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Biography of Pranab Mukherjee In Hindi – प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय

Biography of Pranab Mukherjee In Hindi - प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय

Biography of Pranab Mukherjee In Hindi – प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय

मेरे प्रिय दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे Biography of Pranab Mukherjee In Hindi यानि कि प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय के बारे में। और पढ़ेंगे प्रणब मुखर्जी कौन थे? प्रणब मुखर्जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?

प्रणब मुखर्जी भारत के तेरहवें राष्ट्रपति थे और भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति भी थे। अगर आपके मन यह बातें चल रही हैं कि प्रणब मुखर्जी भारत के राष्ट्रपति कैसे बने, उन्हें भारत में इतना सम्मान क्यों दिया गया। प्रणब मुखर्जी  की राजनितिक करियर की शुरुआत कैसे हुई।

तो इस जीवन परिचय को अंत तक पढ़े क्योंकि में प्रणब मुखर्जी जा जीवन परिचय में इन्ही सभी बातों को बताने वाले हैं।

अगर आप प्रणब मुखर्जी की इन सभी बातों के बारे में जानना चाहते हैं। तो आप पढ़ते रहिये हमारी Biography of Pranab Mukherjee In Hindi – प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय की पोस्ट को।

Biography of Pranab Mukherjee In Hindi – प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय

प्रणब मुखर्जी के पुरे जीवन परिचय को निम्र बिन्दुओ में दर्शाया गया है।

  • प्रणब मुखर्जी कौन थे?
  • Biography of Pranab Mukherjee In Hindi – प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय.
  • प्रणब मुखर्जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
  • प्रणब मुखर्जी का संक्षिप्त जीवन परिचय – Biography of Pranab Mukherjee In Hindi
  • प्रणब मुखर्जी का बचपन और शिक्षा
  • प्रणब मुखर्जी का व्यक्तिगत जीवन
  • राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के जीवन के महत्वपूर्ण तथ्य
  • प्रणब मुखर्जी का राजनितिक जीवन
  • प्रणब मुखर्जी के अनमोल विचार
  • प्रणब मुखर्जी का निधन
  • प्रणब मुखर्जी की रोचक बातें

प्रणब मुखर्जी का संक्षिप्त जीवन परिचय – Biography of Pranab Mukherjee In Hindi

क्रम संख्या  बिंदु प्रणव मुखर्जी जीवन परिचय
1 नाम प्रणब मुखर्जी
2 जन्म 11 दिसंबर, 1935 उल्म, वुर्ट्टनबर्ग, जर्मन साम्राज्य
3 जन्म स्थान मिराती, पश्चिम बंगाल, भारत
4 पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी
5 माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी
6 पत्नी का नाम सुरवा मुखर्जी
7 विवाह मरिअक (पहली पत्नी), एलिसा लोवेन्न थाल (दूसरी पत्नी)
8 बेटे-बेटी अभिजित (बेटा), शर्मिष्ठ (बेटी), इन्द्रजीत (बेटा)
9 बहन का नाम अन्नपूर्णा बनर्जी एवं अन्नानापूर्णा बंदापधाय
10 विवाह सन 1957
11 राजनैतिक पार्टी कांग्रेस
12 राष्ट्रीयता भारतीय
13 जाति/धर्म बंगाली/बंगाली
14 पुरस्कार भारत रत्न पुरुस्कार
15 मृत्यु 31 अगस्त, 2020
16 नेट वर्थ 3 करोड़ भारतीय रूपये

प्रणब मुखर्जी कौन थे?

प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति थे उन्होंने भारत की राजनितिक पार्टी कांग्रेस की तरफ काफी समय तक राजनीती भी की। कांग्रेस पार्टी के बड़े दिग्गज नेताओं में शामिल थे प्रणब मुखर्जी।मुखर्जी जी ने अपने 60 साल के राजनीतिक करियर में भारत सरकार के लिए बहुत सारे अलग अलग पदों पर कार्य किया।

इन्होने वित् मंत्री, विदेश मंत्री और पार्टी के अध्यक्षता का पद भी शामाला है। वर्ष 1969 में उन्होंने सोनिया गांधी की मदद से पहली बार राजनीति में प्रवेश लिया था। कॉंग्रेस पार्टी के लिए उन्होंने राज्यसभा पद का चुनाव भी जीता और यहीं से वो सोनिया गांधी के सबसे प्रिय और खाश नेता बन गए।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 1973 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए इन्होने मनमोहन सिंह की सरकार में वित्तमंत्री पद पर भी कार्य किया और अपने मंत्रालय को बहुत ही अच्छी तरह से आगे बढ़ाया।

प्रणब मुखर्जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?

