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Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi – सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय

Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi - सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय

Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi. मेरे प्रिय दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi यानि की सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन परिचय के बारे मैं। और साथ ही साथ पड़ेगे सरदार वल्लभभाई पटेल कौन थे। उन्होंने कैसे इस देश की आजादी में अपनी भूमिका निभायी।

सरदार पटेल जी के जीवन परिचय यानि की Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi मैं हम उनके व्यक्तित्व, उनके द्वारा देश की आजादी के लिए दिया गया बलिदान के बारे में भी जानेगे। किस तरह सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने जीवन का बलिदान देकर देशवासियों में आजादी के लिए क्रांति की एक लहर पैदा कर दी थी।

Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi – सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय

  • Who Was Sardar Vallabhbhai Patel – सरदार वल्लभभाई पटेल कौन थे।
  • Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi – सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय
  • सरदार वल्लभभाई पटेल का प्रारंभिक जीवन
  • सरदार वल्लभभाई पटेल का निजी जीवन
  • वल्लभभाई पटेल की शिक्षा और वकालत की शुरुआत
  • वल्लभभाई पटेल का राजनितिक करियर
  • खेड़ा संघर्ष में वल्लभभाई पटेल की भूमिका
  • बारडोली सत्याग्रह अंदोलन और वलभभाई पटेल को सरदार की उपाधि कैसे मिली
    गांधी, नेहरू और पटेल
  • निगम के अध्यक्ष से लेकर देश के पहले गृहमंत्री बनने तक का सफर
  • सरदार पटेल ने देसी रियासतों को एकीकृत करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
  • सरदार वल्लभभाई पटेल और भारत का विभाजन – भारत बिखरने के लिए नहीं बना
  • वल्लभभाई पटेल को पुरुस्कार और सम्मान
    सरदार वल्लभभाई पटेल के विचार
  • Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi- सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विन्दु
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – Statue of Unity
  • लेखन कार्य एवं प्रकाशित पुस्तकें

सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रमुख व्यक्ति थे, जो बाद में भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और पहले गृह मंत्री बने। यह एक ऐसा नाम है जिसका नाम मात्रा सुनकर अंग्रेजो के पसीने छूट जाया करते थे. जिन्होंने देश की आजादी के लिए और देश के विकाश के लिए अपना पूरा जीवन देश के नाम समर्पण कर दिया।

पटेल जी ने देश के युवानों को एकता के सूत्र में बांधा और देश की सभी छोटी रियासतों को एक करके देश को सुन्दर और मजबूत बनाया। सरदार पटेल की इस पोस्ट में – जिन्हें भारत के लौह पुरुष के रूप में जाना जाता है – हम उनके जीवन, दृष्टि, विचारों, उपाख्यानों और आधुनिक भारत में महत्वपूर्ण योगदान को कवर करते हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल कौन थे

हमारे देश भारत को गुलामी के बेड़ियों से आजादी दिलाने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपना पूरा जीवन समर्पण कर दिया जिन्हे आज हम लोह पुरुष के नाम से भी जानते है। वह भारत के महान स्वतन्रता सेनानीयों में से एक थे। पटेल आजाद भारत के प्रथम गृहमंत्री और प्रथम उपप्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने देश की आजादी के बाद बहुत सारी छोटी और बड़ी रियासतो को भारत में विलय किया था।

बारदोली सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने सरदार की उपाधि प्रदान की। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है।

आज हम जिस, कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले विशाल भारत को देख पाते हैं उसकी कल्पना सरदार वल्लभ भाई पटेल के बिना शायद पूरी नहीं हो पाती, उन्होंने ही देश के छोटे-छोटे रजवाड़ों और राजघरानों को एक कर भारत में सम्मिलित किया। उन्होंने राजा कश्मीर के राजा हरी सिंह से मिलकर कश्मीर को भारत में विलय करने का फैसला लिया और कश्मीर को भारत में मिलाया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय एकता की जब भी बात होती है तो सरदार पटेल का नाम सबसे पहले ध्यान में आता है, उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति, नेतृत्व कौशल और अदम्य साहस का ही कमाल था कि 600 देशी रियासतों का भारतीय संघ में विलय हो सका।

हमारे देश ने उनके श्रण को कुछ काम करने और देश के नोजवानो में देश के प्रति समर्पण के लहार बढ़ाने के लिए पटेल के सम्मान में स्टेचू और यूनिटी के नाम से विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा बनायी गयी. जोकि गुजरात मैं स्थित है।

Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi – सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय

वल्लभभाई झावेरभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को नाडियाद, गुजरात भारत में हुआ था। जिनको लोग आज सरदार वल्लभभाई पटेल या फिर लौहपुरुष के नाम से जानते है। वे एक स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राजनीतिज्ञ थे.

