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Biography On Albert Einstein In Hindi – अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय

Biography On Albert Einstein In Hindi - अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय hindividhya

Biography On Albert Einstein In Hindi – अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय.

मेरे प्रिय दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे Biography On Albert Einstein In Hindi यानि कि अल्बर्ट आइंस्टीन की जीवनी के बारे में। और पढ़ेंगे अल्बर्ट आइंस्टीन कौन थे।अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म कब और कहाँ हुआ।

एक विश्व प्रशिद्ध भौतिक विज्ञान के वैज्ञानिक जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अनगिनत अविष्कार किये। किस तरह अल्बर्ट आइंस्टीन ने द्रवमान की प्रमेय का मान ज्ञात किया। अल्बर्ट आइंस्टीन ने किस तरह सापेक्षता का सिद्धांत की रचना की। अगर आप अल्बर्ट आइंस्टीन की इन सभी बातों के बारे में जानना चाहते हैं। तो आप पढ़ते रहिये हमारी Biography On Albert Einstein In Hindi – अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय की पोस्ट को।

Biography On Albert Einstein In Hindi – अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय

अल्बर्ट आइंस्टीन के पुरे जीवन को निम्र बिन्दुओ में दर्शाया गया है.

  • अल्बर्ट आइंस्टीन कौन थे?
  • अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय – Biography On Albert Einstein In Hindi
  • अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म कब और कहाँ हुआ
  • अल्बर्ट आइंस्टीन का संक्षिप्त जीवन परिचय – Biography On Albert Einstein In Hindi
  • अल्बर्ट आइंस्टीन का बचपन और शिक्षा
  • अल्बर्ट आइन्स्टीन का व्यक्तिगत जीवन
  • अल्बर्ट आइंस्टीन का वैज्ञानिक करियर और उनकी खोज
  • महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के पुरुस्कार
  • अल्बर्ट आइंस्टीन के महत्वपूर्ण तथ्य
  • अल्बर्ट आइंस्टीन के अविष्कार
  • रबीन्द्रनाथ ठाकुर से मुलाकात
  • अल्बर्ट आइंस्टीन के अनमोल विचार
  • अल्बर्ट आइंस्टीन की रोचक बातें

अल्बर्ट आइंस्टीन को E = mc2 द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण के लिए जाना जाता है। अल्बर्ट आइंस्टीन को प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन की खोज के लिए नॉवल पुरुस्कार दिया गया था।

उन्होंने अपने सापेक्षता के सिद्धांत (Theory of Relativity) से ब्रह्मांड के नियमों को समझाया। की ब्रह्माण्ड किस प्रकार चलता है। अल्बर्ट आइंस्टीन के इस सिद्धांत ने विज्ञान की दुनिया को बदल कर रख दिया। आइंस्टीन जितने बड़े वैज्ञानिक थे, उतने ही बड़े दार्शनिक भी थे।

अल्बर्ट आइंस्टीन के सिद्धांत विज्ञान की दुनिया के अलावा आम जिंदगी में भी कई जगह सही साबित होते हैं और लोग आज उन्हें अपने जीवन में उतारने की कोशिश भी करते है।

अल्बर्ट आइंस्टीन का संक्षिप्त जीवन परिचय – Biography On Albert Einstein In Hindi

क्रम संख्या  बिंदु परिचय
1 नाम अल्बर्ट आइंस्टीन
2 जन्म 14 मार्च 1879 उल्म, वुर्ट्टनबर्ग, जर्मन साम्राज्य
3 मृत्यु 18 अप्रैल 1955 (उम्र 76) प्रिंस्टन, न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य
4 पिता का नाम हेर्मन्न आइंस्टीन
5 माता का नाम पौलिन कोच
6 जातीयता यहूदी
7 विवाह मरिअक (पहली पत्नी), एलिसा लोवेन्न थाल (दूसरी पत्नी)
8 बेटे-बेटी हैंश अल्बर्ट आइंस्टीन, लिजरल मॉरिस, एडुअर्ड आइंस्टीन
9 कार्य भौतिकी
10 दशिक्षा स्विट्ज़रलैंड, ज्यूरिच पॉलीटेक्निकल अकादमी
11 पुरस्कार भौतिकी का नॉबल पुरस्कार, मत्तयूक्की मैडल, कोपले मैडल, मैक्स प्लांक मैडल, शताब्दी के टाइम पर्सन

अल्बर्ट आइंस्टीन कौन थे?

