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Biography On Mahatma Gandhi In Hindi – महात्मा गांधी का जीवन परिचय

Biography On Mahatma Gandhi In Hindi - महात्मा गांधी का जीवन परिचय

Biography On Mahatma Gandhi In Hindi – महात्मा गांधी का जीवन परिचय. मेरे प्रिय दोस्तों, आज की इस जीवन परिचय में हम बात करेगे Biography On Mahatma Gandhi In Hindi यानि की महात्मा गाँधी जी की जीवन के बारे में.

महात्मा गाँधी कौन थे? हमारे देश के लिए गाँधी जी ने कितने महान काम किये, महात्मा गाँधी का जन्म कब और कहा हुआ था? उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए क्या किया. और महात्मा गाँधी के क्या क्या आंदोलन थे. महात्मा गाँधी के कोन कौन से नारे थे जो लोगो के दिलो में आजादी के भावना जाग्रत किया करते थे.

महात्मा गाँधी जी की जीवन परिचय यानि की Biography On Mahatma  Gandhi In Hindi में हम उनके व्यक्तित्व और उनके जीवन के बारे में पढेगे. अगर आप लोग महात्मा गाँधी जी के बारे में अच्छी तरह से जानना चाहते है. तो आप इस महात्मा गाँधी की जीवन परिचय को पूरा जरुर पढ़े बो भी अपनी मात्र भाषा हिंदी में.

Biography On Mahatma Gandhi In Hindi – महात्मा गाँधी का जीवन परिचय.

  • महात्मा गाँधी का प्रारम्भिक जीवन.
  • विदेश में शिक्षा और बकालत.
  • भारतीय स्वंतत्रता संग्राम का संघर्ष.
  • महात्मा गाँधी का परिवार के बारे में.
  • महात्मा गाँधी जी का बचपन और शिक्षा.
  • महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गए आंदोलन.
  • महात्मा गाँधी जी का विवाह.
  • महात्मा गाँधी का जीवन परिचय – Biography On Mahatma Gandhi In Hindi
  • महात्मा गाँधी का साउथ अफ्रीका का सफ़र.
  • महात्मा गाँधी जी के अनमोल विचार.
  • महात्मा गाँधी जी की म्रत्यु कम हुई और कैसे हुई.
  • महात्मा गाँधी का संक्षिप्त जीवन परिचय – Biography On Mahatma Gandhi In Hindi.

महात्मा गाँधी का प्रारम्भिक जीवन.

महात्मा गाँधी जी का जन्म 1869 में 2 अक्टूबर को हुआ था. महात्मा गाँधी जी के पिता जी का नाम करमचन्द्र गाँधी था. और गाँधी जी की माता जी का नाम पुतलीबाई था. आपकी जानकारी के लिए बता दू की महात्मा गाँधी जी का असली नाम मोहनदास था. और गाँधी जी के पिता का नाम करमचन्द्र गाँधी जी था और इसके कारण गाँधी जी का नाम पूरा नाम मोहन दास करमचन्द्र पढ़ा था.

गाँधी जी के पिता जी करमचन्द्र गाँधी जी कट्टर हिन्दू एवं अंग्रेज सरकार के अधीन गुजरात में ही काठियावाड की एक बहुत ही छोटी सी रियासत में प्रधानमंत्री थे. गाँधी जी के पिता जी की पहले तीन पत्नियाँ थी. जो प्रशव के दर्द के कारण तीनो पत्नियों की म्रत्यु हो गयी थी. इसी कारण से गाँधी जी के पिता जी को चौथा विवाह करना पढ़ा था.

महात्मा गाँधी जी की माता जी भगवान की पूजा में व्यस्त रहती थी. इसी के साथ साथ उनका ये सकारात्मक का प्रभाव गाँधी जी के उपर भी पड़ने लगा था. फिर गाँधी जी अपनी माता की वजह से हमेशा कमजोरो में उर्जा को जगाते थे. गाँधी जी कभी भी मांशाहारी खाना नही खाते थे. गाँधी जी सिर्फ शाकाहारी खाना खाते थे. और अपनी आत्मा को शुद्ध रखने के लिए वह व्रत भी रखते थे.