उन्होंने भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री के तोर पर कार्य किये। वे एक भारतीय अधिवक्ता और राजनेता थे, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई और एक एकीकृत किये।

इनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल एवं माता का नाम लाडबा देवी था। इनके पिता रानी लक्ष्मी बाई की सेना में सैनिक थे। ये अपने माता पिता की चौथी संतान थे। बचपन से ही पटेल कड़ी महेनत करते आए थे, बचपन से ही वे परिश्रमी थे। खेती में बचपन से ही पटेल अपने पिता की सहायता करते थे और पेटलाद की एन.के. हाई स्कूल में पढ़ते थे। उन्होंने 1896 में अपनी हाई-स्कूल परीक्षा पास की।

लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। आपको बता दें कि उनके तीन बड़े भाई नरसीभाई, विट्टलभाई और सोमाभाई पटेल और एक बहन थी जिसका नाम दहीबा पटेल था।

वल्लभभाई पटेल की शिक्षा और वकालत की शुरुआत

वल्लभभाई पटेल की शिक्षा की शुरुआत गुजरात से ही हुयी जोकि एक गुजरती माधयम का स्कूल था जहां गुजरती भाषा में पढ़ाया जाता था। उन्हें अपनी बेसिक शिक्षा पूरी करने मैं समय लगा क्योंकि उन्होंने पहले गुजरती माधयम स्कूल से पढ़ाई की बाद उन्होंने अंग्रेजी स्कूल में भी दाखिला लिया और अंग्रजी माधयम से भी पढ़ाई की।

वर्ष 1897 में 22 साल की उम्र में उन्होंने अपनी 10 वीं की परीक्षा उत्त्रीण की। उनका परिवार अत्यंत गरीब था घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन्होंने ने कॉलेज न जाकर घर पर ही पढ़ाई की। और साथ में जिलाधिकारी की परीक्षा की तैयारी भी घर भी करते रहे। उनकी मेहनत और लगन से उन्होंने जिलाधिकारी की परीक्षा मैं सबसे अधिक अंक प्राप्त किये थे।

1910 मैं वह इंग्लैंड गए वहां जाकर उन्होंने लन्दन उनिवेर्सिटी में कानून की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। इस तरह साल 1913 में वल्लभभाई पटेल ने इंस ऑफ कोर्ट से अपनी लॉ की पढ़ाई पूरी की, और इस दौरान उन्होंने सार्वधिक अंक पाकर अपने कॉलेज में टॉप किया।

और कुछ समय बाद उन्होंने इंग्लैंड से भारत लौटने का निस्चय किया और लौटकर उन्होंने गुजरात के गोधरा में अपनी बेरिस्टर की प्रैक्टिस शुरू की। उनकी इस बुद्धिमानी और मेहनत लगन को देखते हुए उन्हें ब्रिटिश सरकार ने कई उच्च पद पर कार्य करने का प्रस्ताव भी दिया परन्तु उन्हीने किसी भी पद को स्वीकार नहीं किया। क्योंकि वे ब्रिटिश कानूनों को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे और उसके सख्त विरोधी थे, इसलिए उन्होंने अंग्रेजों के साथ काम करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

सरदार वल्लभभाई पटेल का राजनितिक जीवन – Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi

सरदार वल्लभभाई पटेल आजाद भारत के उप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बनाने वाले पहले व्यक्ति थे। उनके द्वारा भारत को आजादी दिलाने के लिए किये गए कार्यों की वजह से उन्हें मरणोपरान्त वर्ष 1991 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। यह अवार्ड उनके पौत्र विपिनभाई पटेल द्वारा स्वीकार किया गया। सरदार पटेल जी के सम्मान में अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नामकरण सरदार वल्लभभाई पटेल अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है।

