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Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय

Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi - डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय

Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi. मेरे प्रिय दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi यानि कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलम के जीवन परिचय के बारे मैं। और पड़ेगे डॉ. एपीजे अब्दुल कलम का जन्म कब और कहाँ हुआ। किस तरह से डॉ. एपीजे अब्दुल कलम देश के राष्ट्रपति बने. 

भारत के सबसे प्रसिद्ध और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम है जिन्हे लोग मिसाइल मेन के नाम से भी जानते है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगा दिया उन्होंने देश को अनगिनत हथियार और मिसाइल दी. कलाम जी को आज हमारे देश की भगवान की तरह पूजा जाता है. सभी स्कूल और कॉलेज और रिसर्च सेंटर्स में उनकी पेंटिंग लगाई जाती है. 

कलम जी को देश के महान लोगो में गिना जाता है। अगर आप लोग भी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में ये सब जानना चाहते है तो आप Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi को पूरा पड़े. क्योंकि आज में आप सब लोगो को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में बताने वाली हूँ. 

Biography Covering Topics – Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय

  • Who Was dr. APJ abdul kalam – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कौन थे.
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय
  • एपीजे अब्दुल कलाम का प्रारम्भिक जीवन
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का वैज्ञानिक सफर
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को सम्मान और पुरस्कार
  • कलाम जी के द्वारा लिखी हुयी किताबे
  • भारत के राष्ट्रपति पद पर होने का जीवन
  • भारत के राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद का जीवन
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का निजी जीवन
  • अब्दुल कलाम जी के विचार
  • अब्दुल कलाम के बारे में खास बातें

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक ऐसे भारतीय व्यक्ति का नाम जिसने देश का गोरव पूरे विश्व में आगे बढ़ाया। कलाम के नाम को भारत देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जानती है. जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साझबूझ से सभी को लोहा मनवाया उन्होंने ऐसे ऐसे अविष्कार किये जो विश्व के बड़े बड़े रिसर्च सेंटर्स नहीं कर पाए. कलाम जी ने देश के राष्ट्रपति के पद को भी बखूबी निभाया। 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हमारे देश के सबसे अधिक शिक्षित राष्ट्रपति थे. उनके राष्ट्रपति बनने पर पूरे देश को उन पर गर्व था. उन्होंने हमारे देश के लिए बहुत सारी मिसाइले बनायीं। उन्होंने देश की सेना को रेडार डिफेन्स सिस्टम बना कर दिया. 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कौन थे

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक और इंजिनियर के तौर पर उन्होंने रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया। उन्होंने यहां पर काम करते हुए देश के लिए बहुत उपयोगी मिसाइलों और अंतरिक्ष यान का अविष्कार किया।

डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक और भारत के 11वें राष्ट्रपति थे। उन्होंने वर्ष 1998 के पोखरण द्वितीय परमाणु परिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ कलाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल विकास कार्यक्रम के साथ भी जुड़े थे।

मिसाइल बनाने के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन’ भी कहा जाता है। वर्ष 2002 में कलाम भारत के राष्ट्रपति चुने गए और 5 वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षण, लेखन, और सार्वजनिक सेवा में लौट आए। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम “अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम मसऊदी” था। इनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को हुआ था. उन्होंने सिखाया जीवन में चाहें जैसे भी परिस्थिति क्यों न हो पर जब आप अपने सपने को पूरा करने की ठान लेते हैं तो उन्हें पूरा करके ही रहते हैं। अब्दुल कलाम मसऊदी के विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं.

कलाम जी ने अपने जीवन के 40 वर्ष भारत के  रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में कार्य किया। भारत के द्वारा बनायीं गयी मिसाइलें इन्ही के कार्यकाल की है जो ज़्यदातर सफल रही है उनसे आज पूरी दुनिया डरती है।

इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में ‘मिसाइल मैन‘ के रूप में जाना जाता है. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 1974 में पहला मूल परमाणु का परिक्षण किया। दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक तौर पर काम किया।

अब्दुल कलाम देश के ऐसे पहले राष्ट्रपति थे जिन्हे भारत की दोनों बड़ी राजनितिक पार्टियों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी ने पूर्ण सहमति दी थी. जिससे 2002 में उन्हें भारत का राष्ट्रपति चुना गया। उन्होंने राष्ट्रपति के पद पर रहकर 5 वर्ष कार्य किया।