प्रणव मुखर्जी का जन्म 11 दिसम्बर को 1935 पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किरनाहर शहर के निकट स्थित मिराती गाँव में हुआ था। जिस परिवार में इन्होने जन्म लिया वह एक ब्राह्मण परिवार था। इनके पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी था।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के तीन भाई बहन थे जिनका नाम अन्नपूर्णा बनर्जी एवं अन्नानापूर्णा बंदापधाय हैं। इनका विवाह 1957 को सुरवा मुखर्जी के साथ हुआ था। वर्ष 1920 से इनके पिता कांग्रेस पार्टी से जुड़ गए थे।

1962 से 1964 तक पश्चिम बंगाल विधान सभा परिषद के सदस्य के पद पर रहे। पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर भी रह चुके थे। प्रणब मुखर्जी के पिता जी ने स्वंत्रता की लड़ाई में भी भाग लिया था वह स्वंत्रता सेनानी भी थे।

प्रणब मुखर्जी का बचपन और शिक्षा – प्रणब मुखर्जी का प्रारम्भिक जीवन

प्रणब मुखर्जी की प्रारम्भिक शिक्षा वीरभूम के सूरी विद्यासागर कॉलेज से प्राप्त की। कलकत्ता विश्वविद्यालय से उन्होंने इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इसी विद्यालय से उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की और उन्होंने एक वकील और कॉलेज अध्यापक के पद पर कार्य किया।

प्रणब मुखर्जी ने अपने जीवन की शुरुआत एक विद्यालय के अध्यापक के रूप में की इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक ‘देशेर डाक’ नामक पत्र के पत्रकार के रूप में भी कार्य किया। प्रणव मुखर्जी बंगीय साहित्य परिषद के ट्रस्टी एवं अखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे।

उन्होंने डिप्टी अकाउंटेंट जनरल (पोस्ट और टेलीग्राफ) के कोलकाता कार्यालय में प्रवर लिपिक की नौकरी की।

प्रणब मुखर्जी का राजनितिक जीवन

साल 1969 में प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुयी। साल 1969 में प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुयी इंद्रा गांधी ने उन्हें राज्य सभा पद के लिए उन्हें उमीदवार बनया और उन्होंने वहां से जीत भी हांसिल की।

उन्होंने एक बार नहीं बल्कि चार बार इस पद का चुनाव जीता। साल 1973 में उन्होंने इंदिरा गांधी के कार्यकाल में औद्योगिक विकास मंत्रालय में उप-मंत्री के पद पर कार्य किया। साल 197- 1977 के बीच जब भारत में आपातकालीन समय चल रहा था उस समय उन पर विभिन्न प्रकार के आरोप भी लगाए गए।

लेकिन इंदिरा ने उन्हें हमेशा निर्दोष साबित कर क्लीन चिट दी। 1982 से 1984 तक इंदिरा गांधी की सरकार में उन्होंने वित्त मंत्री के पद पर कार्य किया। इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद राजीव गांधी ने इनके समंध बिगड़ गये जिसके कारण राजीव गांधी ने इन्हे कैबिनेट मंत्रालय में वित्त मंत्री का पद दिया।

राजीव गांधी से मदभेद के चलते प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस पार्टी का गठन कर लिया। साल 1989 उन्होंने राजीव गांधी से सलाह करके फिर से कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया। पी वी नरसिम्हा रावजी प्रधानमंत्री कार्यकाल में उन्हें योजना आयोग का प्रमुख बना दिया गया।

इसी कार्यकाल के दौरान उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्रालय का कार्य भी किया था। सन 1999 से 2012 तक प्रणब मुखर्जी जी केंद्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष पद पर भी रहे।

सोनिया गांधी को राजनीति में लाने में सबसे बड़ा योगदान प्रणब मुखर्जी का ही रहा है। उन्होंने सोनिया के लिए एक मेंटर की तरह कार्य किया और उन्हें राजनीति में लाये। सोनिया गांधी ने राजनीती के पूरी शिक्षा प्रणब से ही ली सोनिया अपने कोई भी निर्णय बिना मुखर्जी की सलाह के नहीं लेती थी।

2004 में जब कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाई तो उन्होंने ने प्रधानमंत्री पद को छोड़कर रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री के पदों का कार्यभार संभाला। कांग्रेस पार्टी का उन्हें संकट मोचन भी कहा जाता है जब जब कांग्रेस को उनकी सख्त जरूरत पड़ी उन्होंने कोंग्रेस की नौका को पार लगया है।