वह एक ऐसे साधारण व्यक्ति जो अपने सर पर बड़े बाल, बदन पर घिसी हुयी चमड़े की जैकेट, बिना मोज़े के जूते पहनत थे। ऐसे शख्स जिसकी यादाश्त इतनी नहीं थी की वह तारिख दिन किसी व्यक्ति का नाम, और फ़ोन नंबर याद रख सके। यह अल्बर्ट आइंस्टीन के उच्चकोटि के भौतिकी वैज्ञानिक थे।

जिन्होंने प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन की खोज की जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार भी दिया गया। 1999 में इन्हे टाइम पत्रिका ने शताब्दी-पुरूष घोषित किया था। अल्बर्ट आइंस्टीन जी ने विश्व को क्रन्तिकारी सिद्धांत दिए। उनके अविष्कारों के सामने हिमालय भी बोना पद जाता है।

अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) का जन्म एक साधारण यहूदी परिवार में हुआ था। इनके पिता बिजली के सामान का छोटा-सा कारखाना चलाते थे। मां घर का कामकाज करती थी।

अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च सन 1879 को जर्मनी के उल्म शहर में हुआ था। अल्बर्ट आइंस्टीन एक वुटेमबर्ग के एक यहूदी परिवार में पैदा हुए थे। इनके पिता का नाम हेर्मन्न आइंस्टीन था जो की एक इलेक्ट्रिक इंजीनियर थे। इनकी माता का नाम पौलिन कोच था।

वर्ष 1880 में वह अपने परिवार के साथ म्यूनिख शहर चले गए। यहां इनके पिता और चाचा ने एलेक्ट्रोटेकचिनस्के फैब्रिक ज. आइंस्टीन एंड कम्पनी के नाम से एक फर्म खोल ली।और यहीं पर उन्होंने अपने परिवार के साथ काम भी किया।

Biography On Albert Einstein In Hindi – अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय

अल्बर्ट आइंस्टीन ने 50 से अधिक विज्ञान की पुस्तकें और 300 से अधिक पत्रिकाएं लिखी हैं। जिसमे उन्होंने अपने पूरे जीवन और अपने अविष्कारों के बारे में लिखा है।

अल्बर्ट आइंस्टीन का बचपन और शिक्षा

जर्मनी के म्युनिच शहर में ही वह पले बड़े। उनकी आरम्भिक शिक्षा की शुरुआत भी इसी शहर से हुयी। वह बचपन में पढ़ाई और लिखाई में बहुत कमजोर थे। उनके शिक्षक उन्हें पागल और ठस बुद्धि भी कहते थे।

उनके पिता जी ने यह जानकारी थी कि वह 9 साल की उम्र में पहली बार बोले थे। वह प्रकृति को सदैव मंत्रमुग्ध होकर देखा करते थे। वह ज्यादातर अपना समय कम्पास और सारंगी के साथ बिताया करते थे। उन्होंने अपनी 6 वर्ष आयु से सारंगी वजाना स्टार्ट कर दिया था और अपनी मृत्यु के अंतिम समय तक बजाया था।

उन्होंने 12 वर्ष की उम्र में ज्यामिति की खोज की थी और उसका परिणाम बिलकुल सही निकला था। 16 वर्ष की उम्र में वे गणित की बड़ी से बड़ी समस्याओं को हल करते थे।

1895 में, 16 साल की उम्र में, आइंस्टीन ने ज़्यूरिख में स्विस फ़ेडरल पॉलिटेक्निक स्कूल के लिए प्रवेश परीक्षा दी। वह परीक्षा के सामान्य भाग में आवश्यक अंक प्राप्त करने में असफल हो गए। लेकिन भौतिकी और गणित में उन्होंने बहुत ही अच्छा ग्रेड प्राप्त किया था।

पॉलिटेक्निक स्कूल के प्रिंसिपल की सलाह पर, उन्होंने 1895 और 1896 में स्विट्जरलैंड के आरौ में आर्गोवियन केंटोनल स्कूल अपनी माध्यमिक स्कूली शिक्षा पूरी करने के लिए भाग लिया। प्रोफेसर जोस्ट विंटेलर के परिवार के साथ रहने के दौरान, उन्हें विंटेलर की बेटी, मैरी से प्यार हो गया।

