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Essay On Ravindranath Tagore In Hindi – रवींद्रनाथ टैगोर पर निबंध

Essay On Ravindranath Tagore In Hindi - रवींद्रनाथ टैगोर पर निबंध

Essay On Ravindranath Tagore In Hindi. प्रिय छात्रों, आज के इस निबंध में हम पड़ेगे Essay On Ravindranath Tagore In Hindi के बारे में. यानि की रवींद्रनाथ टैगोर पर निबंध और साथ मैं हम पड़ेगे रविन्द्रनाथ टैगोर कोन थे उन्होंने हमारे देश को आजाद करने के लिए कोन कोन से योगदान दिए है. अपना सारा जीवन देश को समर्पित कर दिया व संघर्ष में बिताया था.

Covering Topics – Essay On Ravindranath Tagore In Hindi – रविन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध.

  • रविन्द्रनाथ टैगोर कोन थे.
  • रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्म.
  • रविन्द्रनाथ टैगोर का बचपन और शिक्षा.
  • रविन्द्रनाथ टैगोर की म्रत्यु कब हुई.
  • Essay On Ravindranath Tagore For the Competition – प्रतियोगिता के लिए रविन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध हिंदी में.
  • Introduction Essay On Ravindranath Tagore – रविन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध पर परिचय.
  • Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 100 Word –रविन्द्रनाथ टैगोर पर 100 शब्दों का निबंध हिंदी में.
  • Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 200 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 200 शब्दों का निबंध हिंदी में.
  • रविन्द्रनाथ टैगोर पर 300 शब्दों का निबंध हिंदी में – Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 300 Word
  • Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 400 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 400 शब्दों का निबंध हिंदी में
  • Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 500 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 500 शब्दों का निबंध हिंदी में

Essay On RavindraNath Tagore In Hindi 100 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 100 शब्दों का निबंध हिंदी में.

मेरे प्रिय दोस्तों, आज हम पड़ेगे देश के सबसे प्रसिद्ध रविद्र नाथ टगोर पर निबंध रविन्द्रनाथ टैगोर एक प्रसिद्ध भारतीय कवि थे. इसके अलावा वह एक महान दार्शनिक देशभक्त चित्रकार और मानवतावादी भी थे. लोग अक्सर उनके सबंध में गुरुदेव शब्द का उपयोग करते थे. इस असाधारण व्यक्तित्व का जन्म 7 मई को 1861 में कलकत्ता में हुआ था.

रवींद्रनाथ टैगोर की कृतियां

रविन्द्रनाथ टैगोर ने सोलह साल की उम्र से नाटक लिखना शुरू कर दिया था. बीस साल की उम्र में रविन्द्रनाथ टैगोर ने भूल नाट्य कृति वाल्मीकि प्रतिभा लिखी अधिकांश उल्लेखनीय रविन्द्रनाथ टैगोर भावनाओ पर क्रेद्रित है. न की कारईवाई पर 1890 में उन्होंने एक और नाटक काम विसर्जन लिखा विसर्जन संभवत रविन्द्रनाथ टैगोर का सर्वश्रेस्ट.

इस तरह सोलह साल की उम्र से रविन्द्रनाथ टैगोर ने छोटी कहानियाँ लिखना शुरू किया उनकी पहली लघु कहानी भी कारिणी थी. सबसे उल्लेखनीय व वंगाली भाषा की लघु कथा शेली के सस्थापक है. टैगोर ने निश्रित रूप से 1891 से 1895 तक कई कहानियाँ गल्प्गाछ का संग्रह है. यह 84 कहानियो का एक बड़ा संग्रह है.

Conclusion (निर्ष्कर्ष) :-

आज जब भी राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन अधिनायक जय हे’ का मधुर स्वर कानों में पड़ता है, तो कविगुरु की याद ताजा हो उठती है. भारत काइतिहास आपको युगों तक याद कराता रहेगा।

Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 200 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 200 शब्दों का निबंध हिंदी में.

रविन्द्रनाथ टैगोर भारत के महान व्यक्तियों में से एक थे और वे आसानी से दुनिया के महान साहित्यिक व्यक्तियों में से एक थे. वे एक महुमुखी प्रतिभा के धनी कवि उपन्यासकार नाटककार निबंधकार, लघुकथाकार राजनेता, संगीतकार, चित्रकार, दाशर्निक, अभिनेता, शिक्षाविदा और स्वतंत्रता सेनानी थे. वह एक महान रस्त्रावादी और एक अंतर्राश्त्रीयावादी और सार्वभौमिकवादी और मानवतावादी दोनों समान थे.