विदेश में शिक्षा और बकालत – Biography On Mahatma Gandhi In Hindi

महात्मा गाँधी अपने पुरे परिवार में सबसे छोटे थे. सबसे जादा पढ़े लिखे थे इसलिए गाँधी जी के परिवार वाले ऐसा मानते थे. की वह अपने पिता और चाचा का उतराधिकार दीवान बन सकते थे. उनके एक पारिवारिक मित्र मावजी दवे ने ऐसी सलाह दी की एक बार गाँधी जी लन्दन से वैरिस्टर बन जाये तो उनको अपने पिता करमचन्द्र की दीवान की पदवी मिल सकती थी.

उनकी माता जी पुतलीबाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके विदेश जाने के विचार का विरोध किआ पर मोहनदास करमचंद गांधी पर विदेश गए और वहां जाकर उन्होंने वेरिस्टर की पढ़ाई की और वकील बने.

जून 1891 गाँधी जी भारत में लौट आये थे. और जैसे ही भारत आए गाँधी जी तो उन्होंने अपनी माँ की मौत के बारे में पता चला तो उन्हें इस बात का बहुत दुःख हु. इसके बाद उन्होंने बॉम्बे जाके वकालत सुरु की और उन्हें वहां भी सफलता नही मिली. तो फिर वह राज कोट चले गए फिर उन्होंने जरुरतमंदों के लिए मुकद्दमे लिखने शुरू किये. लेकिन कुछ समय बाद फिर गाँधी जी ने ये काम भी छोड़ दिया था.

महात्मा गाँधी का साउथ अफ्रीका का सफ़र.

गाँधी जी जब 24 साल की उम्र में साउथ अफ्रीका गए थे. तो वहां पे उन्होंने प्रिटोरिया स्थित कुछ भारत के व्यापारियों न्यायिक सलाह पर गाँधी जी वहां गए थे. 1983 में गांधी जी सेठ अब्दुल्ला का मुकदमा लड़ने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए जिसका बुलावा स्वंम सेठ अब्दुल्ला ने भेजा था। और यहीं से शुरू हो जाती है उनकी दक्षिण अफ्रीका यात्रा।

गाँधी जी ने अपने पुरे 21 साल साउथ अफ्रीका में बिताये थे. और वह उनके राजनेतिक विचार और नेतृत्व कौसल का बिकास हुआ था. गांधी जी पानी के जहाज पर सवार होकर दक्षिण अफ्रीका के डरबन पहुंचे गए थे. 7 जून 1893 को उन्होंने प्रीटोरिया जाने के लिए ट्रेन पकड़ी.

जब ट्रेन पीटरमारिट्जबर्ग पहुंचने वाली थी तो उन्हें थर्ड क्लास डिब्बे में जाने के लिए कहा  गया वह नहीं गए क्योंकि उनके पास फर्स्ट क्लास का टिकट था। तो उन्हें जबरदस्ती पीटरमारिट्जबर्ग स्टेशन पर ट्रेन से धक्का देकर उतार दिया. इस ट्रैन में उन्हें कई बार भेद भाव का सामना करना पड़े इस घटना के बाद गांधी जी ने इस भेदभाव के खिलाफ लड़ने के लिए पूरी रत सोचा. 7 जून 1893 की रात को ही उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन की शुरआत की.

दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी को कई बार भेदभाव का सामना करना पड़ा। एक बार घोड़ागाड़ी में अंग्रेज यात्री के लिए सीट नहीं छोड़ने पर उन्हें पायदान पर यात्रा करनी पड़ी और चालक की मार भी झेलनी पड़ी. गाँधी जी ने साउथ अफ्रीका में भारत के लोगो को अपने राजनेतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए बहुत संघर्ष किया था.

दक्षिण अफ्रीका के कई होटलों में गांधी जी का अंदर जाना मना था। वह वहां नहीं जा सकते थे। भारतीयों पर अन्याय को देखते हुए गांधी जी ने अंग्रेजी साम्राज्य में अपने देशवासियों के सम्मान के लिए लड़ाई लड़ने का फैसला लिया।

उन्होंने भारत की नागरिकता सम्बन्धित मुद्दों को भी साउथ अफ्रीका की सरकार के सामने उठाया था. और 1906 में जुलू युद्ध में भारत के लोगो को भारती करने के लिए अंग्रेजो के अधिकारयो को सक्रिय रूप से प्रेयित किया था. 1915 में गांधी जी भारत लौटे और फिर आजादी का जो आंदोलन उन्होंने चलाया उसी ने हमें अंग्रेजों से आजाद कराया.

भारतीय स्वंतत्रता संग्राम का संघर्ष.

सन 1914 में गाँधी जी साउथ अफ्रीका से लौट के भारत आये थे. गाँधी जी अपनी मर्जी से भारत नही आये थे. कांग्रेस के नेता गोपाल कृषण के कहने पर गाँधी जी भारत आये थे. और जब वह भारत आये थे तो गाँधी एक राष्ट्रवादी नेता बन गए थे. सह्योजिक के रूप में प्रतिष्ठा हो चुके थे.

शुरुआती दौर में गाँधी जी के विचार कई हद तक गोखले के विचारे से मिलते झूलते थे. प्रारम्भ में गाँधी जी ने भारत देश को कई राज्यों का दौर किया और राजनितिक सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को समझने और समझाने की कोसिस की.

महात्मा गाँधी का परिवार के बारे में -Biography On Mahatma Gandhi In Hindi

नाम मोहन दास करम चन्द्र गाँधी गाँधी जी का उप नाम बापू संत राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी गाँधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था. और गाँधी जी का जन्म पोरबंदर गुजरात में हुआ था. भारतीय स्वंत्रता संग्राम के अअहिंसक और शांतिप्रिय आन्दोलन कारी के रूप में गाँधी जी जाने जाते है.

वर्तमान समय में गाँधी के जन्म दिन पर राष्ट्रीय अवकाश भारतीय मुद्रा पे फोटो और हर एक सरकारी कागज़ पे गाँधीजी की तस्वीर लगी रहती है. आज़ादी के समय या उससे पहले महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरु को अक्सर साथ साथ देखा जाता था. गाँधी जी को जवाहरलाल नेहरु बहुत पसंद थे.

इसमें कोई सक नही की जवाहरलाल नेहरु को भारत का प्रथम प्रधानमंत्री बनाने का श्रेय गाँधी जी को ही जाता है.अगर गाँधी जी नेहरु के साथ न खड़े होते तो शायद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के तोर पर सरदार वल्लभभाई को जाना जाता.

जहाँ एक ओर नेहरु जी का परिवार आज भी राजनिति में सक्रिय है. वहीँ दूसरी ओर उनके गुरु रहे गाँधी जी के परिवार के बारे में किसी आम इन्सान तो क्या बड़े-बड़े इतिहास कारों को कोई खास जानकारी नही है.

बचपन से ही बच्चो को स्कूल में बापू के बारे में बताया जाता है. और बच्चो को उनकी जीवनी रटाई जाती है. (दे दी हमे आजादी बिना खड़क बिना ढल शबर्मती के संत ने कर दिया कमाल) ये गाना भी हिन्दुस्तानियों की जुवा पर सुना जाता है. लेकिन नाम गुम जायेगा चेहरा ये नज़र आयेगा की कहाबत आज बापू पर चरित्रार्थ होती दिख रही है. बस फर्क इतना है, की ये नाम गाँधी जयंती पे याद आता है. और चेहरा कभी कबार नोट को ध्यान से देखने से दिख जाता है.

आज उनके परिवार के सदस्य जीवित भी है या नहीं उनके परिवार की कितनी पीडिया आज मोजूद है. वे क्याकर रही है. और कहाँ पर रहती है, और कितने सदस्य है. ऐसे कई सवाल आपके दिमाग में बार बार अ रहे होगे. में पुरे विश्वास से कह सकता हूँ आपको उनके परिवार के बारे में बिलकुल पता नही होगा. लेकिन में आपको बताने की कोशिश करूंगा.

अगर इन्टरनेट के हिसाब से माने तो बापू के पुत्र और पर पुत्र और उनके भी आगे के वंशित आज विश्व में 6 देशो में निबास कर रहे है.जिनकी कुल संख्या 136 सद्य्स्यो की है. आपको ये सुनकर हेरानी होगी इन में से 12 चिकत्सक और 12 प्रभ्क्त्क 5 इंजिनियर 4 वकील 3 पत्रकार 2 IAS 1 वैज्ञानिक 1 चार्टेट अकाउंटेंट 5 निजी कम्पनियों में उच्च पद के अधिकारी और 4 PHD धारी थे.

इनमे से सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है. पुरे मोजुदा परिवार में लडकियों की संख्या लडको की तुलना में काफी ज्यादा है.आज उनके परिवार के कुल 136 सदस्यों में से 120 सदस्य जीवित है. जो भारत के अलावा अमेरिका दक्षिण अफ्रीका ऑस्ट्रेलिया कैनेडा और इंग्लैंड में रहते है.

महात्मा गाँधी जी का बचपन और शिक्षा.

गाँधी जी बताते है की उनके पिता जी कुतुमं प्रमी सत्य प्रिय और बहुत ही उदल थे. उनका नाम करम चन्द्र था. गाँधी जी रिश्वत से दूर भागते थे. इसलिए हम हमेशा निश्पक्ष न्याय करते थे. वे राज्य के प्रति बड़े बफादार थे. वे पोरबंदर रियासत में मंत्री थे.

गाँधी जी एक महान राजनितिक, स्वंत्रता सेनानी समाज सेवक चिन्तकएवं एक उच्च कोटि के शिक्षाशात्री थे. उनका दृण विश्वास था की शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है. जिससे भारतीय समाज उन्नति कर सकता है.

स्वंत्रता संग्राम में अंग्रेजी शासको से अहिंसात्मक तरीके से संघर्ष करा. उन्होंने सिक्षा के भिन्न पक्षों पर गहन चिंतन किया और शिक्षा पर उनके पुस्तके भी लिखी देश के प्रमुख शिक्षाविदों में गाँधी जी का नाम भी शामिल है. गाँधी जी के शिक्षा सबंधी विचार विभिन्न पक्षों पर एक प्रकार है.

गाँधी जी ने स्पष्ट रूप से व्यक्त किया की शिक्षा से मेरा तात्पर्य वालक तथा मनुष्य के शारीरिक मानसिक तथा आत्मा के भीतर विद्धमान गुणों का सब प्रकार से सर्वोत्तम विकास करना है. उन्होंने बार बार इस बात पर बल दिया की साक्षरता न शिक्षा का अंत है, और न आरम्भ यह केवल एक साधन है. जिससे व्यक्ति को शिक्षित किया जाता है.

गाँधी जी ने अपने शिक्षा दर्शन में बुनियादी शिक्षा की बात कही है, जिसका अर्थ है जीवन की बुनियादी जरुरतो से जुडी शिक्षा. गाँधी जी एक शिक्षा दर्शन उनके दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड और इंडिया में मिले अनुभव परआधारित है. गाँधी जी सर्वोदय अर्थात सबका हर तरह से कल्याण हो इस बात को हमेशा ही महत्व देते थे.