बाद में उन्होंने अपने देश के होनहार नोजवानो को शिक्षा देना उचित समझा और उन्होंने इसके लिए एक आई आई टी विधयालय में पढ़ाया। कलाम जी भारत रत्न सहित बहुत सारे पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया। 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का प्रारम्भिक जीवन – Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi

Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi मैं अभी हम कलाम जी के प्रारंभिक जीवन के बारे में बात करेंगे।अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम मसऊदी का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम अंसार परिवार में हुआ था. इनके पिता का नाम जैनुलअब्दीन और माता का नाम अशिअम्मा था। इनके पिता एक नाविक थे जो बहुत गरीब थे और इनकी माता एक ग्रहणी थी.

कलाम जी पांच भाई और पांच बहन थे। ज्यादा गरीब और बड़ा परिवार होने के कारण उन्हें अपनी छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा था। अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए। अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए बालक कलाम स्कूल के बाद समाचार पत्र वितरण का कार्य करते थे।

कलाम बचपन से ही नयी चीजों को सीखने के लिए आतुर रहते थे और उन्हें लगन के साथ सीखते। उनके अंदर पड़ने और नया सीखने की बहुत बड़ी भूख थी। वह काम करने के बाद भी घण्टो पड़ा करते थे। उन्होंने अपनी स्कूल की पढाई रामनाथपुरम स्च्वार्त्ज़ मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की और उसके बाद तिरूचिरापल्ली के सेंट जोसेफ्स कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने सन 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक किया।

पांचवी कक्षा में पढ़ते समय उनके अध्यापक उन्हें पक्षी के उड़ने के तरीके की जानकारी दे रहे थे, लेकिन जब छात्रों को समझ नही आया तो अध्यापक उनको समुद्र तट ले गए जहाँ उड़ते हुए पक्षियों को दिखाकर अच्छे से समझाया, इन्ही पक्षियों को देखकर कलाम ने तय कर लिया कि उनको भविष्य में विमान विज्ञान में ही जाना है। कलाम के गणित के अध्यापक सुबह ट्यूशन लेते थे इसलिए वह सुबह 4 बजे गणित की ट्यूशन पढ़ने जाते थे.

उसके बाद वर्ष 1955 में वो मद्रास चले गए जहाँ से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1960 में कलाम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की.

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का वैज्ञानिक सफर

कलाम जी ने 1972 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को ज्वाइन किया। उनको निर्देशक के रूप में रखा गया। उनके दिए हिये निर्देशों से भारत ने अपना पहला उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र को सफल बनाया। उनके द्वारा किये गए बहुत अधिक परिश्रम से भारत ने 1980 में अपने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। जिसके हमारा देश अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी प्रक्षेपास्त्र (गाइडेड मिसाइल्स) को डिजाइन किया। और अपनी ही तकनिकी से अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों को बनाया। कलाम को जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव के रूप में चुना गया। भारत ने कलाम के कार्यकाल में ही परमाणु हथियारों को अपना रक्षा में लगाया। 

कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र मैं तेजी से और अत्याधुनिक बनाने के लिए मिशन 2020 बनाया। 1982 में वे भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में वापस निदेशक के तौर पर आये और उन्होंने अपना सारा ध्यान “गाइडेड मिसाइल” के विकास पर केन्द्रित किया। 1998 मैं भारत ने दूसरा सफल परमाणु परिक्षण किया जिससे हमारा देश परमाणु शक्ति से संम्पन देशों में शामिल हो गया।

18 जुलाई 2002 को कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। इनका कार्याकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ।

भारतीय युवाओं की प्रेरणा को बढ़ाने के लिए इन्होंने अपनी जीवनी “विंग्स ऑफ़ फायर” लिखी जिसमे उन्होंने बताया की वह एक मुस्लिम होने के बाबजूद भी वह शाकाहारी है. कलाम जी को कविताये लिखने का भी बहुत शोक था उन्होंने बहुत सारी कविताये भी लिखी।

