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Chanakya Thoughts In Hindi – चाणक्य के अनमोल विचार

Chanakya Thoughts In Hindi - चाणक्य के अनमोल विचार hindividhya

Chanakya Thoughts In Hindi – चाणक्य के अनमोल विचार.

Chanakya Thoughts In Hindi – चाणक्य के अनमोल विचार। मेरे प्रिय दोस्तों आज की इस अच्छे विचारों वाली पोस्ट में हम पड़ेगे Chanakya Thoughts In Hindi यानि कि चाणक्य के अनमोल विचार के बारे में।

चाणक्य के प्रेरणादायक विचार मनुष्य के जीवन को ख़ुशी और आनंद से भर देते हैं। हम सभी लोगों के चाणक्य के ज्ञानमयी पुस्तकों और उनके विचारों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए।

जैसा की आप लोग जानते हैं कि आचार्य चाणक्य एक महान विद्वान् थे जिन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य को एक दास से राजा बना दिया था। उन्होंने अपनी चाणक्य नीति में ऐसी कई बातें लिखी हैं जिन्हे एक आम आदमी अपने जीवन में अपना ले दो उसका जीवन सफल हो जायेगा।

दोस्तों चाणक्य की नीति और चाणक्य के अनमोल विचार हम सभी लोगों को अपने जीवन में अपनाने चाहिए चाणक्य के अनमोल विचारों को अपने जीवन में अमल करने वाले व्यक्ति कितनी भी कठिन समस्या हो कितना भी बुरा समय हो वह खुद को बड़े ही आसानी से निकल लेगा।

चाणक्य के अनमोल विचार भी एक मात्र ऐसा साधन है जो आज के कलयुग में आपके लिए काफी लाभदायक होगा। hindividhya.com ने आपके लिए Chanakya Thoughts In Hindi – चाणक्य के अनमोल विचारों वाली पोस्ट में चाणक्य से सबसे महत्वपूर्ण और अच्छे विचार लिखे है। बस आप Chanakya Thoughts In Hindi इस पोस्ट को अंत तक पढ़िए और अपने जीवन को सफल बनाइये।

Chanakya Thoughts In Hindi – चाणक्य के अनमोल विचार

विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता। बिद्या का भाई भाई में बंटवारा नहीं कर सकते।

जीवन का सबसे बड़ा गुरु मंत्र की अपने रहस्य कभी भी किसी को मत बताओ इससे आप आपनी कमजोरी दूसरों को बता रहे हैं। यह तुम्हारे जीवन को अंत कर सकता है।

व्यक्ति अपने जन्म, धर्म से नहीं बल्कि अपने कर्म से महान होते हैं।

लोहा लोहे को ही काटता है ठीख उसी प्रकार जहर जहर को मरता है तो इसीलिए हमें लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।

आपके सबसे बड़े संकट में आपकी बुद्धि ही काम आती है। इसलिए बुद्धि को तेज और तलवार की धार की तरह पेनी करें।

निर्धन का सबसे बड़ा धन उसकी विद्या ही होती है।

अच्छे विचार और अच्छे गुण अगर हमारे शत्रु में भी हों तो भी हमें उन्हें ग्रहण करना चाहिए।

भूख से बड़ा कोई शत्रु नहीं होता। भूखे के लिए भोजन के सिवाय कोई दूसरा धन नहीं होता है।

वृद्धजन एवं दीन – दुखियों की सेवा ही विनय का आधार है।

कामी और आलसी पुरुष कभी कोई कार्य नहीं कर सकता।

अपने लोभ से किसी शत्रु को भी भ्रष्ट किया जा सकता है।

किसी गरीब को दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।

हमें कभी भी अपने पुत्र की प्रशंसा नहीं करनी चाहिए। अपनी पुत्री को हर किसी के घर नहीं ले जाना चाइये।

राजा की आज्ञा का कभी उल्लंघन नहीं करना चाहिए Chanakya Thoughts In Hindi

राजा की आज्ञा का कभी उल्लंघन नहीं करना चाहिए जबतक वह अपने धर्म पर कार्य कर रहा है।