उन्होंने श्रम के प्रति उचित नजरिया पैदा करना ही शिक्षा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य माना और उनका मानना था. की शिक्षा का लक्ष्य समाज को संगठित करना तथा श्रम के प्रति उचित्र दृष्टिकोण पैदा करना होना चाहिए.

महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गए आंदोलन – Biography On Mahatma Gandhi In Hindi

महात्मा गाँधी द्वारा चलये गए आंदोलन और महात्मा गाँधी जी भारत में कोन कोन से आंदोलन चलाये इसके बारे में आपको बतायेगे और इन आंदोलन से हमे क्या लाभ हुआ है. और ये आंदोलन हमारे लिए क्यों आवश्यक थे. और इन आंदोलन में गाँधी जी ने क्या – क्या किया.

असहयोग आंदोलन.

असहयोग आंदोलन महातम गाँधी जी के द्वारा चलाया गया प्रथम आंदोलन था. यह आंदोलन  1920 में महात्मा गाँधी तथा भारतीय रास्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में चलाया गया था. इस आंदोलन से भारत की स्वनात्रता आंदोलन को नई जाग्रति मिली महात्मा गाँधी जी का मन्ना था. की ब्रिटिश सरकार के हाथो से जनता को न्याय मिलना अशंभव था. इसलिए असहयोग आंदोलन की शुरुआत की

नमक सत्याग्रह.

यह आंदोलन महात्मा गाँधी जी के द्वारा चलाया गया दूसरा आंदोलन था. और यह आंदोलन उन सभी आंदोलन में से चलाया गया सबसे महत्वपूर्ण आंदोलन था. इस आंदोलन में महत्मा गाँधी जी ने 12 मार्च 1930 में अहमदाबाद में स्थित साबरमती आश्रम है.जहाँ 24 दिनों का पैदल मार्च दांडी गाव तक निकला था. और यह मार्च उन्होंने ब्रिटिश सरकार से नमक के एक अधिकार के खिलाफ निकला था.

दलित आंदोलन.

यह आंदोलन गाँधी जी द्वारा चलाया गया तीसरा आंदोलन था. और इस आंदोलन में छुआ छूत का बिरोध किया है. महात्मा गाँधी जी ने 1933, 8 मई को छुआ छूत के बिरोध आंदोलन की सुरुआत की थी. अखिल भारतीय छुआ छुट विरोध लीग की स्थापना जबकि 1932 में कर दी गयी थी.

भारत छोडो आंदोलन.

यह आंदोलन गाँधी जी द्वारा चलाया गया चौथा आंदोलन था. गाँधी जी ने यह आंदोलन 1942 अगस्त में (भारत छोडो आंदोलन ) शुरुआत की तथा अंग्रेजो को भारत छोड़ कर जाने के लिए मजबूर करने के लिए ( करो या मरो समोहिक नागरिक अवज्ञा आंदोलन)शुरू करने का निर्णय लिया.

चंपारण सत्याग्रह.

यह आंदोलन गाँधी जी द्वारा चलाया गया पाचवां आंदोलन था. यह आंदोलन भारत का पहला नागरिक अवज्ञा अधोलन था. जो की बिहार के चम्पारण जिले में मतात्मा गाँधी की अगुबाई में 1917 को आरंभ हुआ था. इस आंदोलन से महात्मा गाँधी ने लोगो में विरोध को सत्य गृह के माध्यम से लागु करने की पहली कोसिस की जो ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आम जनता के अहिंसक प्रतिरोध पर अधार था

महात्मा गाँधी जी का विवाह.