पटेल की 137वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर, 2013 को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा ज़िले में सरदार पटेल के स्मारक का शिलान्यास किया।इसका नाम ‘एकता की मूर्ति’ (स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी) रखा गया है। सरदार पटेल की यादों को ताजा रखने के लिए अहमदाबाद के शाहीबाग में सरदार बल्लभ भाई पटेल मेमोरिल सोसाइटी में सरदार पटेल का थ्री डी संग्राहालय तैयार किया गया है।

सरदार बल्लभभाई पटेल नवम्बर 1917 में पहली बार गाँधी जी से सीधे संपर्क में आये। और उन्होने 1918 में अहमदाबाद जिले में अकाल राहत का बहुत व्यवस्थित ढंग से प्रबंधन किया। जितने भी बाढ़ से पीड़ित लोग थे उनके आराम और खाने की वव्यस्था भी उन्होंने ही की थी। 1918 में ही सरकार द्वारा अकाल प्रभावित खेड़ा जिले में वसूले जा रहे लैंड रेवेन्यु के विरुद्ध “No-Tax” आन्दोलन का सफल नेतृत्व कर वसूली को माफ़ करवाया.

गुजरात सभा को 1919 में गुजरात सूबे की काग्रेस कमिटी में परिवर्तित कर दिया जिसके सचिव पटेल तथा अध्यक्ष महात्मा गाँधी बने।  1920 के असहयोग आन्दोलन में सरदार पटेल ने स्वदेशी खादी, धोती, कुर्ता और चप्पल अपनाये तथा विदेशी कपड़ो की होली जलाई। इसके बाद उन्होंने अहमदाबाद मुन्सिपल चुनाव जीता और चुनाव में अच्छी जीत हांसिल करने के बाद तिलक स्वराज फण्ड के लिए 10 लाख रुपये एकत्रित किये।

पटेल जी को आजादी लड़ाई के कारण कई बार जेल जाना आना पड़ा। हालांकि जिस चीज के लिए इतिहासकार हमेशा सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में जानने के लिए इच्छुक रहते हैं, वह थी उनकी और जवाहरलाल नेहरू की प्रतिस्पर्द्धा। सब जानते हैं कि 1929 के लाहौर अधिवेशन में सरदार पटेल ही गाँधी जी के बाद दूसरे सबसे प्रबल दावेदार थे, किन्तु मुस्लिमों के प्रति सरदार पटेल की हठधर्मिता की वजह से गाँधीजी ने उनसे उनका नाम वापस दिलवा दिया।

1945-1946 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए भी पटेल एक प्रमुख उम्मीदवार थे, लेकिन इस बार भी गाँधीजी के नेहरू प्रेम ने उन्हें अध्यक्ष नहीं बनने दिया। कई इतिहासकार यहाँ तक मानते हैं कि यदि सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनने दिया गया होता तो चीन और पाकिस्तान के युद्ध में भारत को पूर्ण विजय मिलती, परंतु गाँधीजी के जगजाहिर नेहरू प्रेम ने उन्हें प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया।

गाँधी जी से प्रभावित सरदार वल्लभभाई पटेल

सरदार वल्लभ भाई पटेल जब इंग्लैंड से लौटकर गुजरात आये तो उन्होंने गुजरात का एक क्लब ज्वाइन किया जहां उन्होंने ने गाँधी जी का एक भाषण सुना जिसके बाद वे गांधी जी के विचारों से काफी प्रभावित हुए, और इसके बाद उन्होंने करिश्माई नेता गांधी जी के कट्टर अनुयायी बनने का फैसला लिया।

महात्मा गाँधी के प्रति सरदार वल्लभभाई पटेल की एक अटूट श्रद्धा थी। गाँधीजी की हत्या से कुछ क्षण पहले निजी रूप से उनसे बात करने वाले पटेल अंतिम व्यक्ति थे। उन्होंने सुरक्षा में चूक को गृह मंत्री होने के नाते अपनी ग़लती माना। उनकी हत्या के सदमे से वे उबर नहीं पाये। गाँधीजी की मृत्यु के दो महीने के भीतर ही पटेल को दिल का दौरा पड़ा था।