प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति के तौर पर

कांग्रेस की तरफ से उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया। जुलाई 2012 में उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी पी.ए. संगमा को 70% वोटों से हराकर राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता। प्रणब मुखर्जी राष्टपति बनने से पहले भारत की राजनीति को अपने जीवन का अहम् 40 वर्ष का समय दिया।

प्रणब ने गांधी परिवार और उनके रिशतों को बड़े ही करीब से देखा था। उन्होंने गांधी परिवार की 4 पीडियों की राजनीति देखी। वह गांधी परिवार के हमेशा करीबी और सबसे वफादार रहे।

जिस समय लोग अपने सभी कार्यों से रिटायरमेंट लेते हैं उस समय उन्होंने देश को अपने अनुभव से आगे बढ़ाया राष्ट्रपति पद पर कार्य किया। और उन्होंने अपने कार्यकाल में अपने देश को लगातार दिन के 18 घंटे की सेवा दी और राष्ट्रपति पद पर रहते हुए अपने कार्यकाल में कोई भी छुट्टी नहीं की।

प्रणब मुखर्जी जी को पुरस्कार एवं सम्मान

  • वर्ष 2019 में प्रणब मुखर्जी को ‘भारत रत्न’ पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
  • सन 2008 में देश के दुसरे बड़े सम्मान ‘पद्म श्री’ पुरस्कार को देकर सम्मानित किया गया।
  • सन 2013 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका विश्वविध्यालय में मुखर्जी जी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति के द्वारा कानून की डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
  • 1984 में सबसे अच्छे वित्तमंत्री की उपलब्धि हांसिल की। 1997 में वर्ष के सबसे अच्छे सांसद के रूप में सम्मान दिया गया।
  • सन 2012 में विश्वेस्वराईया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और असम विश्वविध्यालय की ओर से उन्हें ओनररी डी लिस्ट पुरस्कार से नवाजा गया था।
  • 2010 में उन्हें दोबारा से सबसे अच्छे वर्ष 2019 में प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
    सन 2008 में देश के दुसरे बड़े सम्मान ‘पद्म श्री’ पुरस्कार को देकर सम्मानित किया गया।
    सन 2013 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका विश्वविध्यालय में मुखर्जी जी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति के द्वारा कानून की डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
    1984 में सबसे अच्छे वित्तमंत्री की उपलब्धि हांसिल की।
    1997 में वर्ष के सबसे अच्छे सांसद के रूप में सम्मान दिया गया।
    सन 2012 में विश्वेस्वराईया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और असम विश्वविध्यालय की ओर से उन्हें ओनररी डी लिस्ट पुरस्कार से नवाजा गया था।
    2010 में उन्हें दोबारा से सबसे अच्छे वित्तमंत्री का अवार्ड दिया गया था।
    बांग्ला देश ने उन्हें वर्ष 2013 में ‘बांग्लादेश लिबरेशन वॉर ओनर’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
    सन 2011 में वोल्वरहैम्टन विश्वविद्यालय द्वारा प्रणब जी को डोक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।का अवार्ड दिया गया था।
  • बांग्ला देश ने उन्हें वर्ष 2013 में ‘बांग्लादेश लिबरेशन वॉर ओनर’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
  • सन 2011 में वोल्वरहैम्टन विश्वविद्यालय द्वारा प्रणब जी को डोक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।

उनके राजनितिक जीवन के राजनितिक पद

  • फरवरी 1973 से जनवरी 1974 तक औद्योगिक विकास के उप मंत्री रहे।
  • नौवहन और परिवहन के उप मंत्री पद पर जनवरी 1974 से अक्टूबर 1974 तक रहे।
  • इस्पात और उद्योग विभाग में उप मंत्री भी रहे।
  • एक राज्य के वित्त मंत्री के पद पर 1974 से दिसंबर 1975 तक कार्य किया।
  • राजस्व और बैंकिंग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिसम्बर 1975 से मार्च 1977 तक कार्य किया।
  • कैबिनेट मंत्री वाणिज्य और इस्पात और खनन के रूप में जनवरी 1980 से जनवरी 1982 तक कार्यरत रहे।
  • कैबिनेट मंत्री वित्त जनवरी 1982 से दिसंबर 1984 तक रहे।
  • वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार 31 दिसंबर, 1984 को उपाध्यक्ष, योजना आयोग जून 1991 से मई 1996 तक।
  • कैबिनेट मंत्री वाणिज्य जन 1993 1993 से फ़रवरी 1995 तक।
  • विदेश मंत्री कैबिनेट मंत्री 1995 से मई 1996 तक।
  • कैबिनेट रक्षा मंत्री मई 2004 से 24 अक्टूबर 2006 तक रहे।
  • विदेश मंत्री के कैबिनेट मंत्री के रूप में 2006 से मई 2009 तक सेवा में रहे।
  • वित्त मंत्री कैबिनेटल 24 जनवरी 2009 से 26 जून 2012 तक कार्य किया।
  • भारत के राष्ट्रपति के पद पर 25 जुलाई 2012 से 24 जुलाई 2020 तक कार्यरत रहे।