महात्मा गाँधी जी के अनमोल विचार – Biography On Mahatma Gandhi In Hindi

  • मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन।
  • निर्मल अन्तःकरण को जो प्रतीत हो, वही सत्य है।
  • भूल करने में पाप तो है ही, परंतु उसे छुपाने में उससे भी बड़ा पाप है।
  • भविष्य में क्या होगा, मैं यह नहीं सोचना चाहता। मुझे वर्तमान की चिंता है। ईश्वर ने मुझे आने वाले क्षणों पर कोई नियंत्रण नहीं दिया है।
  • मैं हिन्दी के जरिए प्रांतीय भाषाओं को दबाना नहीं चाहता, किंतु उनके साथ हिन्दी को भी मिला देना चाहता हूं।
  • अपनी गलती को स्वीकारना झाडू लगाने के समान है, जो धरातल की सतह को चमकदार और साफ कर देती है।
  • केवल प्रसन्नता ही एकमात्र इत्र है जिसे आप दूसरों पर छिड़कें तो उसकी कुछ बूंदें अवश्य ही आप पर भी पड़ती हैं।
  • जो समय बचाते हैं, वे धन बचाते हैं और बचाया हुआ धन, कमाए हुए धन के बराबर है।
  • व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।
  • काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है।
  • गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती है। वह तो केवल अपनी खुशी बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है।
  • हम जिसकी पूजा करते हैं, उसी के समान हो जाते हैं।
  • श्रद्धा का अर्थ है आत्मविश्वास और आत्मविश्वास का अर्थ है ईश्वर में विश्वास।
  • कुछ लोग सफलता के केवल सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।
  • सुख बाहर से मिलने की चीज नहीं, मगर अहंकार छोड़े बगैर इसकी प्राप्ति भी होने वाली नहीं। अन्य से पृथक रखने का प्रयास करें।
  • अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
  • जिस दिन प्रेम की शक्ति, शक्ति के प्रति प्रेम पर हावी हो जाएगी, दुनिया में अमन आ जाएगा।
  • कुछ करने में या तो उसे प्रेम से करें या उसे कभी करें ही नहीं।
  • दुनिया में ऐसे लोग हैं, जो इतने भूखे हैं कि भगवान उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता सिवाय रोटी के रूप में।
  • चिंता से अधिक कुछ और शरीर को इतना बर्बाद नहीं करता और वह जिसे ईश्वर में थोड़ा भी यकीन है उसेकिसी भी चीज के बारे में चिंता करने पर शर्मिंदा होना चाहिए।
  • प्रेम दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है और फिर भी हम जिसकी कल्पना कर सकते हैं उसमें सबसे नम्र है।
  • स्वयं को जानने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है स्वयं को औरों की सेवा में डुबो देना।
  • आप तब तक यह नहीं समझ पाते कि आपके लिए कौन महत्वपूर्ण है, जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते।
  • प्रेम की शक्ति दंड की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है।
  • जब तक गलती करने की स्वतंत्रता न हो, तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है।
  • जो भी चाहे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन सकता है। वह सबके भीतर है।
  • पाप से घृणा करो, पापी से प्रेम करो।

महात्मा गाँधी जी की म्रत्यु कम हुई और कैसे हुई.

रास्त्रपति महात्मा गाँधी के दिल्ली के विरला हाउस ( 30 जनवरी , 1948 ) को शाम 5:17 मिनट पर महात्मा गाँधी की हत्या कर दी गयी थी. गाँधी जी प्राथना सभा को सम्भोधित करने जा रहे थे. तब नाथूराम गोडसे जो उनका हत्यारा था. उसने गाँधी जी के साइन में 3 गोलिया दाग दी थी.

लोगो का मानना है. की  (हे राम) शब्द उनके मुह से निकलने वाला अंतिम शब्द था.और नाथूराम गोडसे और उसके साथी यो पर मुकदमा चलाया गया. 1949 में उन्हें मौत की सजा सुने गयी थी.

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Dear Students, मैं आशा करती हूँ की आपको Biography On Mahatma Gandhi In Hindi – महात्मा गांधी का जीवन परिचय को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Biography On Mahatma Gandhi In Hindi के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस Biography On Mahatma Gandhi In Hindi से related कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

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