सन 1900 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने फ़ेडरल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी विद्यालय से ग्रेजुएशन की परीक्षा बहुत ही अच्छे अंकों से उत्त्रीण की। इस दौरान उनसे उनके एक अध्यापक खिलाफ हो गए उंनका कहना था की अल्बर्ट आइंस्टीन युसूअल युनिवर्सिटी असिस्टेंटशिप पद के लिए काबिल नही है। 26 साल की उम्र में उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और अपना पहला क्रांतिकारी विज्ञान सम्बन्धी दस्तावेज लिखा।

अल्बर्ट आइन्स्टीन का व्यक्तिगत जीवन

अल्बर्ट आइंस्टीन वैज्ञानिक होने के साथ साथ एक बहुत ही रोमेंटिक व्यक्ति थे। पहली वार उन्हें अपने अध्यापक की बेटी मैरी से प्यार हुआ था। अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी पहली शादी मारीक से जनवरी 1903 में की। मई 1904 में, उनके बड़े बेटे हंस अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म स्विट्जरलैंड के बर्न शहर में हुआ था। ओर उनके छोटे बेटे एडुअर्ड का जन्म जुलाई 1910 में ज़्यूरिख़ में हुआ था।

आइंस्टीन ने 1919 में एल्सा लोवेनथल से दूसरी शादी की, वहां से दोनों 1933 में संयुक्त राज्य अमेरिका में आ गए। 1935 में एलसा को हृदय और गुर्दे की समस्याओं का पता चला और दिसंबर 1936 में उनकी मृत्यु हो गई। इन दोनों की शादी से एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम लिजरल मोरिस रखा गया।

अल्बर्ट आइंस्टीन का वैज्ञानिक करियर और उनकी खोज

अपने पूरे जीवनकाल में, अल्बर्ट आइंस्टीन ने सैकड़ों किताबें औरपत्रिकाएं और अपने लेख प्रकाशित किये। इन्ही लेखों की वजह से वह इतने प्रसिद्ध हुए। सन 1909 में बर्न युनिवर्सिटी में लेक्चरर की जॉब के बाद सन 1920 में आइंस्टीन ने हॉलैंड में लेइदेन की युनिवर्सिटी में अध्यापन का कार्य भी किया।

वह दो साल बाद क्ज़ेकोस्लोवाकिया के प्राग शहर में जर्मन युनिवर्सिटी में प्राध्यापक के लिए चुने गए। साथ ही 6 महीने के अंदर ही फ़ेडरल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में प्राध्यापक बन गए। सन 1913 में जाने माने वैज्ञानिक मैक्स प्लांक और वाल्थेर नेर्न्स्ट ज्यूरिक आये और उन्होंने आइंस्टीन को जर्मनी में बर्लिन की युनिवर्सिटी में एक फायदेमंद अनुसंधान प्राध्यापकी के लिए प्रोत्साहित किया और उन्होंने विज्ञान की प्रुस्सियन अकादमी की पूरी मेम्बरशिप भी दी।

अल्बर्ट आइंस्टीन खुद के काम के अलावा दूसरे वैज्ञानिकों के साथ भी सहयोग करते थे, जिनमे बोस आइंस्टीन के आँकड़े, आइंस्टीन रेफ्रिजरेटर और अन्य कई आदि शामिल हैं। 1933 में उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स की ट्रिप की थी जो उन्हें किसी कार्य को करने के दौरान फ्री में मिली थी।

अल्बर्ट आइंस्टीन के अविष्कार

अल्बर्ट आइंस्टीन को तो पूरा जीवन ही कुछ न कुछ अविष्कार करते ही निकला है। उन्होंने अपने जीवन काल में इतनी प्रशिद्धि ही अविष्कारों से प्राप्त की। उनके नए नए अविष्कारों के लिए हे उन्हें विश्व के महान वैज्ञानिकों में गिना जाता है। उनके अविष्कार कुछ इस प्रकार हैं।

सापेक्षता के सिद्धांत और E=mc²

अल्बर्ट आइंस्टीन ने 30 जून 1905 क सापेक्षता के सिद्धांत और E=mc² को पूर्ण किया। यही आइंस्टीन के सापेक्षता के विशेष सिद्धांत के रूप में जाना जानता है। आइंस्टीन ने द्रव्यमान और ऊर्जा के बीच एक समीकरण प्रमाणित किया, उसको आज नुक्लेअर ऊर्जा कहते है।