सरदार पटेल ने देसी रियासतों को एकीकृत करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. नेहरू व प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल बने थे। लोगो का मानना है की दोनों में जमीन आसमान का अंतर था। वैसे तो दोनों ही पेशे से वकील थे दोनों के पास इंग्लैण से बैरिस्टरी की डिग्री थी परन्तु सरदार पटेल वकालत नेहरू जी से बहुत आगे थे। सरदार जी ने कानून की डिग्री में उनिवेर्सिटी टॉप किया था। किसी भी कार्य के लिए नेहरू जबतक सोच पते थे उतने में तो पटेल जी काम ख़तम कर देते थे।

नेहरू शास्त्रों के ज्ञाता थे, पटेल शस्त्रों के पुजारी थे। नेहरू जी शिक्षा का घमंड था परन्तु पटेल जी लेश मात्र भी अहंकार नहीं था। पटेल जी ने खुद स्वम एक बात कहि की “मैंने कला या विज्ञान के विशाल गगन में ऊंची उड़ानें नहीं भरीं। मेरा विकास कच्ची झोपड़ियों में गरीब किसान के खेतों की भूमि और शहरों के गंदे मकानों में हुआ है।” पं॰ नेहरू को गांव की गंदगी, तथा जीवन से चिढ़ थी।

सरदार पटेल की महानतम देन थी 562 छोटी-बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलीनीकरण करके भारतीय एकता का निर्माण करना। इतिहास में अबतक इतना बड़ा एकीकरण किसी नहीं किया है।  एक बार उन्होंने सुना कि बस्तर की रियासत में कच्चे सोने का बड़ा भारी क्षेत्र है और इस भूमि को दीर्घकालिक पट्टे पर हैदराबाद की निजाम सरकार खरीदना चाहती है।

उसी दिन वे परेशान हो उठे। उन्होंने अपना एक थैला उठाया, वी.पी. मेनन को साथ लिया और चल पड़े। उन्होंने वहां के 23 राजाओं से कहा की वहां के, “कुएं के मेढक मत बनो, महासागर में आ जाओ” और इसी तरह उन्होंने छोटी बड़ी 20-20 गावों की रियासतों का एक बहुत ही बड़ा एकीकरण किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल पंजाब आये और पटियाला का खजाना देखा तो खाली था। सरदार पटेल ने फरीदकोट के नक्शे पर अपनी लाल पैंसिल घुमाते हुए केवल इतना पूछा कि “क्या मर्जी है?” राजा कांप उठा। और खजाना भर दिया ऐसे ही उन्होंने आखिर 15 अगस्त 1947 तक केवल तीन रियासतें-कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद छोड़कर सभी रियासतों को भारत में मिला दिया।

बाद मैं  जूनागढ़ को 9 नवम्बर 1947 में मिलाया गया। 13 नवम्बर को सरदार पटेल ने सोमनाथ के भग्न मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, जिसका पंडित जवाहरलाल नेहरू बहुत अधिक विरोध कर रहे थे इसके बाबजूद भी उन्होंने यह मंदिर बनवाया। हैदराबाद को 1948 मैं 4 दिन की पुलिस कार्यवाई के बाद भारत में मिलाया गया।

भारत की सिर्फ एक रियासत कश्मीर जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विलय करने के लिए अपने अधिकार में लिया हुआ था। जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू विलय नहीं कर पाए और मुद्दा संयुक्त राष्ट्र संघ की और जाने लगा। फिर वहां पर जब सरदार वल्लभभाई पटेल पहुंचे तो वहां के राजा हरी सिंह ने वो रियासत भी भारत के नाम कर दी। ये सत्य है की पटेल का 562 रियासतों का एकीकरण विश्व इतिहास का एक आश्चर्य था। महात्मा गाँधी ने सरदार पटेल को खुद लिखा था की “रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे।”

सरदार पटेल की इस चतुराई और बुद्धिमानी का लाभ अगर उस समय लिया जाता तो वर्तमान में सायद बहुत सारी समस्याओं का जन्म ही न हुआ होता। 1950 में भी पटेल जी ने नेहरू को चीन की कपट निति से सावधान रहने को कहा था। और उन्होंने कहा की चीन हमारा दुश्मन है दोस्त नहीं और उन्होंने चीन के व्यवहार को अभद्रतापूर्ण और चीन के पत्रों की भाषा को किसी दोस्त की नहीं, भावी शत्रु की भाषा कहा था।