अपनी सेवा देकर अपने स्वामी की कृपा पाना सेवकों का धर्म है।

मनुष्य की वाणी ही जहर और अमृत दोनों का काम करती है।

किसी कपटी व्यक्ति की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।

सुख का आधार धर्म है, धर्म का आधार अर्थ अर्थात धन है, और अर्थ का आधार राज्य है। राज्य का आधार अपनी इन्द्रियों पर विजय पाना है।

शेर भूखे होने पर भी घास फूस नहीं खाता है।

एक ही देश के दो शत्रु आपस में मिलाप करके परस्पर मित्र बन जाते है।

बिना विचार कर कार्य करने वाले व्यक्तयों पर से माँ लक्ष्मी की कृपा नहीं होती है।

अगर आप कायर हैं तो आपको कार्य की चिंता नहीं करनी चाइये।

दूसरे के धन को देखकर उनसे ईर्ष्या करना, उनसे भेदभाव रखना स्वार्थ है।

अन्याय करके पाया धन, धन नहीं होता है, बल्कि न्याय ही धन है।

फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में ही फैलती है। hindi vidhya

फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में ही फैलती है। लेकिन एक किसी व्यक्ति की अच्छाई और बुराई हर दिशा में फैलती है। इसलिए कार्य सदैव सोच समझकर करें।

संसार की सबसे बड़ी शक्ति नौजवानी और औरत की सुन्दरता है।

हमें बीते हुए समय के बारे में सोचकर पछतावा नहीं करना चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए, महान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।

संसार का एक बहुत ही कड़वा सत्य की हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है hindi vidhya

संसार का एक बहुत ही कड़वा सत्य की हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है। ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमे स्वार्थ ना हो।

जब आप किसी काम की शुरुआत करें, तो असफलता से मत डरें और उस काम को ना छोड़ें. जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं वो सबसे प्रसन्न होते हैं।

आचार्य चाणक्य कोट्स इन हिंदी

सांप के फन, मक्खी के मुख और बिच्छु के डंक में ज़हर होता है, पर दुष्ट और नीच सोच वाला व्यक्ति तो जहर से भरा होता है।

मित्रता कभी भी अपने सी कम या ज्यादा प्रतिष्ठा वाले व्यक्ति से नहीं करनी चाहिए। ऐसे व्यक्ति की मित्रता आपको कभी ख़ुशी नहीं देगी।

जिस तरह वेश्याएं निर्धनों के साथ नहीं रहतीं हैं, नागरिक कमजोर संगठन का समर्थन नहीं करते हैं, और पक्षी उस पेड़ पर घोंसला नहीं बनाते जिस पे फल ना हों। ठीख उसी प्रकार सफलता प्राप्त नहीं होती जो आलसी होते हैं।

एक वीर पुरुष लिए अपमानित हो के जीने से अच्छा मरना है। मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है।

हमें कभी भी कमजोर से संधि नहीं करनी चाइये क्योंकि संधि करने वालों के बीच शक्ति ही संधि है।

आपका शत्रु आपसे किसी खास कार्य के लिए ही मित्रता करता है।

संधि और एकता होने hindi vidhya Chanakya Thoughts In Hindi

संधि और एकता होने पर भी हमें पूर्ण सतर्कता के साथ शत्रु से अपने देश की पूर्ण सुरक्षा रखनी चाहिए।

एक हारा हुआ राजा अपने धर्म, अपने धन, अपने अर्थ तीनो को नष्ट कर देता है।

जिस प्रकार लोहा लोहे को काटता है, ठीख उसी प्रकार कच्चा पात्र कच्चे पात्र से टकराकर टूट जाता है।

ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।

वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है, अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते हैं।

तत्त्वों का ज्ञान ही शास्त्र का प्रयोजन होता है, हम कर्म करने से ही तत्त्वज्ञान को समझ सकते हैं।

धर्म से भी बड़ा व्यवहार होता है। आत्मा व्यवहार की साक्षी होती है। आत्मा तो सभी की साक्षी होती है। कूट साक्षी नहीं होना चाहिए।

झूठ बोलने वाला बच सकता है परन्तु न्याय के समय झूठी गवाही देने वाला नरक में जाता है।