उष्मागति और अस्थिरता

सन 1900 में ओनालेनडर फिजिक को प्रस्तुत किया था। यह अल्बर्ट आइन्स्टीन का पहला शोध-पत्र था। यह 1901 में केशिक्तव घटना की व्याख्या से निष्कर्ष शीर्षक के साथ प्रकाशित किया गया हैं, जिसमे पता चलता हैं कि अणुओं की उपस्तिथि हेतु ब्राउनियन गति को ठोस सबूत की तरह उपयोग किया जाता हैं। 1903 और 1904 में उनका शोध मुख्य रूप से प्रसार घटना पर परिमित परमाणु आकार का असर पर सम्बन्धित हैं।

आसमान नीला होता है –

यह एक बहुत ही आसान सी बात है की आसमान नीला होता है। परन्तु इसे परिणाम के साथ अपनी दलीलों को अल्बर्ट आइंस्टीन ने साबित किया। और उन्होंने बताया की आसमान का रंग नीला होने की बजह से हमें पानी का रंग भी नीला दिखाई देता है। जबकि पानी रंगहीन होता है।

प्रकाश की क्वांटम थ्योरी-

अल्बर्ट आइंस्टीन की प्रकाश की क्वांटम थ्योरी में उन्होंने ऊर्जा की छोटी थैली को फोटान कहा है। और तंरंगों की विशेषता बताई है। इनके अनुसार धातुओ में से इलेक्ट्रान निकलते है और वो फोटो इलेक्ट्रिक इफेक्ट की रचना करते है। इसी थ्योरी के आधार पर टेलीविजन की खोज भी हुई।

तरंग-कण द्वैतवाद – 

इस सिद्धांत के अनुसार पदार्थ में उपस्थित परमाणु तरंग तथा कण दोनों की ही भांति व्यवहार करते है। अल्बर्ट आइंस्टीन का इस विषय में बहुत बड़ा योगदान रहा है।

स्पेशल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी –

अल्बर्ट आइंस्टीन ने इस थेओरम में समय और गति के सम्बन्ध को समझाया है। की किस तरह समय और गति आपस करते है। किस प्रकार यह चलते हैं। किस प्रकार इनका मान ज्ञात किया जाता है। ब्रम्हांड में प्रकाश की गति को निरंतर और प्रक्रति के नियम के अनुसार बताया है.

जनरल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी –

अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रस्तावित किया कि गुरुत्वाकर्षण स्पेस – टाइम कोंटीनूम में कर्व क्षेत्र है, जोकि द्रव्यमान के होने को बताता है।

चाल कोण –

1910 के दशक के समय अलग-अलग तरीकों से क्वन्तक यांत्रिकी के दायरे में लाने के लिये इसका विस्तार हुआ। अर्नेट रदरफोर्ड के नाभिक की खोज और यह प्रस्ताव के बाद की इलेक्ट्रोन ग्रहों की तरह कक्षा में घूमते हैं। नील्स बोह यह दिखाने में सक्षम हुए कि प्लैंक द्वारा शुरू और आइन्स्टीन द्वारा विकसित क्वान्तक यांत्रिक के द्वारा तत्वों के परमाणुओं में इलेक्ट्रानों की असतत गति और तत्वों की आवर्त सारणी को समझाया जा सकता हैं।

इस तरह अल्बर्ट आइंस्टीन ने बहुत से अविष्कार किये जिसके लिए उन्हें विश्व में पहचाना जाता है।

रबीन्द्रनाथ ठाकुर से मुलाकात

15 जुलाई सन् 1930 को बर्लिन में अल्बर्ट आइंस्टीन की मुलाकात भारत के महान साहित्यकार, रहस्यविद् व नोबेल पुरुस्कार विजेता गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर से हुई।

पश्चिम की तार्किक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले एक अपने समय के महान वैज्ञानिक और पूर्व की धार्मिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले एक महान विचारक एवं भक्त कवि की इस मुलाकात और उनके बीच हुए संवाद को इतिहास की एक अनूठी विरासत माना जाता है।