उन्होंने मूल रूप से बंगाली में लिखा था, लेकिन बाद में अपनी खिद की रचनाओ का अंग्रेजी में अनुवाद किया उनके गीतों की विश्व प्रसिद्ध कृति गीतांजलि, जिसके लिए उन्होंने 1913 में नोबेल पुरस्कार जीता मूल रूप से बंगाली में भी लिखा गया था. लेकिन बाद में कवि ने खुद इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया.

वह अपने देश का एक बड़ा प्रमी था. विशेष रूप से मानवता और बच्चो का वह अहिंसा में विश्वास करते थे. पाम्परिक रुप से उतने ही पश्चिमी यहूदीवाद को ख़ारिज करते थे. भारतीय राष्ट्रीय गान जन गण मन उनके द्वारा लिखा गया था.

उन्होंने संतिनिकेतन की स्थापना भी नोबेल पुरस्कार से प्राप्त धन से की थी. उन्होंने 1919 में जलियांवाला बाग त्रासदी के विरोध में सर की उपाधि दी 8 अगस्त 1941 को उनका निधन हो गया था.

निर्ष्कर्ष

महान व्यक्तित्व केवल अपनी प्रगति तक सीमित और संतुष्ट नहीं रहते हैं. उनका ध्येय पूरी मानव जाति के कल्याण से होता है. आज के समय में जब भी राष्ट्रगान के मधुर स्वर कानों में पड़ते हैं तो सभी को कविगुरु रविन्द्रनाथ जी की याद आ जाती है। भारत के इतिहास में रविन्द्रनाथ जी को युगों तक याद किया जायेगा.

Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 300 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 300 शब्दों का निबंध हिंदी में.

रविन्द्रनाथ टैगोर को रविन्द्रनाथ ठाकुर के नाम से भी जाना जाता है और वे गुरु देव के रूप में अधिक प्रसिद्ध हो गए वह एक उच्च कोटि के भारतीय कवि के रूप में परिवर्तित हो गए जिन्होंने (U.S) को कई प्रसिद्ध लेखन दिए A बेशक वह कालिदास इ बाद सबसे बड़े कवि बन गए.

आज वह दुनिया भर में सभी कवियों और सभी जीवन काल के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक के रूप में प्रसिद्ध है. वह 7 मई 1861 को महर्षि देवेन्द्रनाथ टैगोर (पिता) और शारदा देवी (माता) के घर जोर संको कलकत्ता में एक धनी और संस्कृतक परिवार में पैदा हुए.

1875 में जब टैगोर 14 साल के हों गए तो उनकी माँ की म्रत्यु हो गई अपनी कम उम्र में उन्होंने कविता लिखने का शोक बढाया वह एक चित्रकार दाशर्निक देशभक्त शिक्षाविद उपन्यासकार गायक निबंध लेखन कहानीकार और नवोदित पत्रकार भी बन जाता है.

उपन्यासों और लघु कथाओ के रूप में उनकी बुद्धिमत्ता, उनकी बुद्धिमत्ता एक मानवीय चरित्र का गहन आनंद और समझ के रूप में उनका संधर लेखन वह एक ऐसे कवि के रूप में वदल गए जिसने अमेरिका के एकजुट राज्यों को पूरी तरह से मीठा राष्ट्रगान “जन गण मन” दिया है.

उनकी कुछ आवश्यक कृतियाँ है. “गीतांजलि” अमर सोनार वंगला घेर बेर रविन्द्र संगीत आदि उन्होंने 1913 में “गीतांजलि” के अपने उतर्क्रष्ट अंग्रेजी संस्करण को लिखने के लिए नोवल पुरुस्कार से सम्मानिक किया.

निर्ष्कर्ष

विश्वमानवता के पर्याय रवीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन साहित्यकार, शिक्षाशास्त्री, अध्यापक एवं दार्शनिक के रूप में देश के नागरिकों को प्रेरणा देता रहेगा गांधीजी को राष्ट्रपिता की उपाधि देने वाले रवीन्द्रनाथ की मृत्यु पर गांधीजी ने कहा था- हमने विश्वकवि को ही नहीं, एक राष्ट्रवादी मानवता के पुजारी को खो दिया शान्तिनिकेतन के रूप में उन्होंने राष्ट्र के लिए ही नहीं, समस्त संसार के लिए अपनी विरासत छोड़ी है.

Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 400 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 400 शब्दों का निबंध हिंदी में.

रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 में कलकत्ता के जोरासासो में एक अमीर और सुसंस्कृत परिवार में हुआ था. देवेन्द्र नाथ टैगोर उनके पिता थे. और शारदा देवी उनकी माँ थी वह अपने माता पिता की 14 वी संतान थे. 11 वर्ष की आयु में उन्होंने छड लिखना शुरू कर दिया स्पष्टता के साथ किसी भी घटना का वर्णन करने के लिए उनके पास एक अछि गुणवक्ता थी.

यह उनके स्कूल के हेडमास्टर को पता था वह पढाई करने के लिए इंग्लैंड गए थे लेकिन पढाई पूरी किये बिना ही वहाँ से लौट आय वह मुख्य रूप से दो चीजों में दिलचस्पी रखते थे. मानवीय सम्बन्ध और मात्रभूमि.

रविन्द्रनाथ टैगोर एक चित्रकार देशभक्त कवि, नाटककार उपन्यासकार, कहानीकार, दाशर्निक और शिक्षवादी के साथ साथ एक महान मानव भी थे. वह छेत्र भूगोल नस्ल आदि के आधार पर बिभाजन सीमाओ और देवभाव के खिलाफ था. वह जीवन की एकता और उसकी अभियक्ति में विश्वास करता था.

रविन्द्रनाथ टैगोर ने अपने कार्यो और जीवन के माध्यम से सवार्भोमिक प्रेम और सद्राव का प्रसार किया. वह अपने देश के लिए महान थे. उन्होंने कहा था. “मेरा देश जो हमेशा के लिए भारत है, मेरे पुरखो का देश मेरे बच्चो का देश मेरे देश ने मुझे जीवन और शक्ति दी है” और फिर “में भारत में फिर से जन्म लूँगा”

रवींद्रनाथ टैगोर नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले भारत थे. उन्हें 13 नवंबर 1913 को साहित्य में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्हें “उनके प्रति संवेदनशील, ताजा और सुंदर कविता” के लिए साहित्य में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

यह सभी भारतीयों के लिए बहुत गर्व और सम्मान का क्षण था. गीतांजलि 1910 में प्रकाशित हुई थी. उन्होंने पूरवी, शाम के गीत और सुबह के गीत भी तैयार किए उन्होंने कई विषयों पर लिखा-सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, नैतिक आदि.

रवींद्रनाथ टैगोर को बंगाल और गुरुदेव के बार्ड के रूप में भी जाना जाता था. वह भारत के महानतम साहित्यकारों में से एक थे. उन्होंने भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान और श्रीलंका के राष्ट्रगान की रचना की उनके गीत, कविता, उपन्यास और निबंध अब सांस्कृतिक कालजयी हैं. उन्होंने 1890 में मानसी को लिखा था.

मानसी उनकी प्रारंभिक प्रतिभा और कला की छाप के साथ सामाजिक और काव्य कविताओं का एक संग्रह था. उनका अधिकांश कार्य जीवन, भूमि और बंगाल के लोगों का है. गैलापागुक्का के हकदार टैगोर की कहानियों का संग्रह लोगों की गरीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन को इतनी अच्छी तरह और प्रभावी रूप से चित्रित करता है.

निर्ष्कर्ष

आज जब भी राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन अधिनायक जय हे’ का मधुर स्वर कानों में पड़ता है, तो कविगुरु की याद ताजा हो उठती है भारत काइतिहास आपको युगों तक याद कराता रहेगा.

Essay On Ravindranath Tagore In Hindi 500 Word – रविन्द्रनाथ टैगोर पर 500 शब्दों का निबंध हिंदी में.

रवींद्रनाथ टैगोर, एक महान भारतीय कवि, उपन्यासकार, गीत संगीतकार, नाटककार, और एक महान विद्वान का जन्म कलकत्ता में 1861 में 7 मई को हुआ था. उनके जन्मदिन को रवींद्रनाथ टैगोर जयंती के रूप में चिह्नित किया गया है.

उनका जन्म एक अमीर और रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता महर्षि देबेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी थे. उनकी माता की मृत्यु तब हुई जब वे सिर्फ चौदह वर्ष के थे. कृष्ण को गुरुदेव के नाम से जाना जाता था, उन्हें रवींद्रनाथ ठाकुर के नाम से भी जाना जाता था.

