकृष्ण परमहंस ने उन्होंने एक भक्ति गीत गेट हुए सुना तो वे बहुत प्रभावित हुए तब उन्होंने उनसे द्क्षिनेश्वर (जहाँ रामकृष्ण काली मंदिर में पुजारी) से मिलने के लिए कहा. उनकी बाते सुनने के बाद स्वामी जी भगवान् को देखने के लिए बहुत उत्सुक हो गए.

स्वामी विवेकानंद जी की अमेरिका की यात्रा

विवेकानंद जी 1863 में विश्व धर्म में भाग लेने  के लिए अमेरिका (शिकागो) गए थे. शिकागो में उन्होंने एक लम्बा व्याख्यान दिया, जहाँ उन्होंने दुनिया को समझाया की इश्वर एक है. उन्होंने यह भी कहा की धार्मिक विभिन्न नदियों की तरह है जो समुद्र में समाप्त हो जाती है.

इस प्रकार, उन्होंने हमेशा एक स्वार्थी चुनने के वजाय, दुनिया को सही रस्ते पर चलने के बोर में सिखाया इसके अलावा अमेरिका के लोगो की एक बड़ी संख्या को उनकी सिक्षाओ द्वारा सराहा गया, और वे उनके रामकृष्ण मिशन में भी शामिल हुए.

उन्होंने यह भी लिखा की हमारी पवित्र मात्रभूमि दर्शन और धर्म की भूमि है. यह आध्यात्मिक दिग्गजों का त्याग की भूमि है जहाँ प्राचीन से आधुनिक लोग पे जाते है.

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन

  • “एक शब्द में यह आदर्श है की आप दिव्य है”
  • “सबसे महत्वपूर्ण धर्म अपने स्वभाव के प्रति सच्चा होना है ”
  • “अपने आप पर विश्वास करो और दुनिया आपके चरणों में होगी”
  • “वह आदमी अमरता तक पहुँच गया है जो बिना किसी सामग्री के परेसान है”

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानंद भारत के एक महान व्यक्तित्व और हिन्दू भिक्षु थे. उन्होंने 19 वीं और 20वीं सदी के भारतीय राष्ट्रवाद को बढाने के लिए एक उल्लेखनीय और प्रभावशाली भूमिका निभाई. उन्होंने हिन्दू धर्म के कई पहलुओ का सामजस्य और पुनर्व्याख्या भी की उनका मानना था की किसी भी देश का भविष्य सीधे उसके लोगो पर होता है जहाँ उसने यह भी कहा की मानव निर्माण मेरा सबसे बड़ा मिशन है.

सम्बंधित अन्य निबंध

प्रिय छात्रों, मैं आशा करती हूँ की आपको Essay On Swami Vivekananda In Hindi – स्वामी विवेकानंद पर निबंध को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Essay On Swami Vivekananda In Hindi के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस निबंध से सम्बंधित कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

Share This Post On

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *