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Biography On Rabindranath Tagore In Hindi – रवींद्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय

Biography On Rabindranath Tagore In Hindi - रवींद्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय

Biography On Rabindranath Tagore In Hindi. मेरे प्रिय दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे Biography On Rabindranath Tagore In Hindi यानि कि रबिन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी के बारे मैं। और पढ़ेंगे रबिन्द्रनाथ टैगोर कौन थे। उन्होंने देश के लिए कितने महान कार्य किये। रबिन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कब और कहाँ हुआ था। उन्होंने पडने के लिए किस तरह मेहनत की और देश के महान व्यक्तियों में अपना नाम अंकित कराया।

रबिन्द्रनाथ टैगोर के जीवन परिचय यानि कि Biography On Rabindranath Tagore In Hindi. में हम उनके व्यक्तित्व और द्वारा देश की आजादी के लिए दिए गए योगदान के बारे मैं भी पड़ेगे। किस तरह से अपने लिखी किताबो और ज्ञान से उन्होंने देश के नोजवानो में आजादी की नई क्रांति की लहार पैदा कर दी थी।

Biography Of Rabindranath Tagore In Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय

  • रबिन्द्रनाथ टैगोर कौन थे – Who Was Ravindranath Tagore
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय – Biography On Rabindranath Tagore In Hindi
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर का प्रारंभिक जीवन
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर की उपलब्धियां
  • प्रारंभिक शिक्षा एवं कार्य
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल वचन
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर की यात्रा
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर का करियर
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर को पुरस्कार एवं सम्मान
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर की म्रत्यु
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर की प्रमुख रचनाये
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर के जीवन परिचय से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

रबिन्द्रनाथ टैगोर यह वह नाम है जिसने हमारे देश के लिए अनेको शास्त्र, अनेकों साहित्य लिखे और तो और देश के लिए उन्होंने राष्ट्रगान और राष्ट्रिय गीत का साहित्य भी लिखा। टैगोर जी देश में ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में प्रशिद्ध कवि और लेखक थे। जिन्होंने एक से बढ़कर एक साहित्य लिखकर उनका ज्ञान दिया।

रबिन्द्रनाथ टैगोर कौन थे – Who Was Ravindranath Tagore

रबिन्द्रनाथ टैगोर जिन्हे हमारे देश में “गुरुदेव” के नाम से भी जाना जाता है।  वे विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और साहित्य को पूरे विश्व में प्रसिद्ध किया उसे एक नयी पहचान दी। रबिन्द्रनाथ टैगोर देश के पहले ऐसे वयक्ति है जिन्होने नोबल पुरस्कार जीता था। 

टैगोर जी नोबेल पुरस्कार पाने वाले प्रथम एशियाई और साहित्य में नोबेल पाने वाले पहले गैर यूरोपीय व्यक्ति भी थे। वह दुनिया के अकेले ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान हैं – भारत का राष्ट्र-गान ‘जन गण मन’ और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान ‘आमार सोनार बाँग्ला।’ इतना ही नहीं रबिन्द्रनाथ एक नाटककार और बहुत ही ऐसे चित्रकार भी थे।

रबिन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय – Biography On Rabindranath Tagore In Hindi

रबिन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर और माता का नाम शारदा देवी था। वह अपने माँ-बाप की तेरह जीवित संतानों में सबसे छोटे थे। जब वे छोटे थे तभी उनकी माँ का देहांत हो गया और चूँकि उनके पिता अक्सर यात्रा पर ही रहते थे इसलिए उनका लालन-पालन नौकरों-चाकरों द्वारा ही किया गया।

उनके सबसे बड़े भाई द्विजेन्द्रनाथ एक दार्शनिक और कवि थे। उनके एक दूसरे भाई सत्येन्द्रनाथ टैगोर इंडियन सिविल सेवा में शामिल होने वाले पहले भारतीय थे। इनकी बहिन स्वर्णकुमारी उपन्यासकार थीं। उन्होंने बैरिस्टर बनने की इच्छा में 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजटोन में पब्लिक स्कूल में नाम लिखाया फिर लन्दन विश्वविद्यालय में कानून का अध्ययन किया लेकिन 1880 में बिना डिग्री प्राप्त किए ही स्वदेश वापस लौट आए। सन् 1883 में मृणालिनी देवी के साथ उनका विवाह हुआ।

टैगोर का परिवार एक बहुत बड़ा समजा सुधारक था। उन्होंने साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन किया बंगाली और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत एवं रंगमंच और पटकथाएं वहां नियमित रूप से प्रदर्शित हुआ करती थी। उनके पिता जी ने अपने घर मैं ही कई साहित्यकारों और संगीतकारों को घर में ही रखा जिससे घर के सभी बच्चे उनसे भारतीय शास्त्री संगीत सीख सकें। 

टैगोर जी को घूमने ज्यादा दिलचस्पी थी इसलिए वे कक्षा में बैठकर पढ़ना बिलकुल भी पसंद नहीं करते थे।इसलिए वह वह अक्सर अपने परिवार के सदस्यों के साथ परिवार के जागीर पर घूमा करते थे। और उन्होंने कुछ समय के लिए पढ़ाई छोड़ दी और घूमने जाने लगे। मैरर या पास के बोलपुर और पनिहती में घूमने को प्राथमिकता दी, और फिर परिवार के साथ कई जगहों का दौरा किया। उनके भाई हेमेंन्द्रनाथ ने उन्हें पढ़ाया लिखाया और शारीरिक रूप से अच्छी शिक्षा दी। 

रबिन्द्रनाथ टैगोर जी घूमने फिरने के साथ साथ जिमनास्टिक्स, जुडो, कराटे, तैरना आदि भी बहुत अच्छी तरह से आता था। टैगोर ने ड्राइंग, शरीर विज्ञान, भूगोल और इतिहास, साहित्य, गणित, संस्कृत और अंग्रेजी को अपने सबसे पसंदीदा विषय का अध्ययन किया था। आपको ये जानकार हैरानी होगी कि औपचारिक शिक्षा उनको इतनी नापसंद थी कि कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में वो सिर्फ एक दिन ही गए।

अपने उपनयन संस्कार के बाद रबिन्द्रनाथ अपने पिता के साथ कई महीनों के भारत भ्रमण पर निकल गए। वहां से फिर वह डलहौजी पहुंचे, डलहौज़ी में उन्होंने इतिहास, खगोल विज्ञान, आधुनिक विज्ञान, संस्कृत, जीवनी का अध्ययन किया और कालिदास के कविताओं की विवेचना की। 

1873 में अमृतसर में अपने एक महीने के प्रवास के दौरान, वह सुप्रभात गुरबानी और नानक बनी से बहुत प्रभावित हुए थे, जिन्हें स्वर्ण मंदिर में गाया जाता था जिसके लिए दोनों पिता और पुत्र नियमित रूप से आगंतुक थे। इसके पश्चात रबिन्द्रनाथ जोड़ासाँको लौट आये और सन 1877 तक अपनी कुछ महत्वपूर्ण रचनाएँ कर डाली। उन्होंने इसके बारे में अपनी पुस्तक मेरी यादों में उल्लेख किया जो 1912 में प्रकाशित हुई थी। भारत राष्ट्रगान “जन मन गण” अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

प्रारंभिक शिक्षा एवं कार्य

इनकी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के, बहुत ही प्रसिद्ध स्कूल सेंट जेवियर नामक स्कूल मे हुई . इनके पिता प्रारंभ से ही, समाज के लिये समर्पित थे।  इसलिये वह रबिन्द्रनाथ जी को भी, बैरिस्टर बनाना चाहते थे।  जबकि, उनकी रूचि साहित्य मे थी, रबिन्द्रनाथ जी के पिता ने 1878 मे उनका लंदन के विश्वविद्यालय मे दाखिला कराया परन्तु, बैरिस्टर की पढ़ाई मे रूचि न होने के कारण, 1880 मे वे बिना डिग्री लिये ही वापस आ गये। 

उनके भाई ने उन्हें जिमनास्टिक, तैरना, कराटे, आदि भी सिखाये उनकी भाभी जी ने उन्हें कविता लिखना सिखाया और उन्होंने अपनी पहली कविता आठ साल की उम्र मैं लिखी थी। उनके पिता जी ने अपने घर में ही कई साहित्यकार, और शास्त्री संगीत के गुरुओं को रखा जिससे घर सभी बच्चे साहित्य और संगीत को अच्छी तरह से सीख सकें। 

वह एक कवि के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं, लेकिन टैगोर एक समान रूप से अच्छी लघु कहानी लेखक, गीतकार, उपन्यासकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार भी थे। रवींद्रनाथ टैगोर अपनी पद्य कविताओं और शास्त्री संगीत के लिए जाने जाते है। इन्होने अपने पूरे जीवनकाल में कई उपन्यास, निबंध, लघु कथाएँ, यात्रावृन्त, नाटक और हजारों गाने भी लिखे हैं। 

उनके काम अक्सर उनके लयबद्ध, आशावादी, और गीतात्मक प्रकृति के लिए काफी उल्लेखनीय हैं। टैगोर ने इतिहास, भाषाविज्ञान और आध्यात्मिकता से जुड़ी कई किताबें लिखी थी। टैगोर के यात्रावृन्त, निबंध, और व्याख्यान कई खंडों में संकलित किए गए थे, जिनमें यूरोप के जटरिर पत्रों (यूरोप से पत्र) और मनुशर धरमो (द रिलिजन ऑफ मैन) शामिल थे।

रबींद्रनाथ टैगोर एक निपुण गीतकार थे, टैगोर ने 2,230 गाने लिखे, जिन्हें अक्सर ‘रवींद्र संगीत’ कहा जाता है। उन्होंने भारत के लिए राष्ट्रगान- जन गण मन– और बांग्लादेश- ‘आमार सोनार बांग्ला’ भी लिखा, जिसके लिए हम हमेशा उनके लिए ऋणी बने रहेंगे। 

रबिन्द्रनाथ टैगोर कभी न रुकने वाले, निरंतर कार्य करने पर विश्वास रखते थे। रबिन्द्रनाथ टैगोर ने, अपने आप मे ऐसे कार्य किये है जिससे, लोगो का भला ही हुआ है। उनमे से एक है, शांतिनिकेतन की स्थापना . शान्तिनिकेतन की स्थापना, गुरुदेव का सपना था जो उन्होंने, 1901 मे, पूरा किया। 

वह चाहते थे कि, प्रत्येक विद्यार्थी कुदरत या प्रकृति के समुख पढ़े, प्रकृति को अच्छी तरह से समझे जिससे सभी छात्रों बहुत ही अच्छा माहोल मिले। इसलिये गुरुदेव ने, शान्तिनिकेतन मे पेड़-पौधों और प्राकृतिक माहोल मे, पुस्तकालय की स्थापना की। रबिन्द्रनाथ टैगोर के अथक प्रयास के बाद, शान्तिनिकेतन को विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ। जिसमे साहित्य कला के, अनेक विद्यार्थी अध्यनरत हुए।

रबिन्द्रनाथ टैगोर की उपलब्धिया

गुरूजी ने अपने जीवनकाल में बहुत सारी उपलब्धिया प्राप्त की है उनकी ख्याति के बारे में देश में ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में चर्चे होते है उनकी उपलब्धिया निम्नलिखित है –

  • उन्होंने अपनी पहली कविता आठ वर्ष की उम्र में लिखी  
  • उन्हें गुरु की उपाधि से सम्मानित किया गया जो की अंग्रेजों के शाशन के में किया गया था। 
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर की तमाम उपलब्धियां में से सबसे प्रमुख थी “गीतांजलि” 1913 मे, गीतांजलि के लिये, रबिन्द्रनाथ टैगोर को “नोबेल पुरुस्कार” से सम्मानित किया गया। 
  • रबिन्द्रनाथ टैगोर ने भारत को और बंगला देश को उनकी सबसे बड़ी अमानत के रूप मे राष्ट्रगान दिया है जोकि, अमरता की निशानी है। हर महत्वपूर्ण अवसर पर राष्ट्रगान गाया जाता है जिसमे भारत का “जन-गण-मन” व बंगला देश का “आमार सोनार बांग्ला” है। 
  • रब्बी टैगोर” रबिन्द्रनाथ टैगोर को रब्बी टैगोर कह भी बुलाया जाता था। वह अपने जीवन काल में कई बार अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक से मिले जिन्होंने उन्हें रब्बी टैगोर नाम दिया था।

रबिन्द्रनाथ टैगोर की यात्रा

रबिन्द्रनाथ टैगोर को घूमने फिरने का तो बचपन से हि बहुत शोक था। वह अक्सर अपने परिवार के साथ घूमने जाते थे। वह अपने पापा साथ अपने जागीर में घूमा करते थे। वह घूमने के लिए सबसे ज्यादा बोलपुर और पनिहती में जाया करते थे। आप उनके घूमने के शोक का अंदाजा यहां से लगा सकते है कि उन्होंने घूमने कि वजह से कुछ समय के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। 

और तो और उन्हने घूमने के वजह से ही अपनी बेरिस्टर की पढ़ाई भी इंग्लैंड में अधूरी छोड़ दी और भारत वापस लोट आये थे। उन्होंने बताया की वहाँ पर लेक्चर बहुत लम्बे समय के लिए होते है और में इतनी देर एक जगह पर नहीं बैठ सकता हूँ। 