अल्बर्ट आइंस्टीन के पुरुस्कार

आइंस्टीन ने अपने जीवन में कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए। उन्होने इतने अविष्कार किये की उन्हें इस संसार ने अमर होने का पुरूस्कार प्रदान किया। वह मर कर भी आज विज्ञानं के क्षेत्र में अमर हैं। उन्होंने अनगिनत भौतिकी अविष्कार किये।

1922 में उन्हें भौतिकी में “सैद्धांतिक भौतिकी के लिए अपनी सेवाओं, और विशेषकर प्रकाशवैधुत प्रभाव की खोज के लिए” नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1922 में आइंस्टीन को इससे सम्मानित किया गया। कोप्ले पदक, मैक्स पैलांक पदक, शताब्दी के महान पुरुष का भी पुरूस्कार भी 1999 दिया गया।

अल्बर्ट आइंस्टीन के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

आइंस्टीन ने विज्ञान के नियमों को समझाते हुए कई बार सफलता, असफलता, कल्पना और ज्ञान के बारे में कई ऐसी बातें कही हैं, जि‍नके आधार पर कठिनाइयों को पार कर सफलता की राह पर बढ़ा जा सकता है।

अल्बर्ट आइंस्टीन भगवान् पर विश्वाश रखते हुए खुद को संशयवादी कहते थे, वह बोलते थे की मैं नास्तिक नहीं हूँ।

आइंस्टीन सफलता प्राप्त करने के लिए “अभ्यास” को अपना गुरुमंत्र मानते थे।

अल्बर्ट आइंस्टीन के पास गाडी नहीं थी और इसी कारण से वह गाड़ी चलाना नहीं सीखते थे।

अल्बर्ट आइंस्टीन आँखों को आज भी एक अँधेरे डिब्बे में सुरक्षित रखा गया है।

मरने के बाद अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग के टुकड़े किये गए और उन पर कई डॉक्टर्स ने रिसर्च भी की।

अल्बर्ट आइंस्टीन इतने महान वज्ञानिक होने के बाद भी किसी का नाम और नंबर याद नहीं रखते है। कहते थे की मेरी याददाश बहुत कमजोर है। मैं हर बात लिखता हूँ।

अल्बर्ट आइंस्टीन परीक्षा में अक्सर फेल हुआ करते थे।

डॉ एपीजे अब्दुल कलम की तरह अल्बर्ट आइंस्टीन को भी राष्ट्रपति पद का अवसर मिला।

अल्बर्ट आइंस्टीन को नॉबल पुरुस्कार तो मिला परन्तु पुरुस्कार की धनराशि आज तक नहीं मिल पाई।

आइंस्टीन की मृत्यु के बाद एक वैज्ञानिक ने उनके दिमाग को चुरा लिया था। 20 साल बाद उसे वापस दिया।

अल्बर्ट आइंस्टीन पढ़ने लिखने में बचपन से ही कमजोर थे परन्तु उन्होंने अभ्यास करना कभी नहीं छोड़ा।

आइंस्टीन ने 9 वर्ष की उम्र में पहली बार बोले थे सूप बहुत गरम है में इसे जल्दी नहीं पे सकता।

अल्बर्ट आइंस्टीन के अनमोल विचार

सफलता प्राप्त करने का सबसे बड़ा स्रोत अनुभव होता है। सफलता प्राप्त करने के लिए हमें सदैव प्रयास करते रहना चाहिए।

जीवन में हमारे पास वक्त बहुत कम होता है, यदि हम कुछ करना चाहते है तो कार्य को आज और अभी से शुरुआत करनी चाहिए।

अगर आप कोई खेल खेलना चाहते हैं तो सबसे पहले उसके नियमों को सीखें तब आप एक खिलाडी से भी अच्छा खेल पाएंगे।

मेरी समझ में मुर्खता और बुद्धिमता में मात्र एक फर्क होता है, कि बुद्धिमता की एक सीमा होती है और मुर्खता के कार्य की कोई सीमा नहीं होती है। इसलिये हमें मूर्ख बनकर सीखना चाहिए।

जो अपनी मंजिल को जानता है वही उसे हांसिल कर पता है।

जीवन में सफलता के साथ जीने के लिए सिर्फ दो ही तरीके हैं। पहला की हम यह मान ले कि कुछ भी चमत्कार नहीं होता। दूसरा ये कि सब कुछ चमत्कार होता है परन्तु बिना किये चमत्कार भी नहीं होता।