प्रारंभिक जीवन और बचपन के दिन.

टैगोर के भाई-बहनों में वह सबसे छोटे थे. छोटी उम्र से, उन्होंने अपनी माँ को खो दिया. उनके पिता एक यात्री थे, इसलिए उन्हें उनके नौकरानियों और नौकरों ने घर पर पाला था. बचपन से ही, उन्होंने कवितालिखने में अपनी रुचि विकसित की और भविष्य में अपनी उत्कृष्टता साबित की.

वह हर दृष्टि से एक बहु-प्रतिभाशाली व्यक्ति थे. वह एक चित्रकार, कहानीकार, लेखक, मानवतावादी, देशभक्त, उपन्यासकार, दार्शनिक और शिक्षाविद थे. अपने शुरुआती दिनों में, उन्होंने कभी स्कूलों में भाग नहीं लिया और घर पर निजी शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपनी पढ़ाई की हालाँकि, वे अपनी उच्च पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए.

टैगोर और उनके परिवार की बंगाल पुनर्जागरण में रुचि थी और उन्होंने इसमें सक्रिय भागीदारी की सोलह वर्ष की आयु में, उन्होंने अपने काव्य कृति का प्रकाशन शुरू किया. दिलचस्प रूप से यह छद्म नाम भानुशिंगो (सूर्य सिंह) के तहत प्रकाशित हुआ था.

महान शास्त्रीय कवि, कालिदास ने टैगोर को प्रभावित किया है और उन्होंने शास्त्रीय कविताएं लिखना शुरू कर दिया है उनकी बहन स्वर्णकुमारी भी एक प्रसिद्ध उपन्यासकार थीं.1873 में, वह अपने पिता के साथ कई महीनों के लिए दौरे पर गए और उन्होंने विभिन्न विषयों के बारे में ज्ञान प्राप्त किया अमृतर में रहते हुए उन्होंने सिख धर्म के बारे में जाना और उन्होंने लगभग छह कविताएँ और कुछ लेख धर्म पर लिखे

रविन्द्रनाथ की शिक्षा.

टैगोर की औपचारिक शिक्षा ब्राइटन, ईस्ट ससेक्स, इंग्लैंड में हुई थी.1878 में, वे कानून का अध्ययन करने के लिए इंग्लैंड गए, लेकिन उन्होंने पढ़ाई पूरी करने से पहले भारत लौट आए क्योंकि वह एक कवि और लेखक बनने के अपने जुनून को पूरा करना चाहते थे.

उन्होंने अपने दम पर शेक्सपियर के कार्यों को सीखना शुरू किया उन्हें अंग्रेजी, स्कॉटिश और आयरिश साहित्य और संगीत सीखने में दिलचस्पी थी.बाद में, वह भारत लौट आए और अपनी आत्मा की पत्नी मृणालिनी देवी से शादी कर ली.

शान्तिनिकेतन की स्थापना की.

यह टैगोर के पिता थे जिन्होंने शांतिनिकेतन के विचार को आगे रखा”आश्रम” की अवधारणा 1863 में देवेंद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित की गई थी. टैगोर ने एक ओपन-एयर स्कूल की स्थापना की

यह एक प्रार्थना कक्ष था, जिसे “मंदिर” नाम दिया गया था। इसे “पाठ भवन ‘भी कहा जाता था जिसमें शुरुआत में केवल पाँच छात्र शामिल थे.गुरु-शिष्य की शिक्षा पद्धति का उपयोग किया गया था. शिक्षण की इस प्रवृत्ति को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद माना गया.

इस बीच वह बहुत प्रसिद्ध हो जाता है और नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाला वह पहला एशियाई भी था. आज, शान्तिनिकेतन पश्चिम बंगाल में एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय शहर है.

Conclusion (निर्ष्कर्ष) :-

रवीन्द्रनाथ टैगोर बड़े प्रतिभावान थे. वे एक सच्चे महात्मा थे और वैसे ही वे दिखाई भी देते थे. वे लम्बे-लम्बे बाल रखते थे और उनकी लम्बी दाढी थी. उनके बहुत-से शिष्य थे, जो उन्हें बडी श्रद्धा से गुरुदेव कहते थे. वे महान् कवि और समाज-सुधारक थे. उन्होंने भारत का गौरव बढाया. भारत को ऐसे विद्वान् पर सदा गर्व रहेगा । हम इतने महान् विद्वान्, कवि, लेखक और दार्शनिक को कभी न भुला पायेंगे.

Essay on RavindraNath Tagore for the competition – प्रतियोगिता के लिए रविन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध.

इस निबंध को आप किसी भी सरकारी नौकरी या फिर किसी भी तरह की प्रतियोगिता में लिख सकते हो.

Introduction Essay On Ravindranath Tagore –रविन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध पर परिचय.

रविन्द्रनाथ टैगोर एक महान विद्रान गुरुदेव के नाम से प्रसिद्ध रविन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, विद्रान नाटककार उपन्यासकार, संगीतकार और चित्रकार थे. उन्होंने बंगाली साहित्य और संगीत को समर्द्ध किया.

रविन्द्रनाथ टैगोर गुरुदेव के नाम से प्रसिद्ध रविद्र नाथ टैगोर एक महान कवि विद्रान नाटककार उपन्यासकार संगीतकार और चित्रकार थे. जिन्होंने बंगाली साहित्य और संगीत को समर्द्ध किया. उन्हें 1913 में साहित्य के लिए पुरुस्कार दिया गया था. वह इस प्रतिष्ठित पुरुस्कार को जीतने वाले पहले भारतीय और एशियाई बने. उन्हें उनके एतिहासिक कार्य गीतांजलि के लिए नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था.

रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकत्ता में के ब्राह्मण परिवार में हुआ था. रविन्द्रनाथ टैगोर बचपन से ही बहुत प्रतिभाशाली थे. उनके पिता का नाम देवेन्द्र नाथ टैगोर था और उनकी माता का नाम शारदा देवी था.

रविन्द्रनाथ टैगोर बचपन से ही वाचाल थे. टैगोर ने जीवनी इतिहास, खगोल, विज्ञानं, आधुनिक विज्ञानं और संस्कृत को पढ़ा.उन्होंने अपनी पहली कविता आठ साल की उम्र में लिखी थी सोलह वर्ष की आयु में उन्होंने छम नाम भानुशिगो के तहत अपनी पहली पर्याप्त कविता प्रकाशित की.

रविन्द्रनाथ टैगोर कोन थे – Who Was Ravindranath Tagore

1883 में, टैगोर ने मृणालिनी देवी (जो उस समय 10 साल की थी) से शादी की और दंपति के 5 बच्चे थे (2 बचपन में ही मर गए थे) 1890 में, टैगोर ने शालिदा (बांग्लादेश में वर्तमान दिन) में अपने पैतृक सम्पदा का प्रबंधन करना शुरू कर दिया.

उनकी पत्नी 1898 में अपने बच्चों के साथ उनके साथ जुड़ गई 1890 में, टैगोर ने अपनी सर्वश्रेष्ठ कविताओं में से एक ‘मानसी’ का विमोचन किया। 1891-1895 के दौरान, टैगोर ने ‘गल्पगच्छ’ की आधी से अधिक कहानियाँ लिखीं.

1901 में, रवींद्रनाथ टैगोर शांतिनिकेतन चले गए, जहाँ उन्होंने ‘द मंदिर’ पाया, जो एक प्रायोगिक विद्यालय था जिसमें पेड़, बगीचे और पुस्तकालय थे. टैगोर की पत्नी और 2 बच्चों की मृत्यु शांतिनिकेतन में हुई और टैगोर ने 1905 में अपने पिता को खो दिया.

टैगोर को त्रिपुरा के महाराजा (उनकी विरासत के हिस्से के रूप में) से मासिक भुगतान मिला, उनके परिवार के आभूषणों की बिक्री, पुरी में उनके समुद्र तटीय बंगले, और एक व्युत्पन्न 2,000 रुपये में पुस्तक रॉयल्टी 1901 में, टैगोर ने ‘नैवेद्य’ प्रकाशित किया और 1906 में उन्होंने ‘खेय’ प्रकाशित किया.

1913 में, टैगोर ने साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीता किंग जॉर्ज V ने टैगोर को 1915 बर्थडे ऑनर्स से सम्मानित किया जिसे बाद में 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद छोड़ दिया गया और भारत के तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को भी इसके लिए पत्र लिखा.

Ravindranath Tagore Childhood –   रविन्द्रनाथ टैगोर का बचपन.