सन 1878 से लेकर सन 1932 तक उन्होंने 30 देशों की यात्रा की। उनकी यात्राओं का मुख्य मकसद अपनी साहित्यिक रचनाओं को उन लोगों तक पहुँचाना था जो बंगाली भाषा नहीं समझते थे। प्रसिद्ध अंग्रेजी कवि विलियम बटलर यीट्स ने गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद का प्रस्तावना लिखा। उनकी अंतिम विदेश यात्रा सन 1932 में सीलोन (अब श्रीलंका) की थी। 

उन्होंने इन्ही यात्राओं के दौरान देश और विदेश के बड़े बड़े वैज्ञानिकों से मुलाकात की जिसमे से उन्होंने बताया की उनकी उनकी अल्बर्ट आइंस्टीन से मुलाकात हमेशा खाश रही है। इन्हे यात्राओं के दौरान उन्होंने अपने 2300 से अधिक गाने और साहित्य भी लिखे। 

रबिन्द्रनाथ टैगोर का करियर

रबिन्द्रनाथ टैगोर जब इंग्लैंड से अपनी अधूरी पढ़ाई छोड़कर आये तो उन्होंने मृणालिनी देवी से शादी की और कुछ समय तक शादी को एन्जॉय किया। और 1901 के बाद का ज़्यदातर उन्होंने अपना जीवन अपने परिवार के साथ जागीर में ही बिताया। और इसी बीच उन्होंने देश का अच्छी तरह से भ्रमण किया और देश लोगो से मिले उनकी गरीबी को बहुत ही करीब से देखा। 

वर्ष 1891 से लेकर 1895 तक उन्होंने ग्रामीण बंगाल के पृष्ठभूमि पर आधारित कई लघु कथाएँ लिखीं। उन्हें प्रकृति से सदैव लगाव रहा इसलिए वह 1901 शांतिनिकेतन चले आये और यहां पर उन्होंने एक आश्रम स्थापित किया एक स्कूल, पुस्तकालय और पूजा स्थल का निर्माण किया। टैगोर जी ने इसके आसपास बहुत सारे पेड़ पौधे लगाए और बहुत सुन्दर बगीचा बनाया। 

यहीं पर उनकी पत्नी और दो बच्चों की मौत भी हुई। उनके पिता भी सन 1905 में चल बसे। 14 नवम्बर 1913 को रविंद्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। नोबेल पुरस्कार देने वाली संस्था स्वीडिश अकैडमी ने उनके कुछ कार्यों के अनुवाद और ‘गीतांजलि’ के आधार पर उन्हें ये पुरस्कार देने का निर्णय लिया था। 

1915 मैं अंग्रजी सरकार ने उन्हें “सर” की उपाधि दी और उन्हें सर कहकर पुकारा। जिसे रविंद्रनाथ ने 1919 के जलिआंवाला बाग़ हत्याकांड के बाद छोड़ दिया। सन 1921 में उन्होंने कृषि अर्थशाष्त्री लियोनार्ड एमहर्स्ट के साथ मिलकर उन्होंने अपने आश्रम के पास ही ‘ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान’ की स्थापना की। बाद में इसका नाम बदलकर श्रीनिकेतन कर दिया गया।

रबिन्द्रनाथ टैगोर को पुरस्कार एवं सम्मान

रबिन्द्रनाथ टैगोर को बहुत सारे पुरस्कार और सम्मान दिए गए है। उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये उन्हें सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। वह पहले गैर यूरोपीय थे जिनको साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। नोबेल पुरस्कार गुरुदेव ने सीधे स्वीकार नहीं किया। उनकी ओर से ब्रिटेन के एक राजदूत ने पुरस्कार लिया था और फिर उनको दिया था। 

अंग्रोजों ने उन्हें सर के नाम से भी उन्हें सम्मान दिया था। जलियाँवाल बाग हत्याकांड के बाद उन्होंने अपनी यह उपाधि थी। उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए भी राष्ट्रगान लिखे। स्वामी विवेकानंद के बाद वह दूसरे व्यक्ति थे जिन्होंने विश्व धर्म संसद को दो बार संबोधित किया। 

रबिन्द्रनाथ टैगोर की प्रमुख रचनाये

रविंद्रनाथ टैगोर ने अपने जीवन काल अनेकों रचनाएँ की जिसमे से कुछ के लिए उन्हें पुरस्कार भी दिए गए। उन्होंने पूरे जीवन  लगभग 2300 गीत लिखे। उनके द्वारा लिखी गयी रचनाये निम्नलिखित है-