अगर आप प्रकृति से सीखोगे तो कुछ भी आसानी से समझ पाओगे।

एक ही गलती को बार बार दोहराना और हर बार अलग परिणाम की आशा करना सबसे बड़ी मूर्खता है।

समस्याओं का समाधान वहीं मिलेगा जहां समस्या पैदा हुयी है।

आपके समझदार होने की पहचान आपके ज्ञानवान और चतुर होने से नहीं होती है बल्कि समस्याओं को अच्छी तरह से समाधान करना और सपने देखने की ताकत से होती है।

तर्क वितर्क करने से आप A से B जा पाएंगे जबकि कल्पना करने से आप कहीं भी जा सकते है।

वर्तमान में जियें और कल से सीख लें।

अगर आप सफल होना चाहते हैं तो एक गुरु मंत्र की आदत डाल लें वह है सवाल पूछने की आदत।

अल्बर्ट आइंस्टीन की रोचक बातें – Biography On Albert Einstein In Hindi

अल्बर्ट आइंस्टीन के बारे में ऐसी बहुत से रोचक बातें हैं जिन्हे पढ़कर लोगों को हंसी भी आती है और लोग उनसे कुछ सीखते भी है।

आइंस्टीन और ड्राइवर के साथ एक भाषण के दौरान रोचक घटना

किसी भाषण के दौरान अल्बर्ट आइंस्टीन के गाड़ी के ड्राइवर उनसे कहते हैं की में आपके भाषण इतनी बार सुन चूका हूँ कि लोगों के सामने में आपकी जगह आपका भाषण दे सकता हूँ। अल्बर्ट आइंस्टीन ड्राइवर की बातकर मान आपस कपडे बदल कर ड्राइवर की जगह बैठ जाते हैं।

उनके ड्राइवर ने होंसले के साथ ठीख उसी तरह भाषण दिया जिस जोरदारी के साथ आइंस्टीन देते थे। उसके बाद लोगों ने उनसे प्रश्न पूछना शुरू किया ड्राइवर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ सभी प्रश्नो का जबाब दिया।

परन्तु उन्हें एक प्रश्न का उत्तर नहीं पता था। तो इस पर उन्होंने हंसकर कहा की इस प्रश्न का उत्तर इतना आसान हैं कि इसे तो मेरा ड्राइवर ही बता देगा। और ऐसा कहते हुए उन्होंने ड्राइवर वाले कपडे पहने हुए अल्बर्ट आइंस्टीन को जवाब देने के लिए खड़ा कर दिया और उस प्रश्न का जवाब अल्बर्ट ने दिया।

अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग

जिन्हें हम दुनिया के महान वैज्ञानिकों की श्रेणी में रखते हैं बचपन में उनका दिमाग बहुत धीमा था वह पढ़ाई में बहुत कमजोर थे। अल्बर्ट आइंस्टीन इतने बड़े वैज्ञानिक होने के बाबजूद वह किसी का नाम और फ़ोन नंबर याद नहीं कर पाते थे। कहते हैं की अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग इतना अच्छी तरह से कार्य करता था की वह किसी भी प्रोयग का ब्लूप्रिंट यानि ढांचा अपने दिमाग में ही बना लेते थे।

वह ब्लूप्रिंट किसी लैब के प्रयोग से ज्यादा सही होता था। आइंस्टीन का दिमाग ज्यादा कारगार होने की वजह से उनकी मृत्यु के बाद उनका दिमाग निकाल लिया गया और उनके दिमाग पर प्रयोग किये। इतना ही नहीं उनके दिमाग को एक डॉक्टर ने चुरा लिया था जिसे उसने 20 साल बाद वापस किया था।

अल्बर्ट का दिमाग ही नहीं मृत्यु के बाद उनकी आँखे भी निकाल ली गयीं थी। जो आज भी एक अँधेरे डिब्बे में बंद हैं। जर्मन वैज्ञानिक आइंस्टीन को इज़राईल के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया उन्होंने कहा में विज्ञान के लिए बना हूँ। 1902 में वह एक अवैध संतान के पिता भी बने। अल्बर्ट आइंस्टीन की 1909 और 1919 में दो शादियां हुयी।

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प्रिय दोस्तों, मैं आशा करती हूँ की आपको Biography On Albert Einstein In Hindi – अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Biography On Albert Einstein In Hindi के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय से सम्बंधित कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

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