उन्होंने यह भी लिखा था कि तिब्बत पर चीन का कब्जा नई समस्याओं को जन्म देगा। 1950 में नेपाल के संदर्भ में लिखे पत्रों से भी पं॰ नेहरू सहमत न थे। 1950 में ही गोवा की स्वतंत्रता के संबंध में चली दो घंटे की कैबिनेट बैठक में लम्बी वार्ता सुनने के पश्चात सरदार पटेल ने केवल इतना कहा “क्या हम गोवा जाएंगे, केवल दो घंटे की बात है।” नेहरू इससे बड़े नाराज हुए थे। यदि पटेल की बात मानी गई होती तो 1961 तक गोवा की स्वतंत्रता की प्रतीक्षा न करनी पड़ती।

यदि पटेल के कहने पर चलते तो कश्मीर, चीन, तिब्बत व नेपाल के हालात आज जैसे न होते। पटेल सही मायनों में मनु के शासन की कल्पना थे। उनमें कौटिल्य की कूटनीतिज्ञता तथा महाराज शिवाजी की दूरदर्शिता थी। वे केवल सरदार ही नहीं बल्कि भारतीयों के हृदय के सरदार थे।

खेड़ा संघर्ष में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका

वल्लभ भाई पटेल ने साल 1917 में खेड़ा आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, दरअसल उस दौरान गुजरात का खेड़ा क्षेत्र बुरी तरह सूखे की चपेट में था, ऐसे में किसान अंग्रेजों द्धारा लगाए गए कर देने में समर्थ नहीं थे, जिसके चलते किसानों ने ब्रिटिश सरकार से कर में राहत देने की मांग की थी।

जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधीजी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया। और उन्होंने नो टैक्स कैंपेन नमक आंदोलन चलाया ऐसा कोई भी कार्य नहीं था जिसे सरदार पटेल पूरा न कर सके हो। तो यह ओन्दोलन कैसे रह जाता अन्त में ब्रिटिश सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी। यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी।

बारडोली सत्याग्रह अंदोलन और वलभभाई पटेल को सरदार की उपाधि कैसे मिली

बारडोली सत्याग्रह आंदोलन स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में हुआ एक प्रमुख किसान आंदोलन था। जिसे सरदार पटेल ने चलाया था। क्योंकि उस समय अंग्रेजी सरकार ने किसान के करों पर 30 प्रतिशत वृद्धि कर दी थी जिसका पटेल ने बहुत विरोध किया था। अंग्रजी सरकार ने इस आंदोलन को रोकने के लिए बहुत असफल प्रयास किये।

अंत में अंग्रेजी सरकार ने घुटने तक दिए और विवश होकर किसानो की मांगों को मानना पड़ा। एक न्यायिक अधिकारी ब्लूमफील्ड और एक राजस्व अधिकारी मैक्सवेल ने संपूर्ण मामलों की जांच कर 22 प्रतिशत लगान वृद्धि को गलत ठहराते हुए इसे घटाकर 6.03 प्रतिशत कर दिया था।

इस ओन्दोलन को जीतने के बाद लोग उनसे बहुत प्रभावित हुए और वहां की महिलाओं ने वल्लभभाई पटेल को “सरदार” की उपाधि प्रदान की लोगो ने सरदार पटेल की जय के नारे लगा कर उद्धघोष किया।

किसान संघर्ष एवं राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम के अंर्तसबंधों की व्याख्या बारदोली किसान संघर्ष के संदर्भ में करते हुए गांधीजी ने कहा कि इस तरह का हर संघर्ष, हर कोशिश हमें स्वराज के करीब पहुंचा रही है और हम सबको स्वराज की मंजिल तक पहुंचाने में ये संघर्ष सीधे स्वराज के लिए संघर्ष से कहीं ज्यादा सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

निगम के अध्यक्ष से लेकर देश के पहले गृहमंत्री बनने तक का सफर

सरदार वल्लभभाई की लोकप्रियता उनकी मेहनत और उनके द्वारा किये गए कार्यों के कारण बढ़ती जा रही थी। और इसी लोकप्रियता के कारण वे साल 1922, 1924 और 1927 अहमदाबाद के निगम के अध्यक्ष के तौर पर चुने गए। इसके बाद उन्हें अहमदाबाद और गुजरात कांग्रेस का अध्यक्ष भी बनाया गया।