  • गीतांजलि – नोबेल पुरस्कार 
  • द गार्डनर
  • भारत का “जन-गण-मन” व बंगला देश का “आमार सोनार बांग्ला” है
  • द गोल्डन बोट आदी
  • गोरा (उपन्यास) रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • अनमोल भेंट/मुन्ने की वापसी रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • अनाथ रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • अनाधिकार प्रवेश रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • अपरिचिता रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • अवगुंठन रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • अन्तिम प्यार रबीन्द्रनाथ टैगोर
  • खोया हुआ मोती, गूंगी, जीवित और मृत, तोता 
  • धन की भेंट, नई रोशनी  ,पत्नी का पत्र ,प्रेम का मूल्य 
  • समाज का शिकार 
  • आधी रात में, एक रात, पोस्टमास्टर 
  • एक छोटी पुरानी कहानी, मुसलमानी की कहानी

रबिन्द्रनाथ टैगोर के जीवन परिचय से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदु 

इन महत्वपूर्ण बिंदुओं में हम उनके जीवन की कुछ अहम् बातों को लिख रहे है जिसे पढ़कर आप उनके जीवन का अनुमान आसानी से लगा सकते है-

  • रबिन्द्रनाथ टैगोर का जन्‍म 7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। लोग इन्ह्ने गुरुदेव के नाम से भी जानते है।  
  • गुरदेव के पिता का नाम  देवेन्द्रनाथ ठाकुर और शारदा देवी था। 
  • टैगोर जी की प्रारम्भिक शिक्षा सेंट जेवियर स्कूल में पूरी हुयी। 
  • इनके पिता जी इन्हे बैरिस्टर बनाना चाहते थे इसकी वजह से इनका नाम 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजटोन पब्लिक स्कूल में लिखवाया गया पढ़ाई और वकालत में काम रूचि होने के कारण 1880 मैं डिग्री प्राप्त किये बिना ही वापस लोट आये। 
  • सन् 1883 में मृणालिनी देवी के साथ उनका विवाह हुआ था। 
  • आपको जानकर हैरानी होगी की उन्होंने अपनी पहली कविता मात्रा 8 वर्ष की उम्र में लिखी थी। 
  • गुरुदेव जी ने लगभग 2230 गीतों की रचना अपने पूरे जीवन काम में की। 
  • टैगोर जी ने 1901 में पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्र में शांतिनिकेतन में एक प्रायोगिक विद्यालय की स्थापना की थी। 
  • टैगोर जी को उनकी रचना गीतांजलि के लिए वर्ष 1913 में नोबेल पुरस्‍कार प्रदान किया गया था। 
  • गुरुदेव नोबेल पुरस्कार पाने वाले एशिया के पहले व्यक्ति थे जिन्हे साहित्य के लिए पुरस्कार दिया गया था।
  • वर्ष 1915 में अंग्रेजो द्वारा टैगोर जी को ‘सर (गुरु)’ की उपाधि दी गई थी। 
  • 1919 में हुऐ जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ के बाद रविन्द्रनाथ टैगोर ने अंग्रेज सरकार द्वारा प्रदान की गई ‘सर’ की उपाधि का त्याग कर दिया था। 
  • वे एकमात्र कवि थे जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं – भारत का राष्ट्र-गान “जन गण मन” और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान “आमार सोनार”
  • उनकी प्रमुुुुख प्रकाशित कृतियों में – गीतांजली, गीताली, गीतिमाल्य, कथा ओ कहानी, शिशु, शिशु भोलानाथ, कणिका, क्षणिका, खेया आदि प्रमुख हैं उन्होंने कुछ पुस्तकों का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया गया था। 
  • रबिन्द्रनाथ नाथ टैगोर ने ही गान्धीजी को सबसे पहली बार महात्मा कहकर पुकारा था और उन्होंने ही गाँधी जी को राष्ट्रपिता कहकर सम्भोधित किया था। 
  • भारत के राष्ट्रगान के रचयिता रबिन्द्रनाथ ठाकुर जी की मृत्यु 7 अगस्त, 1941 को कलकत्ता में हुई थी।

रबिन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल वचन – Biography On Rabindranath Tagore In Hindi

रबिन्द्रनाथ टैगोर बहुत ही मृदु स्वभाव के थे उन्होंने देश के लिए जो भी किया सिर्फ अपनी कलम से किया उसी कलम से उनके द्वारा लिखे गए कुछ अनमोल तथ्य जिन्हे पढ़कर हमारे देश को लोग आज भी उन तथ्यों से प्रेरणा लेते है-

  • आयु सोचती है, जवानी करती है।
  • जो अपना है, वह मिलकर ही रहेगा।
  • सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है. यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है।
  • प्रसन्न बने रहना बहुत सरल है, परन्तु  सरल बने रहना बहुत कठिन है।
  • पंखुडियां तोड़ कर आप फूल की खूबसूरती नहीं इकठ्ठा करते।
  • मौत प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है; ये सिर्फ दीपक को बुझाना है क्योंकि सुबह हो गयी है।
  • मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती।
  • मिटटी के बंधन से मुक्ति पेड़ के लिए आज़ादी नहीं है।
  • हर एक कठिनाई जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं,एक भूत बन कर आपकी नीद में बाधा डालेगी।
  • जो कुछ हमारा है वो हम तक आता है, यदि हम उसे ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं।
  • तथ्य कई हैं पर सत्य एक है।
  • आस्था वो पक्षी है जो सुबह अँधेरा होने पर भी उजाले को महसूस करती है।
  • मैं सोया और स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है. मैं जागा और देखा कि जीवन सेवा है. मैंने सेवा की और पाया कि सेवा आनंद है।
  • यदि आप सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा।
  • कला में व्यक्ति खुद को उजागर करता है कलाकृति को नहीं।
  • प्रेम अधिकार का दावा नहीं करता , बल्कि स्वतंत्रता देता है।
  • संगीत दो आत्माओं के बीच के अनंत को भरता है।
  • तितली महीने नहीं क्षण गिनती है, और उसके पास पर्याप्त समय होता है।
  • अकेले फूल को कई काँटों से इर्ष्या करने की ज़रुरत नहीं होती।
  • पृथ्वी द्वारा स्वर्ग से बोलने का अथक प्रयास हैं ये पेड़।
  • हम तब स्वतंत्र होते हैं जब हम स्वतंत्रता की पूरी कीमत चुका देते हैं।
  • सिर्फ खड़े होकर पानी को देखते रहने से दरिया पर नहीं किया सकता।

रबिन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय – Biography On Rabindranath Tagore In Hindi

क्रम संख्या जीवन परिचय बिंदु जीवन परिचय
1 नाम  रबिन्द्रनाथ टैगोर (गुरुदेव)
2 जन्म  7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको
3 मृत्यु  7 अगस्त, 1941, कोलकाता
4 पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर 
5 माता का नाम   मशारदा देवी 
6 राष्ट्रीयता,  धर्म   भारतीय , हिन्दू  
7 पत्नी का नाम  मृणालिनी देवी
8 भाषा बंगाली और अंग्रेजी 
9 भाई बहन  13 भाई बहन (द्विजेन्द्रनाथ, सत्येन्द्रनाथ, स्वर्णकुमारी ) 
10 प्रमुख रचनाये   गीतांजलि, द गोल्डन बोट आदी, द गार्डनर
11 सम्मान  नोबोल पुरुस्कार
12 उपाधि लेखक और चित्रकार

रबिन्द्रनाथ टैगोर की म्रत्यु

उन्होंने अपने जीवन के अंतिम 4 साल पीड़ा और बीमारी में बिताये। वर्ष 1937 के अंत में वो अचेत हो गए और बहुत समय तक इसी अवस्था में रहे। लगभग तीन साल बाद एक बार फिर ऐसा ही हुआ। इस दौरान वह जब कभी भी ठीक होते तो कवितायें लिखते। इस दौरान लिखी गयीं कविताएं उनकी बेहतरीन कविताओं में से एक हैं। 

एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने, अपने प्रकाश से, सर्वत्र रोशनी फैलाई . भारत के बहुमूल्य रत्न मे से, एक हीरा जिसका तेज चहु दिशा मे फैला। जिससे भारतीय संस्कृति का अदभुत साहित्य, गीत, कथाये, उपन्यास , लेख प्राप्त हुए। ऐसे व्यक्ति का निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकाता मे हुआ। रबिन्द्रनाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व है जो, मर कर भी अमर है। 

सम्बंधित जीवन परिचय 

प्रिय छात्रों, मैं आशा करती हूँ की आपको Biography Of Rabindranath Tagore In Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Biography Of Rabindranath Tagore In Hindi  के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस Biography Of Rabindranath Tagore In Hindi  से related कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

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