उनके शोक और उनके द्वारा लिखी गई किताबें

हमरे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को डायरी लिखने का बहुत शौक था उनको इतना ही नही नयी नयी किताबें लिखने और पढ़ने का भी बहुत शौक था। उनकी रूचि बागवानी और संगीत में भी बहुत अधिक थी वो अक्सर शाम के समय संगीत सुना करते थे।

  • सन 1969 में – मिडटर्म पोल नामक पुस्तक प्रकाशित की।
  • सन 1984 में – इमर्जिंग डाइमेंशन्स ऑफ इंडियन इकोनॉमी पुस्तक लिखी जिसमें उन्होंने भारत की अर्थव्यस्ता के बारे में लिखा है।
  • सन 1987 में – ऑफ द ट्रैक
  • सन 1992 में – सागा ऑफ स्ट्रगल एंड सैक्रिफाइस नामक पुस्तक को प्रकाशित किया वह इस पुस्कत को अपनी सबसे पसंदीदा पुस्तक बताते थे।
  • सन 1992 में – चैलेंज बिफोर दी नेशन,
  • सन 2014 में – द ड्रामेटिक डिकेड : द डेज ऑफ़ इंदिरा गाँधी इयर्स इस पुस्तक में उन्होंने इंदिरा गाँधी के बारे में बताया है कि उनके कार्यकाल में भारत ने किस प्रकार तरक्की की उड़ान भरी।

प्रणब मुखर्जी का निधन

प्रणब मुखर्जी को 10 अगस्त को दोपहर 12:07 बजे गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।उनकी इस गंभीर हालत की वजह उनके दिमाग की नस में जमा खून बताया गया इसी रात उनके दिमाग की सर्जरी करयाई गयी। 31 अगस्त 2020 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दिल्ली के अस्पताल में निधन हुआ।

प्रणब मुखर्जी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य – Biography of Pranab Mukherjee In Hindi

यूरोमनी नाम की एक मैगजीन ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री का खिताब दिया है।

प्रणब मुखर्जी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया।

प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गांव में हुआ था।

उन्होंने स्थानीय बंगाली समाचार पत्र देश डाक में पत्रकार के तौर पर भी काम किया है।

राजनीती में पहली बार उन्हें इंदिरा गांधी लायी थी।

प्रणब मुखर्जी ने चार बड़े मंत्रालय यानी रक्षा, वाणिज्य, विदेश और वित्त मंत्रालय को संभाला।।

देश के वह 13वें राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने सात दया याचिकाओं को खारिज किया जिनमें अफजल गुरु और अजमल कसाब की भी दया याचिका शामिल थी।

हमारी पीढ़ी में, हमारे रोल मॉडल गांधी और नेहरू थे। वे प्रतिष्ठित है। वे व्यक्तित्व की पूजा अर्चना करते थे। मैंने नेहरू जी के लगभग हर भाषण पढ़ा है।।

प्रणब मुखर्जी का 13 जुलाई 1957 को शुभ्रा मुखर्जी से विवाह हुआ था। उनके दो बेटे और एक बेटी है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पिता कामदा किंकर मुखर्जी देश के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे थे।

प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक कार्यकाल में ही 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) शुरू हुआ था।

1984 में प्रणब मुखर्जी भारत के वित्त मंत्री बने।

1995 से 1996 तक पहली बार विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया।

31 अगस्त 2020 को दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली।

प्रणब मुखर्जी के बारे में रोचक बातें – Biography of Pranab Mukherjee In Hindi

प्रणब मुखर्जी राजनितिक ही नहीं बल्कि एक शिक्षक भी थे वह राजनीति में आने से पहले शिक्षक का कार्य किया करते थे।