किसी व्यक्ति के मन में क्या है, यह बात उसके व्यवहार से प्रकट हो जाती है। पापी व्यक्ति की आत्मा उसके पापों को प्रकट कर देती है। प्रजाप्रिय राजा अपनी प्रजा लोक-परलोक का सुख प्रकट कर देता है।

अगर सांप जहरीला ना भी हो तो उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए, ठीख उसी प्रकार से आप ज्यादा ताकतवर भले ही न हो परन्तु शत्रु के सामने आपको ताकतवर दिखना चाहिए।

जब प्रजा को राजा के दर्शन न हों तो प्रजा नष्ट हो जाती है। राजा के दर्शन देने से प्रजा सुखी होती है।

भले ही स्वामी आपका केसा भी है, प्रत्येक सेवक का धर्म है की वह अपने स्वामी का गुणगान करे।

आपके गुरु की जैसी आज्ञा हो आपको वैसा ही करना चाहिए।

जिस स्थान पर आपको ख़ुशी मिलती है, जहां आप सुखी रह सकते हैं, आपके लिए वही स्थान श्रेष्ठ है।

जिस प्रकार गाय के पीछे बछड़े चलते हैं ठीख उसी प्रकार सुख-दुःख भी आदमी के साथ जीवन भर चलते है।

अपने राजा, गुरु और देवता के पास कभी भी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए।

जो व्यक्ति विश्वासघात करते हैं उनकी कहीं भी मुक्ति नहीं होती।

जो व्यक्ति प्रिय वचन बोलते हैं उनका कोई शत्रु नहीं होता।

शिक्षा से बड़ी मित्रता नहीं होती है। एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह इज्जत मिलती है। शिक्षा से सौंदर्य और यौवन को हराया जा सकता है।

जैसे ही भय आपके करीब आये, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये अन्यथा भय आपको नष्ट कर देगा।

किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबों का मोल उतना ही होता है, जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना का होता है।

सर्प, नृप, शेर, डंक मारने वाले ततैया, छोटे बच्चे, दूसरों के कुत्तों, और एक मूर्ख: इन सातों को नीद से कभी नहीं जगाना चाहिए।

जीविका तो हमें शत्रु की भी नष्ट नहीं करनी चाहिए।

आचार्य चाणक्य के प्रेरणादायक अनमोल विचार

जब भी आप किसी नए कार्य की शुरुआत करते है, तो सब पहले स्वयं से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये कार्य क्यों कर रहा हूँ, इस कार्य के परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं इस कार्य में सफल होऊंगा। और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, ततभी कार्य को आगे की और बढाईये।

जिस व्यक्ति को सिर्फ किताबों का ज्ञान है, और जिस व्यक्ति का धन दूसरों के कब्ज़े में है, वो ज़रुरत पड़ने पर ना अपना ज्ञान प्रयोग कर सकता है और ना ही धन।

इस बात को कभी जाहिर मत होने दीजिये कि आपने भविष्य में क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से इसे रहस्य बनाये रखिये और इस काम को करने के लिए दृढ रहिये।

शुरुआत के पहले पांच सालों में अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखिये। अगले पांच साल उन्हें डांट-डपट के रखिये। जब वह सोलह साल का हो जाये तो उसके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करिए। आपके वयस्क बच्चे ही आपके सबसे अच्छे मित्र हैं।

दण्डनीति के उचित प्रयोग से ही प्रजा की रक्षा संभव है। दंड से सम्पदा का आयोजन होता है। दण्डनीति के प्रभावी न होने से मंत्रीगण भी बेलगाम होकर अप्रभावी हो जाते है। दण्डनीति से आत्मरक्षा की जा सकती है। आत्मरक्षा से सबकी रक्षा होती है।

मन्त्रणा की सम्पति से ही राज्य का विकास होता है। मंत्रणा की गोपनीयता को सर्वोत्तम माना गया है।

स्वजनों को तृप्त करके शेष भोजन से जो अपनी भूख शांत करता है, वाह अमृत भोजी कहलाता है।

गाय के स्वभाव को जानने वाला ही दूध का उपभोग करता है।

जिस प्रकार एक सूखा पेड़ आग लगने पे पुरे जंगल को जला देता है। उसी प्रकार एक दुष्ट पुत्र पुरे परिवार को खत्म कर देता है।

Best Chanakya Quotes In Hindi – आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ अनमोल विचार

हमें कभी भी रात्रि में नहीं घूमना चाहिए, आधी रात तक जागते नहीं रहना चाहिए।

जिस मनुष्य में काम और आलस्य होता है उसका न वर्तमान होता है, न भविष्य।

किसी बड़े कार्य की सफलता में कभी किसी शत्रु को साथी न करें।

सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।

व्याकुल व्यक्ति कभी भी किसी कार्य में सफल नहीं हो सकता।

शत्रु सदेव दण्ड के योग्य होता है। – Chanakya Thoughts In Hindi

देवता के चरित्र का अनुकरण नहीं करना चाहिए।

चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) होने पर भी इन्द्रियों के वश में रहने वाला राजा नष्ट हो जाता है।

शिकारपरस्त राजा धर्म और अर्थ दोनों को नष्ट कर लेता है।

दंड का भय न होने से लोग बिना कार्य के कार्य करने लगते है।

ठंडा लोहा लोहे से नहीं जुड़ता।

मेहनत करने वाले व्यक्तियों के साथ भाग्य हमेशा चलता है।

आग में कभी भी घी नहीं डालना चाहिए। अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।

जो कार्य सुई से हो सकता है उसके लिए तलवार निकलने की जरूरत नहीं होती है। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।

एक पहिया कभी भी अकेला नहीं चला करता है।

समय का दुरूपयोग करने वाला व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रहता है।

किसी व्यक्ति द्वारा दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।

भले ही कठोर दंड से सभी लोग राजा से घृणा करते है। परन्तु राजा योग्य अर्थात उचित दंड देने वाला होना चाहिए।

भगवान मूर्तियों में नहीं है। आपके अच्छे विचार और आपका साफ़ ह्रदय ही आपका इश्वर है। और आपकी आत्मा आपका मंदिर है।

अपने सेवक को तब परखें जब आप काम ना कर रहे हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में परखें, और पत्नी को घोर विपत्ति में परखें।

Chanakya Ke Anmol Vichar – चाणक्य के अनमोल विचार

राजा, गुप्तचर और मंत्री तीनो का एक मत होना किसी भी मंत्रणा का सफल होना है। कार्य-अकार्य के तत्वदर्शी ही आपके मंत्री होने चाहिए।

जब आपसे कोई सलाह लेने आये तो उसे निस्वार्थ भाव से अच्छी राह दिखानी चाहिए।

दो व्यक्तियों के बीच बने रहस्य को तीसरे व्यक्ति के जानने से उसका भेद खुल जाता है फिर वह आपका कितना भी सगा क्यों न हो।

अप्राप्त लाभ आदि राज्यतंत्र के चार आधार है। एक आलसी राजा अप्राप्त लाभ को प्राप्त नहीं करता। आलसी राजा प्राप्त वास्तु की रक्षा करने में असमर्थ होता है। आलसी राजा अपने राज्य की रक्षा नहीं कर सकता। आलसी राजा अपने विवेक की रक्षा नहीं कर सकता। आलसी राजा की प्रशंसा उसके सेवक भी नहीं करते।

कच्चा पात्र कच्चे पात्र से टकराकर टूट जाता है।

शक्तिहीन को बलवान का आश्रय लेना चाहिए

दान से बड़ा कोई और धर्म नहीं।

जो धर्म और अर्थ की वृद्धि नहीं करता वह कामी पुरुष कहलाता है।

पुत्र प्राप्ति दुनिया का सर्वश्रेष्ठ लाभ है। पुत्र पिता का ही अनुगमन करता है। क्योंकि गुणी पुत्र माता-पिता की दुर्गति नहीं होने देता। पुत्र से ही कुल को यश मिलता है। पुत्र के बिना स्वर्ग की प्राप्ति नहीं होती।