इस दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा क्योंकि उन दिनों पटेल जी ने आजादी को लेकर कई आंदोलन चला रखे थे। सरदार वलभभाई पटेल की लोकप्रियता इतनी थी की वे प्रधानमंत्री पद के प्रथम उमीदवार थे परन्तु गांधी के प्रेम के कारण और नेहरू की जिद की वजह से झुकना पड़ा। और वह स्वयं उप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बनकर पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बना दिये।

सरदार वल्लभभाई पटेल और भारत का विभाजन – भारत बिखरने के लिए नहीं बना

भारत बिखरने के लिए नहीं बना है यह एक शब्द हमने बहुत सुना है यह तब की है जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत विभाजन की बात सुनी तो उन्हें क्रोध आया और गुस्से में “बोले भारत भिखरने के लिए नहीं बना है।” मुस्लिम लीग क नेता मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व की अलगावादी पार्टी आजादी से पहले ही दंगा भड़काने लगी थी। क्यंकि जिन्ना चाहते थे की वे देश के प्रधानमंत्री बने। जबकि पटेल खुद बड़े दावेदार होने के बाबजूद उन्होंने इस पद का त्याग नेहरू के लिए किया।

इस बात को जिन्ना नहीं माने और भारत को दो हिस्से में बाटने के लिए आंदोलन करने लगे। उन्होंने भारत में हिन्दू और पाकिस्तान को अलग करके मुस्लिम देश बनाने के लिए अंग्रेजी सरकार से सिफारिश कर दी इस तरह अंत मैं इस समस्या का समाधान के लिएपटेल ने दिसंबर 1946 में एक सिविल वर्कर वी.पी मेनन के साथ काम किया और फिर विभाजन परिषद पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल की निधन

सरदार पटेल के करीब रहने वाले लोगो की माने तो साल 1950 से ही सरदार पटेल की तबीयत ख़राब रहने लगी थी। 2 नवंबर 1950 को उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गयी थी की वह काफी दिनों तक अपने विस्तारों से उठ भी नहीं पाए थे। इसके बाद गाँधी जी की मृत्यु हुए उनकी मृत्यु से उन्हें गहरा सदमा लगा और 15 दिसंबर साल 1950 में उन्हें हार्ट अटैक आया जिसके चलके इस महान आत्मा का निधन हो गया।

वल्लभभाई पटेल को पुरुस्कार और सम्मान

अगर हम बात करे पटेल जी के सम्मान की तो सरदार वल्लभभाई पटेल को उनके द्वारा किये गए कार्यों इस सदैव सम्मान ही दिया गया है। उन्होंने पूरे देशवासियों का दिल जीता है। साल 1991 में मरणोपरांत उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। वहीं उनके जन्मदिन 31 अक्टूबर को साल 2014 में राष्ट्रीय एकता दिवस के रुप में घोषित कर दिया गया।

भारत सरकार ने 31 अक्टूबर 1965 को उनके नाम की सरदार पटेल के स्मारक के रुप में डाक टिकट को भी जारी किया गया। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि सरदार वल्लभ भाई पटेल के सम्मान मैं कई सड़कों, हवाई अड्डों हॉस्पिटल्स, विश्विद्यालय  आदि के नाम पटेल के नाम पर रखे गए है।

  • सरदार पटेल विश्वविद्यालय, गुजरात
  • सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ
  • सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत
  • सरदार पटेल विद्यालय, नई दिल्ली
  • सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वासद
  • स्मारक सरदार पटेल मेमोरियल ट्रस्ट
  • सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय स्मारक, अहमदाबाद
  • सरदार सरोवर बांध, गुजरात
  • सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अहमदाबाद
  • सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम, अहमदाबाद
  • गुजरात मैं सरदार की एक विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा बनाई गयी है।

सरदार वल्लभभाई पटेल के विचार – Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi

  • भारत की इस मिट्टी में कुछ अनूठा है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास रहा है।
  • आज हमें ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पंथ के भेदभावों को समाप्त कर देना चाहिए
  • आपको अपना अपमान सहने की कला आनी चाहिए.
  • एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई अन्न के लिए आंसू बहाता हुआ भूखा ना रहे।
  • संस्कृति समझ-बूझकर शांति पर रची गयी है. मरना होगा तो वे अपने पापों से मरेंगे। जो काम प्रेम, शांति से होता है, वह वैर-भाव से नहीं होता।
  • हर इंसान सम्मान के योग्य है, जितना उसे ऊपर सम्मान चाहिए उतना ही उसे नीचे गिरने का डर नहीं होना चाहिए।
  • अविश्वास भय का कारण है।
  • जो तलवार चलाना जानते हुए भी तलवार को म्यान में रखता है, उसी की अहिंसा सच्ची अहिंसा कही जाएगी. कायरों की अहिंसा का मूल्य ही क्या. और जब तक अहिंसा को स्वीकार नहीं जाता, तब तक शांति कहाँ।
  • जीतने के बाद नम्रता और निरभिमानता आनी चाहिए, और वह यदि न आए तो वह घमंड कहलाएगा।
  • चर्चिल से कहो कि भारत को बचाने से पहले इंग्लैण्ड को बचाए।
  • आत्मा को गोली या लाठी नहीं मार सकती, दिल के भीतर की असली चीज इस आत्मा को कोई हथियार नहीं छू सकता।
  • जीवन वही है जो देश के लिए जिया जाये।
  • आलस्य छोडिये और बेकार मत बैठिये क्योंकि हर समय काम करने वाला अपनी इन्द्रियों को आसानी से वश में कर लेता है।
  • उतावले उत्साह से बड़ा परिणाम निकलने की आशा नहीं रखनी चाहिये।
  • कठिन समय में कायर बहाना ढूढ़ते है तो वही बहादुर व्यक्ति रास्ता खोजते है।

सरदार वल्लभभाई पटेल का लेखन कार्य एवं प्रकाशित पुस्तकें

भारत को स्वतंत्र करने के लिए संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल को कभी किसी पुस्तक को लिखने के लिए समय ही नहीं मिला। फिर उनके द्वारा लिखे पत्रों, टिप्पणियों एवं उनके द्वारा दिए गए भाषणो के रूप मैं बहुत साहित्य मिलते है। जिनको इक्कठा करके सभी अलग अलग भाषाओँ में प्रकाशित होते रहे है।

1945 से 1950 ई० की समयावधि के इन पत्रों का सर्वप्रथम दुर्गा दास के संपादन में (अंग्रेजी में) नवजीवन प्रकाशन मंदिर से 10 खंडों में प्रकाशन हुआ था।

  • सरदार पटेल : चुना हुआ पत्र-व्यवहार (1945-1950) – दो खंडों में, संपादक- वी० शंकर, प्रथम संस्करण-1976
  • सरदारश्री के विशिष्ट और अनोखे पत्र (1918-1950) – दो खंडों में, संपादक- गणेश मा०
  • नांदुरकर, प्रथम संस्करण-1981
  • भारत विभाजन (प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली)
  • गांधी, नेहरू, सुभाष
  • मुसलमान और शरणार्थी
  • कश्मीर और हैदराबाद

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – Statue of Unity

सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान मैं उनकी एक मूर्ती बनाई गयी है जिसका नाम एकता की मूर्ती रखा गया है। जिसकी ऊँचाई 240 मीटर है, जिसमें 58 मीटर का आधार है। मूर्ति की ऊँचाई 182 मीटर है, जो स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊँची है। यह प्रतिमा विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है।

31 अक्टूबर 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल के एक नए स्मारक का शिलान्यास किया था। इस प्रतिमा को एक छोटे चट्टानी द्वीप ‘साधू बेट’ पर स्थापित किया गया है जो केवाडिया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के बीच स्थित है। 2018 में तैयार इस प्रतिमा को प्रधानमंत्री मोदी जी ने 31 अक्टूबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया। यह प्रतिमा 5 वर्षों में लगभग 3000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है।

सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विन्दु – Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi

ये बिंदु सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी को संझिप्त में दर्शाते है।