प्रणब मुखर्जी भारत के पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने संसद में 7 बजट पास किये थे।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को हिंदी बोलना नहीं आता था जिसकी बजह से वो कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाए।

मुखर्जी की लम्बाई 5 फ़ीट और 1 इंच थी। प्रणब मुखर्जी भारत के तेरहँवे राष्ट्रपति थे।

इनको डायरी लिखने का शौक था वह 40 सालों से एक ही डायरी लिख रहे थे वह अपने सहत हुयी अहम् बात या कोई घटना को उसमे लिखते थे।

प्रणब मुखर्जी को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था वह एक साथ 3 किताबों को पढ़ सकते थे।

वह लगातार कार्य करने में विश्वास रखते थे और साल में दुर्गा पूजा के आलावा कोई और छुट्टी नहीं लेते थे।

वह मॉर्निंग वाक के लिए अपने भवन के ही चक्कर लगाते थे।

मुखर्जी दिन में 18 घंटे कार्य करने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति थे।

उनका फेवरेट खाना, माछेर झोल और भात था।

नबमेर 13 उनके लिए बहुत ही लकी था वह भारत के 13 वे राष्ट्रपति बने, उनकी शादी की सालगिरह भी 13 को आती है, वह दिल्ली में 13 नंबर के घर में रहते थे।

इतना ही नहीं ममता ने 13 जून को पहली बार उनका नाम राजनीती में उछला था।

मुखर्जी अब्दुल सत्तार गाओं में जन्मे थे जिस गाओं से एक नहीं बल्कि 2 राष्ट्रपति बने।

प्रणब मुखर्जी के अनमोल विचार – Pranab Mukharjee Ke Anamol Vichaar

भारत की संसद भवन को दिल में रखकर, भारत की जनता की सेवा करना ही एक मात्र मेरा उद्देश्य रहा है।

जहां मुझे मेरे भाग्य ने जनता की सेवा के लिए

जहां मुझे मेरे भाग्य ने जनता की सेवा के लिए पहुंचाया है में उसमे खुश हूँ और ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ।

हम सभी को हर चीज की एक कीमत चुकानी पड़ती है।

सदैव खुश रहना और दूसरों को खुश रखना मानव जीवन के लिए बहुत जरूरी है।

शिक्षा ही वह मार्ग है जिस पर हम भारत माता को स्वर्ण युग की और लेजा सकते हैं। शिक्षा की परिवर्तन शक्ति से समाज में परिवर्तन लाया जा सकता है। हमें उच्च शिक्षा के लिए उच्च स्तरीय व्यवस्था भी करनी होगी।

जिस हिंसा को हम अपने आस पास देखते हैं Biography of Pranab Mukherjee In Hindi

जिस हिंसा को हम अपने आस पास देखते हैं या करते हैं, उसी हिंसा की जड़ में अज्ञानता, दर और अन्धविश्वाश झलकता है।

Biography of Pranab Mukherjee In Hindi

हमें समाज का निर्माण इस प्रकार करना है कि वह समाज सेवा का विश्वास बन जाये।

हमें अपने राजनितिक जन संवाद को शारीरिक और मौखिक रूप से हिंसा से मुक्त करना होगा।

अगर हम देश की खुशहाली को तेजी

अगर हम देश की खुशहाली को तेजी से बढ़ाना चाहते है तो उससे अधिक तेजी से देश की गरीबी को मिटाना होगा।

पर्यावरण को सुरक्षित रखना हमारे भविष्य के लिए अत्यंत जरूरी है, प्रकृति पूरी उदारता के साथ हमारी मदद करती है। जब हमारा प्रकति से लालच जरूरतों की सीमाओं को पार कर जाता है तब प्रकृति प्रलय लाती है।

में इस तरह से कार्य करना चाहता हूँ कि कल जब में आप मिलकर बात करूँ तो राष्ट्रपति के रूप में नहीं बल्कि आम नागरिक की तरह बात करूँ। जो भारत के लिए एक महान कार्य की दिशा में, भारत के विकास के पथ का एक यात्री है।

प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय से सम्बंधित अन्य राजनीतिज्ञ का जीवन परिचय :-

प्रिय दोस्तों, मैं आशा करती हूँ की आपको Biography of Pranab Mukherjee In Hindi – प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय को पढ़कर अच्छा लगा होगा। अब आप भी Biography of Pranab Mukherjee In Hindi के बारे में लिख सकते है और लोगो को बता भी सकते हैं। यदि आपको इस प्रणब मुखर्जी का जीवन परिचय से सम्बंधित कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है।

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