यह भारत को परमाणु के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष में भी बड़ा मुकाम हासिल कराना चाहते थे. इन्होंने अपनी पुस्तक इण्डिया 2020 में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। यह भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनते देखना चाहते थे।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को सम्मान और पुरस्कार – Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi

उनके सम्मान और पुरस्कार की उनके लिए कोई कमी नहीं थी आप इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते है की उनके 79 वें जन्मदिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया गया था. इसके आलावा उन्हें लगभग चालीस विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्रदान की गयी थीं। भारत सरकार द्वारा उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 

1997 मैं कलाम जी को भारत रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया। जिससे उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक होने का सम्मान मिला। 2005 में स्विट्ज़रलैंड की सरकार ने कलाम के स्विट्ज़रलैंड आगमन के उपलक्ष्य में 26 मई को विज्ञान दिवस घोषित किया था। 2013 में उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान सम्बंधित परियोजनाओं के कुशल संचलन और प्रबंधन के लिये वॉन ब्राउन अवार्ड से पुरस्कृत किया।

सम्मान का वर्ष सम्मान/पुरस्कार का नाम प्रदाता संस्था
2014 डॉक्टर ऑफ़ साइन्स एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम
2012 डॉक्टर ऑफ़ लॉज़ (मानद उपाधि) साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय
2011 आइ॰ई॰ई॰ई॰ मानद सदस्यता आइ॰ई॰ई॰ई॰
2010 डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाटरलू
2009 मानद डॉक्टरेट  ऑकलैंड विश्वविद्यालय
2009 हूवर मेडल  ए॰एस॰एम॰ई॰ फाउण्डेशन, (सं॰रा॰अमे॰) 
2009 वॉन कार्मन विंग्स अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड  कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, (सं॰रा॰अमे॰)
2008 डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग (मानद उपाधि) नानयांग टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय, सिंगापुर 
2008 डॉक्टर ऑफ साइन्स (मानद उपाधि)  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
2007 डॉक्टर ऑफ साइन्स एण्ड टेक्नोलॉजी की मानद उपाधि कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय
2007 किंग चार्ल्स II मेडल रॉयल सोसायटी, यूनाइटेड किंगडम
2007 डॉक्टर ऑफ साइन्स की मानद उपाधि वूल्वरहैंप्टन विश्वविद्यालय, यूनाईटेड किंगडम
2000 रामानुजन पुरस्कार अल्वार्स शोध संस्थान, चेन्नई
1998 वीर सावरकर पुरस्कार भारत सरकार
1997 इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस
1997 भारत रत्न भारत सरकार
1994 विशिष्ट शोधार्थी इंस्टीट्यूट ऑफ़ डायरेक्टर्स (इण्डिया)
1990 पद्म विभूषण भारत सरकार
1981 पद्म भूषण भारत सरकार
 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी के द्वारा लिखी हुयी किताबे

Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi. मैं अब हम कलाम साहब के द्वारा लिखी गयी किताबे के बारे मैं पड़ेगे की उन्होंने कौन कौन सी किताबे लिखी –