  • सरदार वल्लभभाई पटेल का पूरा नाम “वल्लभभाई झावेरभाई पटेल” था।
  • पटेल जी का जन्म 31 ऑक्टोबर 1875 नडियाद गुजरात मैं हुआ था।
  • साल 1913 में इंग्लैंड से वकालत की पढ़ाई पूरी करके गुजरात वापस लोटे।
  • वर्ष 1916 मैं सरदार पटेल ने राष्ट्रिय कांग्रेस अधिवेशन की तरफ से गुजरात की कमान संभाली।
  • 1917 मैं अहमदाबाद से नगरपालिका का चुनाव जीता।
  • 1917 मैं खेड़ा सत्याग्रह आंदोलन में हिस्सा लिया और उसे 1918 में जीत मैं बदलकर गाँधी जी को मानपत्र दिया गया यही जीत उनकी जीवन की पहली जीत थी।
  • 1919 को रौलेट एक्ट के विरोध के लिये वल्लभभाई पटेल ने अहमदाबाद मे बहोत बडा मोर्चा निकाला
  • 1920 मैं उन्होंने गांधी जी को असहकार आंदोलन में सहयोग करने के लिए अपनी वकालत की नौकरी भी छोड़ दी।
  • साल 1921 मैं सरदार जी को गुजरात का कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष चुना गया।
  • वर्ष 1923 मैं जब अंगेजों ने तिरंगा झण्डा पर पाबंदी लगायी तब सरदार ने नागपुर में 4 महीने का अंदोलन किया और इसमें भी अंग्रेजी सरकार को झुकना हि पड़ा।
  • 1928 को बार्डोली को वल्लभभाई पटेल ने अपने नेतृत्त्व मे किसानो के लिये साराबंदी आंदोलन शुरु किया।
  • 1931 मे कराची मे हुये राष्ट्रीय कॉग्रेस के अधिवेशन के अध्यक्ष के स्थान पर वल्लभभाई पटेल थे।
  • आजादी की इस लड़ाई में उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, 1942 मे ‘भारत छोडो’ आंदोलन मे हिस्सा लेने के वजह से उन्हें जेल जाना पडा।
  • 1946 को स्थापन हुये मध्यवर्ती अभिनय मंत्रिमंडल मे वो गृहमंत्री थे, वो घटना समिती के सदस्य भी थे।
  • 15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तो उपप्रधानमंत्री का पद उन्हें मिला।
  • वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद छोटी बड़ी मिलकर लगभग 600 रियासतों को भारत में विलय किया।
  • भारत सरकार ने 31 अक्टूबर 1965 को उनके नाम की सरदार पटेल के स्मारक के रुप में डाक टिकट को भी जारी किया।
  • सन 1991 में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
  • उनके सम्मान में स्टेचू ऑफ़ यूनिटी ने नाम की उनकी प्रतिमा बनायीं गयी।
  • साल 1993 में, सरदार बल्लभ भाई पटेल की बायोपिक फिल्म ‘सरदार’ आई थी, जिसे केतन मेहता द्धारा डायरेक्ट किया गया था, इसमें अभिनेता परेश रावल ने सरदार पटेल का किरदार निभाया था।

Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi – सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय

क्रम संख्या जीवन परिचय बिंदु जीवन परिचय
1 नाम सरदार वल्लभभाई पटेल (लोहपुरुष)
2 जन्म 31 अक्टूबर, 1875 नाडियाद, गुजरात
3 मृत्यु 15 दिसम्बर 1950 (बॉम्बे)
4 पिता का नाम झावेरभाई पटेल
5 माता का नाम  लाड़बाई
6 राष्ट्रीयता,  धर्म भारतीय , हिन्दू
7 पत्नी का नाम झावेरबा
8 बच्चों का नाम दहयाभाई पटेल (पुत्र ), मणिबेन पटेल (पुत्री )
9 भाई बहन सोमाभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई , दहीबा पटेल
10 शिक्षा एन.के. हाई स्कूल, पेटलाड, इंस ऑफ कोर्ट, लंदन, इंग्लैंड
11 प्रमुख पुस्तके राष्ट्र के विचार, वल्लभभाई पटेल, वल्लभ भाई पटेल के संग्रहित कार्य, 15 खंड
12 सम्मान सन 1991 में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित
13 स्मारक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity)

अन्य जीवन परिचय पढ़े

Dear Students, मैं आशा करती हूँ की आपको Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi – सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस Biography Of Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi  से related कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

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