रवींद्रनाथ टैगोर हमेशा दूर के स्थानों के बारे में सोचते थे. वह प्रकृति से प्यार करता था जब अन्य कहीं व्यस्त होते, तो वह प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेते वह तालाब, बरगद, नारियल के पेड़ को देखना पसंद करता था उनके लिए आनंद का एक और स्रोत था कथाओं की दुनिया के बीच फैले हुए, तुकबंदी और गानों के लिए जिनमें कुछ नौकरानियों और नौकरों ने उनकी पहल की अक्षर सीखने के बाद, उन्होंने स्क्रूटनी शुरू कर दी घर का माहौल उसे संगीत की दुनिया में ले गया.

पहली नर्सरी कविता जो उन्होंने सीखी, ने कविता के जादू के द्वार को खोल दिया कविता उनके लिए आंखें खोलने वाली थी. उनके मन में कविता बहुत, बहुत गहरी छाप छोड़ गई उन्होंने तब महसूस किया कि कविता लिखने में कविता बहुत महत्वपूर्ण है. वे कम उम्र में ही बंगाल के कवियों की शायरी पढ़ लेते थे. उन्होंने 8 साल की उम्र में लिखना शुरू किया था.

Ravindranath Tagore Education-  रविन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा.

टैगोर ने अपनी शिक्षा घर पर ही प्राप्त की एक दिन, रवींद्रनाथ टैगोर ने महसूस किया कि उनके बड़े भाई और उनके भतीजे गाड़ी में स्कूल जा रहे थे. वही विशेषाधिकार पाने के लिए रोने भी लगी उनका ट्यूटर उनसे बहुत नाराज़ हो गया और कहा “आप आज स्कूल जाने के लिए रो रहे हैं.

लेकिन वह दिन दूर नहीं जब आप स्कूल से दूर रहने के लिए बहुत अधिक रोएँगे” ट्यूटर ने कहा कि यह बहुत कठोर है. टैगोर ने अपनी जीवनी में लिखा “मेरे जीवन में कभी मैंने एक गंभीर भविष्यवाणी नहीं सुनी” बाद में उन्होंने कक्षा की शिक्षा से परहेज किया और घर की पढ़ाई को प्राथमिकता दी.

रवींद्रनाथ टैगोर की इच्छा थी कि सभी बच्चे स्कूल जीवन का आनंद लें इसलिए उन्होंने अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए बच्चों के लिए एक स्कूल की स्थापना की उन्होंने स्कूल का नाम “शांति का निवास” रखा बंगाल से “शांतिनिकेतन” शब्द का अर्थ “शांति का निवास” है.

स्कूल में एक बहुत, बहुत अच्छे तत्व थे जो प्रकृति और स्वतंत्रता हैं. वह कहते थे, “मैं पाँचवीं कक्षा के बाद स्कूल से भाग गया,” उन्होंने हँसते हुए कहा, “इसीलिए मैंने शांतिनिकेतन को पेड़ों की छाँव और आकाश की झलकियों के नीचे खोला उन्होंने बच्चों के बारे में कई कहानियाँ लिखीं.

रविन्द्रनाथ टैगोर की म्रत्यु कब हुई – Rabindranath Tagore Death

1937 के अंत में, रवींद्रनाथ टैगोर ने चेतना खोना शुरू कर दिया और लंबे समय तक कोमा में रहे। 1940 में, टैगोर फिर से कोमा में चले गए और फिर कभी नहीं उबर पाए पुराने दर्द और दीर्घकालिक बीमारी के वर्षों के बाद, टैगोर का 7 अगस्त, 1941 को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी हवेली में अपनी अंतिम सांस ली.

निर्ष्कर्ष

रविन्द्रनाथ जी का जीवन साहित्यकार, शिक्षाशास्त्री, अध्यापक और एक दार्शनिक के रूप में देश के लोगों को प्रेरणा देता रहेगा. गाँधी जी को राष्ट्रपति की उपाधि रविन्द्रनाथ टैगोर जी ने दी थी. टैगोर जी की मृत्यु पर गाँधी जी ने कहा था – ‘हमने केवल एक विश्वकवि को नहीं बल्कि एक राष्ट्रवादी मानवता के पुजारी को खो दिया.’

इससे सम्बंधित अन्य निबंध

Dear Students, मैं आशा करती हूँ की आपको Essay on Ravindranath Tagore In Hindi – रवींद्रनाथ टैगोर पर निबंध हिंदी में को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Essay on Ravindranath Tagore In Hindi के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस Essay on Ravindranath Tagore In Hindi से related कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

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