  • इंडिया 2020: ए विजन फॉर द न्यू मिलेनियम (वर्ष 1998 मैं प्रकाशित हुई )
  • विंग्स ऑफ फायर: एन ऑटोबायोग्राफी (वर्ष 1999  मैं प्रकाशित हुई )
  • वर्ष 2002 मैं इगनाइटेड माइंड्स: अनलीजिंग द पॉवर विदिन इंडिया किताब को प्रकाशित किया।
  • 2004 मैं द ल्यूमिनस स्पार्क्स: ए बायोग्राफी इन वर्स एंड कलर्स को प्रकाशित किया गया था।
  • 2005 मैं गाइडिंग सोल्स: डायलॉग्स ऑन द पर्पस ऑफ लाइफ, मिशन ऑफ इंडिया: ए विजन ऑफ इंडियन यूथ को पब्लिश किया गया।
  • वर्ष 2007  इन्स्पायरिंग थॉट्स: कोटेशन सीरिज को प्रकाशन किया गया।
  • यू आर बोर्न टू ब्लॉसम: टेक माई जर्नी बियोंड, फेलियर टू सक्सेस: लीजेंडरी लाइव्स किताब को 2011 मैं प्रकाशित किया गया।इन दोनों किताबों को लिखने मैं उनकी मदद अरूण तिवारी जी ने की थी। इसी वर्ष द साइंटिफिक इंडियन: ए ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी गाइड टू द वर्ल्ड अराउंड अस को भी प्रकाशित किया गया। जिसमे इनके सहयोगी वाई. एस. राजन थे।
  • 2011 में  टारगेट 3 बिलियन किताब को प्रकाशित किया गया था।
  • एस कोहली पूनम और डॉ. कलम ने मिलकर 2012 मैं यू आर यूनिक: स्केल न्यू हाइट्स बाई थॉट्स एंड एक्शंस को प्रकाशित किया। टर्निंग पॉइंट्स: ए जर्नी थ्रू चैलेंजेस इस किताब को उन्होंने अकेले  ही लिखा।
  • वर्ष 2013 में उन्होंने 4 किताबे प्रकाशित की जिसमे इन्डोमिटेबल स्प्रिट, स्प्रिट ऑफ इंडिया, माई जर्नी: ट्रांसफॉर्मिंग ड्रीम्स इन्टू एक्शंस थी और यह थॉट्स फॉर चेंज: वी कैन डू इट किताब उन्होंने ए. सिवाथानु पिल्लई के साथ मिलकर लिखी थी.
  • प्रकाशन वर्ष 2014 भी कुछ काम न रहा इसमें उन्होंने गवर्नेंस फॉर ग्रोथ इन इंडिया, मैनीफेस्टो फॉर चेंज(सह लेखक – वी. पोनराज), फोर्ज योर फ्यूचर: केन्डिड, फोर्थराइट, इन्स्पायरिंग,  बियॉन्ड 2020: ए विजन फॉर टुमोरोज इंडिया,
  • वर्ष 2015 द गायडिंग लाइट: ए सेलेक्शन ऑफ कोटेशन फ्रॉम माई फेवरेट बुक्स, रिग्नाइटेड: साइंटिफिक पाथवेज टू ए ब्राइटर फ्यूचर (सह लेखक – श्रीजन पाल सिंह), द फैमिली एंड द नेशन(सह लेखक – आचार्य महाप्रज्ञा),  ट्रांसेडेंस माई स्प्रिचुअल एक्सपीरिएंसेज (सह लेखक – अरूण तिवारी).

भारत के राष्ट्रपति पद के तोर पर

एक रक्षा वैज्ञानिक के पद को उन्होंने बड़े ही जिमेदारी के साथ बखूबी निभाया था इसके मद्दे नजर रखते हुए उन्हें बीजेपी और NDA की गठबंधन सरकार ने उन्हें वर्ष 2002 में राष्ट्रपति पद का उमीदवार बनाया। उन्हें पूर्ण बहुमत के साथ 25 जुलाई 2002 को भारत  राष्ट्रपति पद का भर सौंपा गया।

कलाम साहब को राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत रत्न पुरस्कार दिया गया था। उनके कार्यकाल को जनता का राष्ट्रपति कहा गया था। इस कार्यकाल को बाद उन्होंने दोबारा राष्ट्रपति बनने कीइच्छा जाहिर की राजनैतिक पार्टियों के एक साथ राय न होने पर उन्होंने यह विचार त्याग दिया। प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल को पूरा उनको फिर से उम्मीदवार माना जाने लगा परन्तु आम सहमति न होने पर उन्होंने अपनी उम्मीदवारी छोड़ दी।

भारत के राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद का जीवन – Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi

कलाम जी ने राष्ट्रपति पद को छोड़ने के बाद शिक्षण, और पुस्तक लेखन का कार्य किया। नए युवाओं को मार्गदर्शन के लिए बहुत सारे शो किये, फिर वह नई चीजों के शोध में लग गए। वह शिक्षण के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिल्लोंग, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद, भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर, जैसे संस्थानों से विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर जुड़े रहे।

भारतीय अन्तरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम के कुलाधिपति, अन्ना विश्वविद्यालय में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और भारत भर में कई अन्य शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में सहायक बन गए। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अन्ना विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी, और अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पढ़ाया।