संतान को जन्म देने वाली स्त्री पत्नी कहलाती है। पुत्र प्राप्ति के लिए ही स्त्री का वरण किया जाता है।

शास्त्र शिष्टाचार से बड़ा नहीं है। इसलिए शास्त्रों के न जानने पर श्रेष्ठ पुरुषों के आचरणों के अनुसार आचरण करें।

धन-दौलत, दोस्त, पुत्र, पत्नी और राज्य दोबारा हासिल किये जा सकते हैं, लेकिन शोर्य दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता।

संसार में दो कार्य अत्यन्त कठिन हैं, स्त्री के बंधन से छूटना अथवा मोक्ष पाना है।

शत्रु की बुरी आदतों को सुनकर कानों को सुख मिलता है।

चोर और सरकारी कर्मचारियों से अपने धन की रक्षा करनी चाहिए।

गुरु चाणक्य के अनमोल विचार

धन-दौलत, दोस्त, पुत्र, पत्नी औपृथ्वी सत्य पे टिकी हुई है। ये सत्य की ही ताक़त है, जिससे सूर्य चमकता है और हवा बहती है। वास्तव में सभी चीज़ें सत्य पे टिकी हुई हैं।र राज्य दोबारा हासिल किये जा सकते हैं, लेकिन शोर्य दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता।

जिस तरह से एक शिकारी हिरन का शिकार करने से पहले मधुर आवाज में गाता है उसी तरह हमें जिस व्यक्ति अपना काम करवाना है उसे वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे।

वो व्यक्ति जो दूसरों के गुप्त दोषों के बारे में बातें करते हैं, वे अपने आप को बांबी में आवारा घूमने वाले साँपों की तरह बर्बाद कर लेते हैं।

यदि सत्य बोलने से कुछ गलत हो रहा है तो हमें वहां सत्य नहीं बोलना चाहिए।

जिसकी अपनी आत्मा पर नियन्तण होता है वही व्यक्ति आत्मविजयी होता है।

दुष्ट स्त्री बुद्धिमान व्यक्ति के शरीर को भी निर्बल बना देती है।

ज्ञानियों की सेवा से ही ज्ञान प्राप्त होता है।

जहां लक्ष्मी का निवास होता है वहां सुख, शांति और समृद्धि सहज ही आ जाती है।

इन्द्रियों पर विजय का आधार विनम्रता है।

बिना विचार किये किसी भी कार्य को नहीं करना चाहिए।

ज्ञानी और छल-कपट से रहित शुद्ध मन वाले व्यक्ति को ही मंत्री बनाएँ।

राज्यतंत्र को ही नीतिशास्त्र कहते हैं। राजतंत्र से संबंधित घरेलू और बाह्य, दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।

कामयाब होने के लिए अच्छे मित्रों की जरूरत होती है और ज्यादा कामयाब होने के लिए अच्छे शत्रुओं की आवश्यकता होती है।

जब तक आपका शरीर स्वस्थ और नियंत्रण में है और मृत्यु दूर है, अपनी आत्मा को बचाने कि कोशिश कीजिये; जब मृत्यु सर पर आजायेगी तब आप क्या कर पाएंगे?

अपने कर्म को न पहचानने वाले व्यक्ति अंधे के समान होते हैँ।

Chanakya Quotes in Hindi – चाणक्य थॉट्स इन हिंदी

जो सुख-शांति व्यक्ति को आध्यात्मिक शान्ति के अमृत से संतुष्ट होने पे मिलती है वो लालची लोगों को बेचैनी से इधर-उधर घूमने से नहीं मिलती।

आवश्यकतानुसार कम भोजन करना ही स्वास्थ्य प्रदान करता है।

यदि न खाने योग्य भोजन से पेट में बदहजमी हो जाए तो ऐसा भोजन कभी नहीं करना चाहिए।

शरीर में रोग से बड़ा कोई और शत्रु नहीं होता है।

मूर्खों में साहस होता ही है। (यहाँ साहस का तात्पर्ये चोरी-चकारी, लूट-पाट, हत्या आदि से है )