उन्होंने 2012 मैं “मैं आंदोलन को क्या दे सकता हूँ-” आंदोलन चलाया। इसमें उन्होंने कविताये लिखी और कई वाद्य यंत्रों को बजाने का आनंद लिए। वह हिन्दू संस्कृति पर विश्वास रखते थे और कृष्ण भक्ति के भजन सुनते थे। उनके जीवन से प्रभावित होकर 2011 मैं “आई ऍम कलाम” के नाम से एक फिल्म प्रकाशित की गयी।

डॉ. कलाम का निधन अंतिम संस्कार – Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi

27 जुलाई 2015 की शाम Dr. APJ Abdul Kalam भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में  एक व्याख्यान दे रहे थे जब उन्हें जोरदार कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) हुआ और ये बेहोश हो कर गिर पड़े। और उन्हें सीधा ICU में ले जाया गया जिसके २ घंटे बाद डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और इस तरह से हमारे देश महान वज्ञानिक कलाम के जीवन का दिया बुझ गया और सारे देश को वह रोता हुआ छोड़ गए।

2015 मैं उनकी उम्र लगभग 84 साल की थी। उनके मृत शरीर को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से शिलांग से गुवाहाटी लाया गया। 28 जुलाई को दोपहर वायुसेना के विमान सी-130 जे हरक्यूलिस से दिल्ली लाया गया। लगभग 12:15 पर विमान पालम हवाईअड्डे पर उतरा। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल व तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इसकी अगवानी की और कलाम के पार्थिव शरीर पर पुष्पहार अर्पित किये।

इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे से लपेट कर उनके निजी आवास पर ले जाया गया। जहां र्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित अनेक गणमान्य लोगों ने इन्हें श्रद्धांजलि दी। वही भारत सरकार ने उनकी मृत्यु के शोक एक दिन के लिए पूरे देश में शोक अवकाश किया।

29 जुलाई को वायु सेना के हेलिकॉप्टर में मंडपम भेजा गया। मंडपम से कलाम के शरीर को उनके गृह नगर रामेश्वरम एक आर्मी ट्रक में भेजा गया। 30 जुलाई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में दफ़ना दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी, तमिलनाडु के राज्यपाल और कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों सहित 3,50,000 से अधिक लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का निजी जीवन

कलाम ने अपने पूरे जीवन अनुशासन का पालन किया वह सुबह जल्दी उठते थे और नहा कर टूशन पड़ने जाते थे. लौटकर वह कुरान या फिर गीता को पढ़ते थे उसके बाद वह नमाज पड़ते थे। कलाम तिरुक्कुरल का भी अनुशरण करते थे इसकी झलक उनके विचारों और भाषणों में मिलते है।

वह राजनितिक स्तर पर भी चाहते थे कि भारत की भूमिका विस्तार हो और वह भारत देश के लिए ज्यादा से ज्यादा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाये। भारत को महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढाते देखना उनकी दिली चाहत थी। बच्चों और युवाओं के बीच डाक्टर क़लाम जी अत्यधिक लोकप्रिय थे। वह मुस्लिम होने के बाद भी जीवन भर शाकाहारी रहे।

डॉ. कलाम के विचार

  • उनका मानना था की एक अच्छे विद्यार्थी की पहचान प्रश्न पूछने से होती है।
  • वह कभी भी किसी भी नकारात्मक सोच और चीज को नहीं मानते थे।
  • दुनिया के सबसे बड़े शिक्षक जिंदगी और समय है। ज़िंदगी हमे समय का सही उपयोग करना सिखाती है जबकि समय हमे ज़िंदगी की उपयोगिता बताता है।
  • हम रोज की समस्याओं की वजह से अपने अंदर की प्रतिभा को भूल जाते है।
  • किसी भी सफतला का आनंद उठाने के लिए जीवन में उस कार्य के लिए कठनाईया उठाना बहुत जरूरी है।
  • हमें इस बात को स्वीकार करना चाहिए की हम जीवन में कुछ चूजों को नहीं बदल सकते।
    जो लोग आधे मन से किसी कार्य को करते है तो उन्हें आधी सफलता ही मिलती है जो अंत में बहुत दुखदायी महसूस होती है।
  • इंतजार करने वालों को उतना ही मिलता है जितना करने वाले छोड़ देते है।
  • हमें कभी भी हार नहीं माननी चाइये हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए।
  • छोटा लक्ष्य अपराध हैं इसलिए महान लक्ष्य होना चाहिये।
  • वास्तविक अर्थों में शिक्षा सत्य की खोज है। यह ज्ञान और आत्मज्ञान से होकर गुजरने वाली एक अंतहीन यात्रा हैं.
  • तब तक लड़ना मत छोड़ो जब तक अपनी तय की हुई जगह पर ना पहुँच जाओ- यही, अद्वितीय हो तुम। ज़िन्दगी में एक लक्ष्य रखो, लगातार ज्ञान प्राप्त करो, कड़ी मेहनत करो, और महान जीवन को प्राप्त करने के लिए दृढ रहो.
  • पक्षी अपने ही जीवन और प्रेरणा द्वारा संचालित होता हैं.
  • पक्षी के उड़ने के तरीके की जानकारी दे रहे थे, लेकिन जब छात्रों को समझ नही आया तो अध्यापक उनको समुद्र तट ले गए जहाँ।
  • महान शिक्षक ज्ञान, जूनून और करुणा से निर्मित होते हैं।
  • भगवान ने हमारे मष्तिष्क और व्यक्तित्व में  असीमित शक्तियां और क्षमताएं दी हैं। इश्वर की प्रार्थना हमें इन शक्तियों को विकसित करने में मदद करती है।

डॉ. अब्दुल कलाम के बारे में खास बातें

  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ।
  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम मसऊदी है।
  • इनके पिता का नाम जैनुलअब्दीन और माता का नाम अशिअम्मा था
  • कलाम के पिता बहुत गरीब थे और वह 10 भाई बहन होने के कारण छूटी उम्र से ही काम करने लगे थे।
  • अब्दुल कलाम बचपन से ही सुबह 4 बजे उठते थे। और नहा धोकर सुबह गणित पड़ने जाते थे. वह से लौटकर वह नमाज पढ़ते थे। उसके बाद वह सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे।
  • कलाम के “एयरस्पेस टेक्नोलॉजी” में आने का कारण वह अपने अध्यापक सुब्रह्मण्यम अय्यर को बताते हैं। एक बार उन्होंने अपनी कक्षा में एक प्रश्न पुछा की चिड़िया आसमान में कैसे उड़ती है इसे कोई न बता सका तब उनके गुरु जी के बहुत समझने पर किसी समझ न आया फिर वह उन्हें एक समुद्र के पास लेकर आये फिर उन्होंने सबको चिड़िया दिखाकर समझाया की कैसे चिड़िया उड़ती है। उस दिन की घटना नेअब्दुल कलाम की जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी. बाद मेंउन्होंने तय किया कि उड़ान की दिशा में ही अपना करियर बनाउं. बाद में फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की.
  • 1962 मैं कलाम जी ने इसरो ज्वाइन किया और उनके रहते भारत ने अपन पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया।
  • 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और उनके इस कार्य से भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया।
  • कलाम ने अग्नि, पृथ्वी जेसी मिसाईलें भारतीय तकनिकी से बनायीं।
  • 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे और देश के राजनीती को सहयोग दिया।
  • 1999 मैं ही उन्होंने न्यूक्लियर टेस्ट भी किये जिससे भारत परमाणु हथियार बनाने वालों में शामिल हो गया।
  • 1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर भी बनाया गया था।
  • सितंबर 1985 में त्रिशूल फिर फरवरी 1988 में पृथ्वी और मई 1989 में अग्नि का परीक्षण किया गया. इसके बाद 1998 में रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई. ब्रह्मोस को धरती, आसमान और समुद्र कहीं भी दागी जा सकती है.
  • कलाम को 1981 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया।

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Dear Students, मैं आशा करता हूँ की आपको Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय को पढ़कर अच्छा लगा होगा. अब आप भी Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi  के बारे में लिख सकते है और लोगो को समझा सकते है. यदि आपको इस Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi  से related कोई भी समस्या है तो आप हमें comment करके पूछ सकते है.

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One response to “Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय”

  1. Any full form says:

    nice article about apj abdul kalam

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