मूर्खों से विवाद नहीं करना चाहिए। मुर्ख से मूर्खों जैसी ही भाषा बोलें। मुर्ख का कोई मित्र नहीं है।

जहाँ पाप होता है, वहां धर्म का अपमान होता है।

एक समझदार व्यक्ति को दूसरों की रहस्यमयी बातों को नहीं सुनना चाहिए।

जिन्हें भाग्य पर विश्वास नहीं होता, उनके कार्य पुरे नहीं होते, कार्य के लिए प्रयत्न न करने वाले व्यक्ति कभी सफल नहीं होते हैं।

धर्म के समान कोई मित्र नहीं है।धर्म ही लोक को धारण करता है।प्रेत भी धर्म-अधर्म का पालन करते है। दया धरम की जन्मभूमि है।धर्म का आधार ही सत्य और दान है। धर्म के द्वारा ही लोक विजय होती है मृत्यु भी धरम पर चलने वाले व्यक्ति की रक्षा करती है।

व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है; और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है; और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है।

संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है, और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है।

हे बुद्धिमान लोगों ! अपना धन उन्ही को दो जो उसके योग्य हों और किसी को नहीं। बादलों के द्वारा लिया गया समुद्र का जल हमेशा मीठा होता है।

Chanakya Thoughts In Hindi – आचार्य चाणक्य के महान विचार

जो अपने कर्तव्यों से बचते हैं, वे अपने आश्रितों परिजनों का भरण-पोषण नहीं कर पाते।

यदि किसी का स्वभाव अच्छा है तो उसे किसी और गुण की क्या जरूरत है ? यदि आदमी के पास प्रसिद्धि है तो भला उसे और किसी श्रृंगार की क्या आवश्यकता है।

एक अनपढ़ व्यक्ति का जीवन उसी तरह से बेकार है जैसे की कुत्ते की पूँछ, जो ना उसके पीछे का भाग ढकती है ना ही उसे कीड़े-मकौडों के डंक से बचाती है।

वह जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ है, उसे भय और चिंता का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सभी दुखों कि जड़ लगाव है। इसलिए खुश रहने कि लिए लगाव छोड़ देना चाहिए।

एक उत्कृष्ट बात जो शेर से सीखी जा सकती है वो ये है कि व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे दिल और ज़ोरदार प्रयास के साथ करे।

जो लोगो पर कठोर से कठोर सजा को लागू करता है। वो लोगो की नजर में घिनौना बनता जाता है, जबकि नरम सजा लागू करता है। वह तुच्छ बनता है। लेकिन जो योग्य सजा को लागू करता है वह सम्माननीय कहलाता है।

शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।

दुसरो की गलतियों से सीखो, अपने ही अनुभव से सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ जाएँगी।

इतिहास गवाह हैं की, जितना नुकसान हमें दुर्जनो की दुर्जनता से नहीं हुआ, उससे ज्यादा सज्जनों की निष्क्रियता से हुआ।

कल करने वाले कार्य को आज ही कर लेना सबसे ज्यादा उचित होता है।

जो व्यक्ति कार्य करना चाहता है वह कोई न कोई उपाय खोज ही लेता है।

प्रकृति का कोप सभी कोपों से बड़ा होता है।

अपने से अधिक शक्तिशाली और समान बल वाले से शत्रुता ना करें। शक्तिशाली शत्रु को कमजोर समझकर ही उस पर आक्रमण करें।

चाणक्य के अनमोल विचार से सम्बंधित अन्य महापुरषों के विचार

प्रिय दोस्तों, में आशा करती हूँ की आपको Chanakya Thoughts In Hindi – चाणक्य के अनमोल विचार को पढ़कर अच्छा लगा होगा। स्वामी विवेकानंद के विचारों ने आपको उत्साहित किया होगा मोटिवेट किया होगा।

आप हमें कमेंट करके बताएं कि आपको आचार्य चाणक्य कौन सा विचार आपको अच्छा लगा और कौन से विचार ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया। यदि आपको इस Chanakya Thoughts In Hindi – चाणक्य के अनमोल विचार की पोस्ट से सम्बंधित कोई भी समस्या है तो आप हमे Comments करके पूछ सकते है।

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